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जैविक खेती के जरिए युवाओं का विकास एवं सशक्तिकरण  सर अल्बर्ट हॉवर्ड, एफएच किंग, रुडोल्फ स्टेनर और अन्य लोगों द्वारा 1900 के दशक की शुरुआत में जैविक कृषि की अवधारणाओं को विकसित किया गया था, जो मानते थे कि पशु खाद , फसलों को कवर, फसल रोटेशन, और जैविक आधारित कीट नियंत्रण। हावर्ड, भारत में एक कृषि शोधकर्ता के रूप में काम कर रहे थे, उन्होंने पारंपरिक और टिकाऊ खेती प्रथाओं से बहुत प्रेरणा प्राप्त की, जो उन्होंने वहां सामना किया और पश्चिम में उनके गोद लेने की वकालत की। इस तरह की प्रथाओं को विभिन्न अधिवक्ताओं ने आगे बढ़ाया - जैसे कि जे.आई. रोडले और उनके बेटे रॉबर्ट, 1940 और उसके बाद, जिन्होंने ऑर्गेनिक गार्डनिंग और फार्मिंग पत्रिका प्रकाशित की और जैविक खेती के लिए कई ग्रंथों का प्रकाशन किया। राहेल कार्सन द्वारा 1960 के दशक में साइलेंट स्प्रिंग के प्रकाशन से जैविक खाद्य पदार्थों की मांग को बढ़ावा दिया गया था, जिसमें कीटनाशकों से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान की मात्रा का दस्तावेजीकरण किया गया था।पारंपरिक कृषि की तुलना में, जैविक खेती कम कीटनाशकों का उपयोग करती है, मिट्टी के कटाव को कम करती है, भूजल और सतह के पानी में नाइट्रेट की कमी होती है, और जानवरों के कचरे को खेत में वापस लाती है। इन लाभों को उपभोक्ताओं के लिए उच्च...

Different types of organic fertilizer for healthy soil and more crop production वर्तमान में भारत की जनसंख्या 1.35 अरब (विश्व बैंक, 2018) है तथा खाद्यान्न उत्पादन 285 मिलियन टन (2017-18) है। एक अनुमान के अनुसार भारत की जनसंख्या 2050 तक 1.67 अरब हो जायेगी। भारत की इस बढ़ती हुई जनसंख्या की खाद्यान्न आवश्यकता को पूरा करने के लिए खाद्यान्न उत्पादन को 2050 तक 333 मिलियन टन तक बड़ाना पडेगा। बडती हुई खाद्यान्न माॅग की पुर्ति के लिए अधिक से अधिक खाद्यान्न उत्पादन के प्रयास कि‍ए जा रहे है। खाद्यान्न उत्पादन बढाने के लिए रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध  प्रयोग किया जा रहा है जिससे प्रकृति में उपस्थित जैविक व अजैविक चक्र प्रभावित हो रहे है। भूमि की उर्वरकता कम होती जा रही है और भूमि अनेक प्रकार के रसायनों से वह प्रदूषित होकर धीरे-धीरे बंजर होती जा रही है। इसके साथ ही उसमें उपस्थित लाभदायक जीवों की उपस्प‍थि‍ति‍ पर भी विपरित प्रभाव पडता है। इससे जैविक व अजैविक पदार्थो के चक्र का संतुलन बिगड गया है। हम सभी जानते है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार व किसानों की आय का प्रमुख श्रोत खेती है जो दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। अतः इन सभी प्रकार की समस्याओं से निपटने के लिए विगत कुछ वर्षों से जैविक खाद के प्रयोग को बडावा दिया जा रहा है। जिससे...

हरी खाद : टिकाऊ खेती की कुंजी वर्तमान समय में खेती में रसायनिक उर्वरकों के असंतुलित प्रयोग एवं सीमित उपलब्धता को देखते हुये अन्य पर्याय भी उपयोग में लाना आवश्यक हो गया है तभी हम खेती की लागत को कम कर फ़सलों की प्रति एकड उपज को भी बढा सकते हैं, साथ ही मिट्टी की उर्वरा शक्ति को भी अगली पीढी के लिये बरकरार रख सकेंगे। हरी खाद मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिये एवं फ़सल उत्पादन हेतु जैविक माध्यम से तत्वों की पूर्ति का वह साधन है जिसमें हरी वानस्पतिक सामग्री को उसी खेत में उगाकर या कहीं से लाकर खेत में मिला दिया जाता है। इस प्रक्रिया को ही हरी खाद देना कहते हैं। सीमित संसाधनो के समुचित उपयोग हेतु कृषक एक फसली द्वीफसली कार्यक्रम व विभिन्न फसल चक्र अपना रहे है, जिससे मृदा का लगातार दोहन हो रहा है जिससे उसमें उपस्थित पौधों के बढ़वार के लिए आवश्यक पोषक तत्व नष्ट होते जा रहें है। इस क्षतिपूर्ति हेतु विभिन्न तरह के उर्वरक व खाद का उपयोग किया जाता है। उर्वरक द्वारा मृदा में सिर्फ आवश्यक पोषक तत्व जैसे नत्रजन, स्फुर पोटाश जिंक इत्यादि की पूर्ति होती है मगर मृदा की संरचना उसकी जल धारणा क्षमता एवं उसमें उपस्थित सूक्ष्मजीवों को क्रियाशीलता बढ़ाने में इनका कोई योगदान नहीं होता। अत इस सबकी...

Organic Farming: Land and Life Requirementsभारत वर्ष में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है और कृषकों की मुख्य आय का साधन खेती है। 60वें दशक की हरित क्रांति ने यद्यपि देश को खाद्यान्न की दिशा में आत्मनिर्भर बनाया लेकिन इसके दूसरे पहलू पर यदि गौर करें तो यह भी वास्तविकता है कि खेती में अंधाधुंध उर्वरकों के उपयोग से जल स्तर में गिरावट के साथ मृदा की उर्वरता भी प्रभावित हुई है एक समय बाद खाद्यान्न उत्पादन न केवल स्थिर हो गया बल्कि प्रदूषण में भी बढ़ोतरी हुई है और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा हुआ है। इसलिए इस प्रकार की उपरोक्त सभी समस्याओं से निपटने के लिये गत वर्षों से निरन्तर जेविक खेती के सिद्दांत को अपनाया गया है। जैविक खेती जीवों के सहयोग से की जाने वाली खेती के तरीके को कहते हैं। जैविक खेती कृषि की वह विधि है जो संश्लेषित उर्वरकों एवं संश्लेषित कीटनाशकों के अप्रयोग या न्यूनतम प्रयोग पर आधारित है तथा जो भूमि की उर्वरा शक्ति को बचाये रखने के लिये फसल चक्र, हरी खाद, कम्पोस्ट आदि का प्रयोग करती है. जैविक खेती वह सदाबहार कृषि पद्धति है जो पर्यावरण की शुद्धता, जल व वायु की शुद्धता, भूमि का प्राकृतिक स्वरूप बनाने वाली, जल धारण क्षमता बढ़ाने वाली और धैर्यशील कृत संकल्पित होते हुए रसायनों...

 Natural tonic for Farm - Green manure हरी खाद (ग्रीन मैन्योर) भूमि के लिये वरदान है। यह भूमि की संरचना को भी सुधारते हैं तथा पोषक तत्व भी उपलब्ध कराते हैं। जानवर को खाने में जैसे रेशेवाले पदार्थ की मात्रा ज्यादा रहने से स्वास्थ्य के लिये अच्छा रहता है उसी प्रकार रेशेवाले खाद (हरी खाद) का खेतों में ज्यादा प्रयोग खेत के स्वास्थ्य के लिये अच्छा है। हरी खाद एक प्रकार का जैविक खाद है जो शीघ्र विघटनशील हरे पौधों विशेषकर दलहनी पौधों को उसी खेत में उगाकर, जुताई कर मिट्टी में मिला देने से बनता है। जीवित व सक्रिय मृदा वही कहलाती है जिसमें अधिक जीवांश की मात्रा होती है। जीवाणुओं का भोजन प्राय: कार्बनिक पदार्थ ही होते हैं। मिट्टी की उर्वराशक्ति जीवाण्ाुओं की मात्रा एवं क्रियाशीलता पर निर्भर करती है। केवल जैविक, हरी खाद एवं जीवाणु खाद द्वारा ही स्थाई रूप से मिट्टी की उर्वराशक्ति में वृध्दि कर सकते हैं। जयपुर जिला में खेती योग्य भूमि तीन तरह की है - (क) टांड या उपरी भूमि (ख) मध्यम भूमि एवं (ग) दोन या निचली भूमि। टांड और मध्यम भूमि में बलुआही मिट्टी की अधिकता पायी जाती है। इसमें जैविक पदार्थ बहुत कम होने की वजह से नाईट्रोजन, फॉस्फोरस और सल्फर तत्वों की कमी होती है। इसकी अम्लीयता भी अधिक होती है। अधिक अम्लिक होने...

मिट्टी की उर्वरता का संरक्षण और जैविक पदार्थों की भूमिका Maintenance of soil fertility is a great problem to our farmers. Cultivation of particular crop year after year in the same field decreases the soil fertility. To increase the soil fertility, it is necessary to check the loss of nutrient and to increase the nutrient content of soil. The following things must be properly followed for increasing the fertility of soil. Proper use of land improve soil fertility Good yield of crop is not possible if we cultivate any crop in any land. So it is necessary to select the crop which is suitable for a particular land. Practical experience will be helpful in this regard. The crop should be cultivated on the basis of the nature soil. As for example, cultivation of paddy is best suited in low land clay soil. Good tillage increase soil fertility Good tillage is necessary to bring the soil in suitable condition for the production of crops. Tillage makes the soil loose and friable. Weeds and stubbles of previous crops ploughed under by tillage are turned into organic matter. As a result, the physical, chemical and biological change of soil takes place which is necessary for the maintenance of soil fertility. Crop rotation improves soil fertility If we cultivate the particular...

Cost effective agricultural practices  कम खर्च में- अधिक लाभ कैसे कमा यें? आज भारत ने अनाज उत्पादन के क्षेत्र में अधिक उपज देने वाली किस्मों की मदद से, आत्म निर्भरता हासिल कर ली है। लेकिन कुछ प्रमुख समस्याएं भी पैदा हुई हैं। उदाहरण के लिये धान और गेहूं की फसलों की निरंतर बुवाई करने से कई खरपतवार पनपने का अवसर मिलता है। जल्दी-2 सिंचाई करने से मिट्टी में रोग और सूक्ष्म जीव बढ़ने का अवसर मिलता है। जिसके द्वारा मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है।  इन सब कारणों की वजह से किसान सामर्थ्यहीन होते हुए भी, खरपतवार नियंत्रण के लिए खरपतवार-नाशी, पानी के लिए-बिजली या डीजल, कीड़े, मकोड़े के लिए-कीटनाशक, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए-रासायनिक उर्वरक, पर अधिक खर्च करना पड़ता है। जो अधिक महंगा साबित होता है। यदि किसान बुद्धि का थोड़ा सा भी उपयोग करें तो “कम लागत में अधिक उत्पादन” मुहावरा सही साबित कर सकता है।  खरपतवार की समस्या - बिना खर्च छुटकारा कैसे पायें? निरंतर चावल और गेहूं की बुवाई करने से इन फसलों में खरपतवार के कारण पर्याप्त नुकसान वहन करना पड़ता है। या उन्हें नियंत्रित करने के लिए खरपतवार- नाशी का छिड़काव करना पड़ता है। जिससे उत्पादन लागत में वृद्धि के साथ-2 किसान स्वास्थ्य के खतरों का जोखिम भी उठाता है। अगर इन दोनों फसलों के बीच में...

हरी खाद धान के कि‍सानों के लि‍ए वरदान है  Every farmer knows how much work goes into the production of a basket of compost and carrying it to the fields. But it never seems that the farm production gives an equal return for the hard work that goes into making and carrying the compost. Green manures are a method of replacing that basket of compost with a handful of seed. In this method, the plants that grow from the handful of seed are ploughed back into the soil. After a while in the soil, the plants rot down to become compost. Plants used in this way are called Green Manures. It's a very good way of increasing the fertility of the soil, and can give huge benefits for farmers. Green manure crops are primarily used in environmentally friendly agricultural practices to reduce the application of chemical fertilizer and herbicide. HOW TO GROW GREEN MANURE CROPS There are basically two ways in which green manures can be used:-1. When land is unused, or fallow between crops;2. While crops are still growing in the fields. 1. Using green manures as fallow When crop land is empty after crops have been harvested, green manure seeds can be sown as thickly as sowing wheat. When the green manure plants are...