06 Aug सूरजमुखी की वैज्ञानिक खेती करके मुनाफा बढ़ायें
Increase profits by scientific cultivation of sunflower सूरजमुखी एक महत्वपूर्ण तिलहनी फसल है यह पहले भारत में अलंहत पौधे के रूप में उगाई जाती थी। सूरजमुखी को तिलहनी फसल के रूप में 1969 में परिचय कराया गया। पिछले कुछ वर्षों से अपनी उत्पादन क्षमता व अधिक मूल्य के कारण सूरजमुखी की खेती, हरियाणा के किसानों में दिनोंदिन लोकप्रिय होती जा रही है। सूरजमुखी को बड़े पैमाने पर उगाने से न केवल खाद्य तेल उपलब्ध होगा बल्कि विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी। सूरजमुखी जल्दी पकने वाली फसल है, सूखा को सहन कर सकती है, तापमान एवं प्रकाश के प्रति असंवेदनशील है अतःसूरजमुखी को खरीफ, रबी एवं ज़ायद मौसम में उगा सकते हैं। लेकिन उत्तरी भारत के लिए सबसे सही मौसम ज़ायद का है क्योंकि इस मौसम में मधुमक्खी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होती है, जो इसकी पैदावार के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है इसके तेल से वनस्पति घी एवं बीमारियों के उपचार के लिए बहुत उपयोगी है। सूरजमुखी की प्रमुख किस्में:- समय पर बिजाई के लिए सूरजमुखी की प्रमुख किस्में: (1) एच.एस.एफ.एच.848 : यह किस्म चै.चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय,हिसार द्वारा विकसित की गई है। यह अधिक उपज देने वाली संकर किस्म है इसकी औसत पैदावार 22-25 किवंटल/हैक्ट. है । इसके दानों में तेल की मात्रा 40 प्रतिशत होती है यह किस्म पकने में 95-100 दिन लेती हैं...