22 Apr बागवानी फसलों में फल मक्खी का समेकित प्रबन्धन
Integrated Management of Fruit Flies in Horticultural Crops फल-सब्जियॉ हमारे भोजन का अभिन्न अंग है। इनसे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक विटामिनों एवं खनिज लवणों की आपूर्ति होती है। बागवानी फसलेंं कृषि आमदनी का प्रमुख स्त्रोत है परन्तु इन पर लगने वाले कीटों का समय पर प्रबन्धन न किया जायें तो उत्पादन घटने के साथ-साथ गुणवत्ता में भारी कमी आ जाती है। फल मक्खी बागवानी फसलों का एक हानिकारक कीट है, जो समस्त भारत में पायी जाती है। फल मक्खी लगभग सभी प्रकार के फल व सब्जियों को नष्ट करती है, जिससे किसान को काफी आर्थिक हानि उठानी पडती है। फल मक्खी का जीवन चक्र :- वयस्क फलमक्खी लगभग 7 मि. मी. लम्बी होती है, जिसका सिर एवं उदर पीले-भूरे रंग का तथा वक्ष काला या पीला होता है। वक्ष एवं उदर वाले भाग पर गहरी धारियॉ होती है। इनके पंखो पर भी गहरी धारियॉ होती है। अण्डे देने से पूर्व मादा मक्खी फल का भली प्रकार निरीक्षण करती है। मक्खी अपने जननांग को फल के अन्दर प्रवेश कराकर, एक छोटा सा गड्डा बनाकर उसमें 5-12 अण्डे देती है। लगभग 24 घण्टे बाद अण्डे से पिल्लू (मैगट) निकलते है, जो फल के गूदे को खाकर पूरी तरह नष्ट कर देते है। प्रभावित फल सड़कर जमीन पर गिर जाते है। इसके पश्चात् पिल्लू जमीन के अन्दर प्रवेश कर...