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 इशबगोल के औषधीय गुण तथा उसका उत्पादन  इशबगोल एक प्रकार का औषधीय पौधा होता है,यह अधिकतर मरुस्थलीय क्षेत्रों में पाया जाता है| यह भारत में मालवा एवं सिंध, अरब की खाड़ी और पर्शिया में पाया जाता है| इशबगोल को आयुर्वेद में अश्व्गोल या अश्वकर्ण  के रूप में जाना जता है, जिसका शाब्दिक अर्थ “घोड़े की तरह कान है| इशबगोल का वैज्ञानिक नाम प्लैन्तेगो ओवाटा  (Plantago ovata) तथा कुल प्लैंतिजिनेसी है| इशबगोल एक प्रकार की झाड़ी होती है जिसके पत्तें धान के पत्तों जैसे और डालियाँ पतली होती है| इसबगोल के बीज छोटे-छोटे नुकीले और बादामी रंग के होते हैं| प्रतेक बीज के ऊपर एक पतला सफ़ेद रंग का आवरण होता है जिसे औषधीय प्रयोग के लिए अलग कर लिया जाता है| इसी को इशबगोल की भूसी  कहा जाता है| इशबगोल कि खेती  औषधि पौधों में से  इशबगोल बहुत महताव्पूर्ण एवं लाभकारी पौधा है।  इशबगोल के लगभग आधे बाज़ार पर भारत का ही कब्ज़ा है इसके बीज का कई तरह की आयुर्वेदिक और एल्लोपैथिक दवाओ में इस्तेमाल होता है। इशबगोल की फसल लगभग 100 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है । भारत में लगभग 3 तरह की इशबगोल पैदा की जाती है जिसमे हरियाणा -2 किस्म की इशबगोल की फसल 90 से 100 दिनों में ही पक कर तैयार हो जाती है , इसके बाद इस...

Cultivation of Isabgol (Plantago ovata) through scientific techniques Plantago ovata Forsk. एक अत्यंत महत्वपूर्ण औषधीय फसल है।औषधीय फसलों के निर्यात में इसका प्रथम स्थान हैं। वर्तमान में हमारे देश से प्रतिवर्ष 120 करोड़ के मूल्य का ईसबगोल निर्यात हो रहा है। विश्व में इसके प्रमुख उत्पादक देश ईरान, ईराक, अरब अमीरात, भारत, फिलीपीन्स इत्यादि हैं। भारत में इसका उत्पादन प्रमुख रूप से गुजरात,राजस्थान,पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश एवं मध्यप्रदेश में करीब 50 हजार हेक्टयर में हो रहा हैं। म. प्र. में नीमच, रतलाम, मंदसौर, उज्जैन एवं शाजापुर जिले प्रमुख हैं। ईसबगोल का उपयोग ईसबगोल का औषधीय उपयोग अधिक होने के कारण विश्व बाजार में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। ईसबगोल के बीज पर पाए जाने वाला छिलका ही इसका औषधीय उत्पाद है जिसे ईसबगोल की भूसी के नाम से जाना जाता है। भूसी और बीज का अनुपात 25:75 रहता है। इसकी भूसी में पानी सोखने की क्षमता अधिक होती है। इसलिए इसका उपयोग पेट की सफाई, कब्जीयत, दस्त आव पेचिस, अल्सर, बवासीर जैसी शारीरिक बीमारियों के उपचार में आयुर्वेदिक दवा के रूप में किया जाता है। इसके अलावा आइसक्रीम रंग रोगन, प्रिंटिंग आदि उद्योगों में भी इसका किया जाता है। इसकी मांग एवं उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए ईसबगोल की खेती वैज्ञानिक तकनीक से करना आवश्यक है। ईसबगोल के लिए जलवायु एवं भूमि ईसबगोल के लिए...