Agriculture Knowledge for Everyone

cucumber Tag

Sustainable Disease Management in Cucumber Crops खीरा (Cucumis sativus) लौकी परिवार, Cucurbitaceae में व्यापक रूप से उगाया जाने वाला पौधा है। यह अपने एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण दुनिया भर में और भारत में खेती की जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण खीरा फसलों में से एक है। भारत दुनिया में खीरा का सबसे बड़ा निर्यातक बनकर उभरा है। अप्रैल-अक्टूबर (2020-21) मे भारत ने 114 मिलियन डॉलर के मूल्य के साथ 1,23,846 मीट्रिक टन खीरा निर्यात किया है । खीरे कई प्रकार के आकार में आते हैं, लेकिन सबसे आम गोलाकार किनारों वाला एक घुमावदार सिलेंडर है जो लंबाई में 60 सेमी (24 इंच) और व्यास में 10 सेमी (3.9 इंच) तक बढ़ सकता है। खीरे के पौधे पर 4 सेमी (1.6 इंच) के व्यास के साथ पीले रंग के फूल खिलते हैं। ककड़ी की बेलें 5 मीटर (16.4 फीट) की लंबाई तक बढ़ सकती हैं, खीरा गर्म, शुष्क परिस्थितियों में, गर्म दिनों और गर्म रातों के अनुकूल होता है और 30°C (86°F) के आसपास सबसे अच्छा बढ़ता है। खीरा, जिसे gherkin भी कहा जाता है। खीरे के उपयोग खीरे के स्लाइस को आमतौर पर सलाद में कच्चा खाया जाता है। ये 12 इंच तक लंबे हो सकते हैं और इनकी त्वचा चिकनी होती है। ऐसा लगता है कि "बर्पलेस" वेरिएंट हैं जिनमें कम कुकुर्बिटासिन होता...

Management of Powdery mildew disease of cucurbit family vegetables ककड़ी वंश सब्जियों का एक महत्वपूर्ण समूह है जो कुकुरबिटेसी परिवार से संबंधित है, जो पूरे भारत और दुनिया के अन्य उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर उगाया जाता है। भारत में मुख्य रूप से खाद्य फसलों के रूप में उगाई जाने वाली फसलों में ककड़ी वंश सब्जियों की एक समृद्ध विविधता है जो कुल सब्जी उत्पादन का लगभग 5-6% हिस्सा है। कुकुरबिटेसी परिवार के अंतर्गत लौकी, खरबूजे, स्क्वैश और ककड़ी फसलों के मुख्य समूह हैं, जो अपने पोषण और औषधीय मूल्यों के लिए और फसल विविधता के संभावित स्रोतों के रूप में जाने जाते हैं। 200 से अधिक ज्ञात रोगजनक विभिन्न ककड़ी वंश सब्जियों को संक्रमित करते हैं, जिनमें से पाउडरी मिल्ड्यु एक गंभीर बीमारी है और भारत में उगाई जाने वाली ककड़ी वंश सब्जियों की उपज हानि का कारण बनती है। पाउडरी मिल्ड्यु रोग के लक्षण: यह एक कवक रोग है और वायुजनित बाध्य बायोट्रॉफ़्स जैसे स्फेरोथेका फुलिजिनिया और एरिसिफे सीकोरेसीयरम के कारण होता है। संक्रमण की शुरूआती अवस्था में संक्रमित पत्तियों के दोनों ओर सफेद गोलाकार चूर्ण जैसे धब्बे पड़ जाते हैं। बाद के चरण में सफेद धब्बे बढ़ जाते हैं और पौधे की पूरी पत्ती, डंठल, तना और शाखाएँ सफेद चूर्ण बीजाणुओं से ढक जाती हैं और अंततः पत्तियां झड़ हो जाता...

8 Major insects and diseases of cucurbits and their control measures कद्दू वर्गीय सब्जियों में मुख्यतः कद्दू ,करेला ,लौकी ,ककड़ी, तोरई, पेठा ,परवल  एवं खीरा इत्यादि किस वर्ग में आते हैं l कद्दू वर्गीय सब्जियों के प्रमुख कीट एवं प्रमुख रोग इस प्रकार है। 1. लाल पंपकिन बीटल  कद्द वर्गीय सब्जियों में एक कीट जो मुख्य रूप से कद्दू वर्गीय फसल पर आक्रमण करता है वह कीट है लाल पंपकिन बिटल यह लाल रंग का किस पौधे के पत्तियों को शुरुआती अवस्था में पत्तियों को खाकर नष्ट कर देता है जिससे फसल की बढ़वार बिल्कुल रुक जाती है l   लाल पंपकिन बिटल  लक्षण व जीवनकाल : लाल पंपकिन बिटल के मादा पीले रंग के होते हैं व 5 से 15 दिनों के बाद यह हेच हैचिंग अंडा देते हैं  क्रीमी सफेद रंग का युवा जिसे लारवा कहते हैं 14 से 25 दिनों के पश्चात युवा अवस्था में यह पहुंच जाता है और 7 से 20 दिनों तक इसी अवस्था में होता है जब तक कि वयस्क अवस्था में ना पहुंच जाए l मादाएं 150 से 300 अंडे देती हैं वह 10 महीने तक जीवित रहते हैं और उसके  वयस्क कीट पत्तियों को खाकर नष्ट कर करते हैं l रोकथाम: जैविक नियंत्रण: 4 लीटर पानी में आधा कप लकड़ी की राख और आधा कब चुना मिलाएं और कुछ घंटों के लिए छोड़ दें...

सब्‍जी माइक्रोग्रीनस - पोषण का एक संभावित स्रोत Microgreens are young and tender edible seedlings produced using the seeds of different species of vegetables, herbaceous plants, aromatic herbs and wild edible plants (Di Gioia and Santamaria 2015a, b). The edible portion constitutes single stem, the cotyledon leaves and, often, the emerging first true leave (Di Gioia et al. 2017). A few days of photosynthesis of microgreen is known to provide nearly 4-9 times more nutrients including antioxidants, vitamins and minerals than their mature counterparts. Microgreens first appeared in the menus of the chefs of San Francisco, in California, at the beginning of the 1980s. By geography, North America contribute ~50% of market share in 2019. . During 2020-2025, NutriGreens market at the global level is anticipated to grow at a CAGR (Compound annual growth rate) of 7.5-8.0%. Traits of Microgreens The gaining popularity of these cotyledonary leafy greens is due to their pleasing palette of colors, textures and flavors. Microgreens represent a new class of vegetables that can be considered as “functional foods”  or “super foods” (Treadwell et al. 2010), because they serve as rich source of bioactive compounds such as vitamins, minerals, and antioxidants, along with the necessary nutrients required for human body (Janovská et al., 2010; Xiao et al., 2012). Microgreens are frequently called...

Under relay farming method, before the harvesting of base crop, the next crop is sown in the field in the standing condition of base crop and the subsequent crop is called Utera crop. With the use of relay farming, the farmer brother is able to harvest crops with limited resources (land, time, water, labor etc.) and less cost. अधिक आय के लिए गेहूँ में खरबूज कि रिले खेती  सब्जियों का भारतीय कृषि में महत्वपूर्ण स्थान है। ये बहुत सी दूसरी फसलों की तुलना में प्रति ईकाई क्षेत्र में अधिक पैदावार देती है और कम समय में तैयार हो जाती है। भारत में खीरा वर्गीय कुल की लगभग 20 प्रकार की सब्जियों की खेती की जाती है। इनमें धीया/ लौकी, तोरी, करेला, खीरा, तरबूज, खरबूज, ककड़ी, कद्दू/ सीताफल, चप्पनकद्दृ, टिण्डा, परवल, फुट, आदि मुख्य है। ये सभी बेलवाली फसलें होती हैं जो कम कैलोरी व सरलता से पचने वाली होने के साथ-साथ विटामिन्स, अमीनो अम्ल एवं खनिज लवणों का अच्छा स्त्रोत है। उत्तर भारत के मैदानी भागो में साघारणत्या आलू, गाजर, मटर, सरसों, तोरिया आदि फसल लेने के उपरातं अधिकतर किसान भाई जनवरी के अंत से लेकर मार्च के प्रथम पखवाड़े तक खीरा-ककड़ी वर्गीय सब्जियों की बुवाई बीज द्वारा करते है तथा फसल की पैदावार अप्रैल से जून तक चलती है। दिसंबर या जनवरी माह में...

ग्रीनहाउस में खीरे की उन्नतशील खेती  साधारणत:खीरा उष्ण मौसम की फसल है। वृध्दि की अवस्था के समय पाले से इसको अत्यधिक हानि होती है। फलों की उचित वृध्दि व विकास के लिए 15-200c का तापक्रम उचित होता है। आजकल विदेशों मे उपलब्ध किस्मों को सर्दी के मौसम मे भी ग्रीन हाउस या पोली हाउस मे सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। इस प्रकार के ग्रीनहाउस या पॉलीहाउस को ठण्डा या गर्म करने के आवष्यकता नही होती है तथा पॉली हाउस में एक वर्ष मे खीरे की तीन फसले पैदा करके अत्यधिक लाभ लिया जा सकता है। पौध तैयार करना ग्रीन हाउस नर्सरी में खीरे की वर्ष भर पौध तैयार की जा सकती है। बीजों को ट्रे में बोने के बाद अंकुरण हेतु 24 से 250c.तामक्रम पर रखा जाता है। अंकुरण के तुरन्त बाद उनको नर्सरी ग्रीनहाउस या पॉलीहाउस मे फैला दिया जाना चाहिये। इस प्रकार पौध में जड़ों का विकास बहुत अच्छा होता हैं ! सर्दी के मौसम मे खीरे की पौध तैयार होने से 25-28 दिन तक का समय लेती है। लेकिन गर्मी के मौसम में इस विधि से पौध 15-18 दिन में रोपाई योग्य हो जाती है।भूमि की तैयारी भूमि व उसकी तैयारी ग्रीन हाउस के अन्दर पौध की रोपाई से एक माह पहले खेत की गहरी जुताई करके भूमि को अच्छी प्रकार...

Early crop cultivation technique of cucurbit crops लता या बेल वाली सब्जियों जैसे लौकी, तोरई, कददू, तरबूज, खरबूजा, पेठा, खीरा, टिण्डा, करेला आदि की खेती मैदानी भागो में, गर्मी के मौसम में मार्च से लेकर जून तक की जाती है। इन सब्जियों की अगेती खेती जो अधिक आमदनी देती है, करने के लिए पॉली हाउस तकनीक में जाड़े के मौसम में इन सब्जियों की नसर्री तैयार करके की जा सकती है। पहले इन सब्जियों की पौध तैयार की जाती है तथा फिर मुख्य खेत में जड़ो को बिना क्षति पहुँचाये रोपण किया जाता है। इन सब्जियों की पौध तैयार करने से अनेक लाभ हैं जो इस प्रकार हैं। एक से डेढ़ माह अगेती फसल ली जा सकती है। वर्षा, ओला, कम या अधिक तापमान, कीड़े व रोगो से पौध सुरक्षा कर सकते है। पौधों के लिए आवश्यक वातावरण प्रदान कर समय से पौधे तैयार किये जा सकते है। बीज दर कम लगती है जिससे उत्पादन लागत कम होती है। लता वाली सब्‍जीयों की उन्नत किस्में विभिन्न बेलवाली सब्जियों की उन्नत किस्में तथा संकर निम्नलिखित है जिसको लगाकर किसान अधिक आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। क्र.सं. सब्जियां उन्नत किस्में संकर 1. खीरा जापानीज लोंग ग्रीन, स्ट्रेट एट, पोइन सेट, पूसा उदय, स्वर्ण अगेती, स्वर्ण शीतल, स्वर्ण पूरणा पूसा संयोग, पंत संकर खीरा-1 2. लौकी काशी गंगा, नरेन्द्र रश्मि, नरेन्द्र ज्योति, पूसा नवीन पूसा संदेश, पंजाब कोमल पूसा मेघदुत,पूसा मंजरी,पूसा हाइब्रिड-3 3. कुम्हड़ा काशी...

ग्रीनहाउस मे बीज रहित खीरे की वर्ष भर उत्पादन प्रौद्योगिकी   साधारणत: खीरा उष्ण मौसम की फसल है। वृध्दि की अवस्था के समय पाले से इसको अत्यधिक हानि होती है। फलों की उचित वृध्दि व विकास के लिए 15-20 डिग्री से.ग्रे. का तापक्रम उचित होता है। खरबूजा व तरबूज की अपेक्षा खीरे को कम तापक्रम की आवष्यकता पड़ती है। आजकल विदेशों मे उपलब्ध किस्मों को सर्दी के मौसम मे भी ग्रीनहाउस या पोलीहाउस मे सफलता पूर्वक उगाया जा सकता है। इस प्रकार के ग्रीनहाउस या पॉलीहाउस को ठण्डा या गर्म करने के आवष्यकता नही होती है तथा इस प्रकार के प्राकृतिक वायु संवाहित ग्रीनहाउस या पॉलीहाउस में एक वर्ष मे खीरे की तीन फसले पैदा करके अत्यधिक लाभ लिया जा सकता है। यह तकनीकी बड़ी व मध्यम जनसंख्या वाले षहरो के चारों ओर खेती करने वाले कृषको के लिये बहुत लाभकारी व उपयोगी प्रमाणित हो सकती है। पौध तैयार करना (Sapling preparation) नियंत्रित स्थिति मे ग्रीनहाउस नर्सरी में खीरे की वर्ष भर पौध तैयार की जा सकती है। सर्दी के मौसम मे खीरे की पौध तैयार होने से 25-28 दिन तक का समय लेती है। लेकिन गर्मी के मौसम में इस विधि से पौध 15-18 दिन में रोपाई योग्य हो जाती है। सर्दी में बीजों को ट्रे में बोने के बाद अंकुरण हेतु...