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Maintenance of farm machinery कृषि हमारा जीवन है। यह हमारे देश एवं राज्य की अर्थव्यवस्था का मेरुदण्ड है। राज्य में ही नही पुरे देश में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है पर आज आवश्यकता है इन संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग से कृषि उत्पादकता को शीघ्र बढ़ाने की, इसलिए कृषि यंत्रों का योगदान कृषि में पैदावार बढ़ाने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है । इन यंत्रों की आवयकता खेत की तैयारी से लेकर अनाज को बाजार पहुँचाने तक प्रत्येक कार्य में होता है। अतः इन उन्नत कृषि यत्रों के रख रखाव के बारे में जाने बिना उन्हें प्रयोग करने से किसान भाइयों की परेशानी बढ़ जाने की संभावना है। इसलिए किसी भी यंत्र को प्रयोग करने से पहले उससे संबधित सभी उपलब्ध जानकारी प्राप्त कर लेना चाहिए एवं सही निर्देशों के अनुसार यंत्र की देख-रेख करना चाहिए। कृषि में मुख्यतः निम्न प्रक्रियायों में यंत्रो का परिचालन किया जाता है जैसे: भूमि समतलीकरण, जुताई, बुआई, फसल सुरक्षा, कटाई एवं गहाई। भूमि समतलीकरण (लेज़र लेवेलर) यंत्र एवं उसका रख-रखाव लेज़र लेवलर सूक्ष्मता खेती का बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू है। यह परंपरागत विधियों से एकदम हटकर एक  अत्याधुनिक तकनीक है। जिसमे किरणों के द्वारा ट्रेक्टर के पीछे लगे मांझा (बकेट) को नियंत्रित करके भूमि को पूर्णतया समतल किया जाता है। लेज़र लेवलर के भाग : ट्रेक्टर 50 हार्स पॉवर,  ट्रांसमीटर , सेंसर...

भारत में कृषि मशीनीकरण का दायरा और विकास The technological improvements in Indian agriculture since mid sixties have brought about revolutionary increase in agricultural production. The country was facing acute food shortages till eighties has now become not only self sufficient but also a net exporter of food grains. This has been made possible due to evolution of high yielding crop varieties, increased use of chemical fertilizers, development of irrigation facilities and plant protection measures accompanied by effective price support programmes of farm products. The increased use of purchased inputs in agriculture necessitated to raise their use efficiencies though mechanization. The productivity of farms depends greatly on the availability and judicious use of farm power by the farmers. Agricultural implements and machines enable the farmers to employ the power judiciously for production purposes. Agricultural machines increase productivity of land and labor by meeting timeliness of farm operations and increase work out-put per unit time. Besides its paramount contribution to the multiple cropping and diversification of agriculture, mechanization also enables efficient utilization of inputs such as seeds, fertilizers and irrigation water. Scope of farm mechanization Farm mechanization has been helpful to bring about a significant improvement in agricultural productivity. Thus, there is strong need for mechanization of agricultural operations. The factors that justify the strengthening of farm...

Applications of Unmanned Aerial Vehicles Drones in Agriculture मानव रहित हवाई वाहन (UAV) को आमतौर पर ड्रोन के रूप में भी जाना जाता है׀ एक मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी) एक प्रकार का विमान है जो मानव पायलट के बिना काम करता है׀ पिछले 10-15 वर्षों में, रेडियो नियंत्रित मॉडल से उच्च अंत प्रौद्योगिकी परिवर्तनों के साथ, ड्रोन विभिन्न प्रकार के कार्यों से एकीकृत हैं׀ मूल रूप से, ड्रोन प्रौद्योगिकी विमान-रोधी लक्ष्यों का संचालन करने, खुफिया जानकारी जुटाने और दुश्मन के कुछ क्षेत्रों पर नजर रखने के लिए सेना द्वारा नियोजित की जाती थी परन्‍‍‍‍तू आजकल ड्रोन तकनीक का उपयोग आम नागरि‍‍‍‍‍‍कों द्वारा भी विभिन्न प्रकार के लिए कार्यों मे किया जाता है।  कृषि में अभी तक ड्रोन का उपयोग कुछ ही जगह पर किया जा रहा है। इसलिए, कृषि में यूएवी यानि‍ मानव रहित हवाई वाहन के उपयोग की काफी संभावनाए हैं। यूएवी एसोसिएशन, इंटरनेशनल ने हर साल 85-92% की वार्षिक वृद्धि , विशेष रूप से कृषि के बाजार में, दर्ज की है। वास्तव में, कृषि ड्रोन बाजार आने वाले वर्षों में 38% से अधिक बढ़ने की उम्मीद है। बढ़ती जनसंख्या स्तर और बदलते जलवायु पैटर्न के कारण, कुशल कृषि की आवश्यकता अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है। यूएवी के प्रकार  यूएवी के चार प्रमुख प्रकारों की पहचान की जाती है, जो हैं: मल्टी रोटर यूएवी फिक्स्ड -...

Tractor maintenance and precautions ट्रैक्टर एक बहुत ही उपयोगी शक्ति का साधन है तथा इसमें लागत भी काफी ज्यादा लगती है जो कि किसानों को हर स्तर पर काम आता है। अतः इसकी देखभाल भी समय-समय पर करनी चाहिए। इससे यह लम्बे समय तक  कार्य करता है, कोई बाधा भी नहीं आती तथा यह जल्दी ख़राब भी नहीं होता है। ट्रैक्टर का रख रखाव प्रतिदिन, साप्ताहिक, एवं मासिक रूप से करना चाहिए। किसान को ध्यान रखना चाहिए कि ट्रैक्टर के साथ ही उसकी परिचालन पुस्तिका को लें तथा उसे पढ़कर उसके प्रमुख बिन्दुओं पर सुझाये गए कार्य का अनुपालन करें। अच्छा होगा यदि ट्रैक्टर उपयोग पुस्तिका (लाग बुक) बनायें, जिससे वर्तमान तथा भविष्य में रिपेयर एवं मरम्मत करनी है या नहीं इसका आभास पहले ही हो जाता है। ट्रैक्टर की मरम्मत, दिनों की संख्या के साथ-साथ, प्रयोग हुए कुल घंटों की संख्या पर निर्भर करती है इसके लिए प्रत्येक ट्रेक्टर में एक  घड़ी लगी रहती है। ट्रैक्टर के उपयोग के समय इसके विभिन्न प्रणालियों की वस्तुस्थिति की जानकारी उपयोगकर्ता को होनी चाहिए जिससे किसी भी अनावश्यक टूट-फूट से कार्य के समय किसी भी प्रकार के व्यावधान से बचा जा सके।  ट्रैक्टर परिचालन से सम्बंधित कुछ प्रमुख ट्रैक्टर प्रणाली निम्नवत हैं:  हवा सफाई तंत्र (Air cleaning system) इसका मुख्य कार्य इंजन में जाने वाली हवा की सफाई...

Some important points for periodic care and safety of tractor and tractor driver ट्रैक्टर एक स्व-चालित मशीन है जिसका उपयोग कृषि मशीन के संचालन के लिए किया जाता है। ट्रैक्टर कई प्रकार के छोटे-छोटे उपकरणों से मिलकर बना है  जो कृषि में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कृषि फार्म पर लगभग 90% काम ट्रैक्टर  से किया जाता है। अपने ट्रैक्टर को लंबे समय तक सबसे कम खर्चों में अच्छी तरह से काम करने के लिए और  ट्रैक्टर की दक्षता को नियमित बनाये रखने के लिऍ ट्रैक्टर का समय-समय पर देख-रेख एवं रख-रखाव अति आवश्यक होता है, ट्रैक्टर की समय-समय पर देख-रेख तथा रख-रखाव 10-12 घंटे के फील्ड वर्क के बाद ट्रैक्टर के लिए दैनिक निरीक्षण कार्य। रेडिएटर के पानी या कुलेटं की जांच करें और अगऱ रेडियेटऱ मे पानी  या कुलेटं पुऱा नही है तो इसे फिर से भरें। पूर्व एयर क्लीनर खोलकर साफ करे और एयर क्लीनर मे तेल के स्तर की जांच करें। यदि यह सटीक लेवल से कम है तो तेल को सटीक स्तर के निशान तक पुरा करे । यदि मौजूदा तेल गंदा हो गया है तो साफ तेल भरें। इंजन में तेल के स्तर की जाँच अवशय करें जो इंजन के ठंडा होने के लगभग 15 - 20 मिनट के बाद किया जा सकता है। यदि तेल सटीक लेवल से कम है...

ड्रिप सिंचाई प्रणाली का रखरखाव  Drip irrigation means drop by drop application of water directly to the plant root zone. Drip irrigation saves up to 50% of water on comparison to flood and furrow system of irrigation. Fertigation via Drip is 30% more effective than Flooding. The Combination of drip irrigation and Fertigation increases the productivity by up to 200% and in sugarcane by 133%. Drip irrigation Saves the energy. Reduces the weed growth. Reduces the Incidence and Transmission of Pests and Diseases. The water that is been used for irrigation is not always pure. it contains several physical (sand. silt. clay etc..). chemical (Carbonates. Bicarbonates etc.…) and biological (microorganisms. algae etc.…) impurities. When the drip irrigation system is not maintained properly. Several problems arise. They may be Reduction in irrigation efficiency. Blocking or clogging of Drippers or emitters and Blocking or clogging of Lateral pipes. if this problem is not rectified. the life span of the drip irrigation system reduces significantly. leading to the collapsing of entire drip system. So. in order to get rid of such kind of problems Proper and Regular maintenance of Drip irrigation system is necessary. For optimum performance of drip irrigation system. the maintenance schedule can be divided into daily. fortnightly. monthly and half-yearly maintenance activities. DAILY MAINTENANCE To maximize...

Reaper binder: suitable machine for wheat harvesting रबी की सबसे महत्‍वपूर्ण फसलों में से गेंहॅू  एक है । वर्ष 2016-17 में देश में कुल 31 मिलियन हेक्‍टेयर क्षेत्रफल में गेंहॅू बोया गया तथा 98 मिलियन टन गेंहॅू का उत्‍पादन हुआ और गेंहॅू की औसत उपज 3161 कुन्‍तल/हेक्‍टेयर रही । गेंहॅू  की फसल तैयार होते-होते मौसम बदल जाता है और तेज हवाओं एवं बारिश की शंका बनी रहती है । ऐसे में किसान की चिंता होती है कि पकी फसल को काटकर जल्‍द से जल्‍द घर में लाया जाए । गेंहॅू को काटकर काटते समय ही मढ़ाई करके लाने के लिए कम्‍बाइंड हारबेस्‍टर का उपयोग बढ़ता जा रहा है । इस समय कम्‍बाइंड हारबेस्‍टर का प्रयोग रबी फसल की कटाई में खूब हो रहा है । थ्रेसिंग से निकले भूसे को खेत में छोड़ देती है । जिसकी मात्रा करीब 4 से 5 टन / हेक्‍टेयर होती है । साथ ही कम्‍बाइंड हारबेस्‍टर करीब 30 सेमी ऊपर से फसल को काटता है और कटाई के बाद फसल का ठॅूठ खेत में खड़ा रह जाता है । इससे बड़ा नुकसान होता हैं । एक तो फसल से मिलने वाले अवशेष अर्थात भूसे का नुकसान होता है जो जानवरों के खाने में प्रयोग होता है जो कि‍मती भी है और जिसकी बहुत कमी रहती है और दुसरा, ...

Save oil and energy in farming खेती में खनिज तेल की बहुत ज्यादा खपत है. तेल के दाम दिन प्रतिदिन बढते ही जा रहे है अतः यह आवश्यक हो गया है की इनका उपयोग किफ़ायत के साथ किया जाए. किसान भाइयो को ट्रेक्टर और इंजनों में डीजल की खपत कम करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. ये बातें निम्न हैं: प्रत्येक ट्रेक्टर और इंजन का निर्माता नए मशीन के साथ निर्देश पुस्तिका देता है. मशीनों के उपयोग करने से पहले उसकी निर्देश पुस्तिका को ध्यान से पढ़ें और उसमे लिखी सलाह के अनुसार ही मशीन का प्रयोग करें. इंजन  चालू  करने  पर यदि टैपित का शोर  सुने पड़ता है तो इसका मतलब है इंजन में  हवा कम जा रही है जिसके कारण डीजल की खपत बढ़ जाएगी .इसलिए टैपित से आवाज़ आने पर उसे फिर से बंधवाना चाहिए. इंजन से काला धुआं निकलने का मतलब है ज्यादा डीजल खर्च हो रहा है. इंजेक्टर या इन्जेक्सन पम्प की कोई खराबी इसका कारण हो सकती है. अतः ट्रैक्टरों में ६०० घंटे प्रयोग के बाद इंजेक्टर की जाँच करवा कर उसे फिर से बन्धवाएँ. इंजन से काम लेना शुरू करने पर  कुछ काला धुआं निकलता है पर यह जल्दी ही स्वयं साफ हो जाता है. यदि इंजेक्टर और इन्जेक्सन पम्प ठीक होने पर भी काला...