30 Aug मूंगफली के प्रमुख रोग एवं प्रबंधन
5 important diseases of groundnut. मूंगफली तिलहनी फसलों के रुप में ली जाने वाली प्रमुख फसल है। मूंगफली की खेती मुख्य रुप से रेतीली एवं कछारी भूमियों में सफलता पूर्वक की जाती है। मूंगफली के दानों से 40-45% तेल प्राप्त होता है जो कि प्रोटिन का मुख्य स्त्रोत है। मूंगफली की फल्लियों का प्रयोग वनस्पति तेल एवं खलियों आदि के रुप में भी किया जाता है। मूंगफली का प्रचुर उत्पादन प्राप्त हो इसके लिये पौध रोग प्रबंधन की उचित आवश्यकता महसूस होती है। पौध रोग की पहचान एवं प्रबंधन इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। मूंगफली के प्रमुख रोग एवं रोग जनक: क्र. रोग रोग जनक 1 टिक्का या पर्ण चित्ती रोग सर्कोस्पोरा अराचिडीकोला/ सर्कोस्पोरा परसोनाटा 2 रस्ट अथवा गेरूआ रोग पक्सिनिया अरॉचिडिस 3 स्टेम रॉट एस्क्लेरोसियम रोल्फ्साइ 4 बड नेक्रोसिस बड़ नेक्रोसिस वायरस 5 एनथ्रक्नोज कोलेटोट्राइकम डिमेटियम/ कोलेटोट्राइकम केपसिकी 1. मूंगफली का पर्ण चित्ती अथवा टिक्का रोग- भारत में मूंगफली का यह एक मुख्य रोग है और मूंगफली की खेती वाले सभी क्षेत्रों में पाया जाता है। भारत में उगार्इ जाने वाली मूंगफली की समस्त किस्में इस रोग के लिये ग्रहणषील है। फसल पर इस रोग का प्रकोप उस समय होता है जब पौधे एक या दो माह के होते है। इस रोग में पत्तियों के ऊपर बहुत अधिक धब्बे बनने के कारण वह शीघ्र ही पकने के पूर्व गिर जाती है, जिससे पौधों से फलियां बहुत कम और छोटी प्राप्त होती हैं। मूंगफली का पर्ण चित्ती अथवा टिक्का रोग रोग लक्षण:- रोग के लक्षण...