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Crop Cultivation
अनिल कुमार सक्सेना1 और सुनीता सिंह2
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आलू फसल में पोषक तत्वों की उपयोगिता एवं महत्व
एक ही खेत में सघन फसल चक्र अपनाने एवं उर्वरकों की संतुलित एवं समुचित मात्रा में प्रयोग न करने तथा केवल नाइट्रोजन फास्फोरस एवं पोटाश युक्त उर्वरकों का इस्तेमाल करने से मिट्टी से प्राप्त होने वाले पोषक तत्वों की कमी प्रायः देखने में आती है। लगातार अच्छी उपज लेने के लिए आवश्यक है कि फसल को सभी पोषक तत्व समुचित मात्रा में मिलते रहें।
सामान्यताः सभी पोषक तत्वों की कमी से पौधों में कुछ न कुछ कमी के लक्षण प्रकट हो जाते हैं तथा इन तत्वों की कमी से प्रायः पौधों की बढ़वार घट जाती है और रंग बदल जाता है यदि हम आलू के संदर्भ में विचार करें तो किसान अपने आलू के पौधों में पोषक तत्वों की कमी के लक्षणों को देखकर उन कमियों का पता लगा सकते हैं तथा कमियों को दूर करके अपनी फसल स्वस्थ बना सकते हैं।
आलू के पौधों में विभिन्न पोषक तत्वों के अभाव से जो प्रभाव पड़ते हैं तथा जो लक्षण उत्पन्न होते हैं वह निम्नलिखित प्रकार से वर्णित किए जा सकते हैं।
पोषक तत्वों की कमी से उत्पन्न लक्षणः
संपूर्ण पौधों पर पड़ने वाले प्रभाव या पुरानी तथा निचली पत्तियों तक सीमित प्रभावअ. सामान्यतः भूमि में नाइट्रोजन और फास्फोरस की कमी होने पर पौधा पीला पड़कर सूखता...