03 Oct Kharif Crops List in India: खरीफ फसलों के नाम और पूरी जानकारी
Kharif Crops List in India: धान, मक्का, बाजरा, ज्वार, सोयाबीन, मूंगफली, कपास, अरहर, मूंग, उड़द और अन्य खरीफ फसलों के नाम और जानकारी।...
Kharif Crops List in India: धान, मक्का, बाजरा, ज्वार, सोयाबीन, मूंगफली, कपास, अरहर, मूंग, उड़द और अन्य खरीफ फसलों के नाम और जानकारी।...
Soybean यानी सोयाबीन India की important oilseed crops में से एक है। इसकी खेती mainly Kharif season में की जाती है। Soybean seed से oil के साथ-साथ soybean meal और कई दूसरे products भी तैयार किए जाते हैं। अगर आप Soybean farming शुरू करना चाहते हैं, तो सिर्फ अच्छी variety चुनना ही काफी नहीं है। सही समय पर sowing, proper plant population, weed management, balanced fertilizer, pest और disease monitoring तथा सही समय पर harvesting—इन सभी बातों का ध्यान रखना जरूरी है। Quick Overview: Soybean की खेती में crop duration, seed requirement, yield और cultivation cost अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकते हैं। Soil, rainfall, variety, sowing time और farming practices का सीधा असर production पर पड़ता है। Soybean Cultivation: Basic Information Particular Information Crop Soybean Botanical Name Glycine max Crop Season Mainly Kharif Crop Type Oilseed and protein-rich crop Suitable Soil Well-drained soil with suitable moisture-holding capacity Major Growing States Madhya Pradesh, Maharashtra, Rajasthan, Karnataka और अन्य suitable regions Main Products Soybean seed, soybean oil और soybean meal Soybean की खेती के लिए Climate कैसा होना चाहिए? Soybean को warm climate और पर्याप्त moisture की जरूरत होती है। India में इसकी खेती mainly monsoon यानी Kharif season में होती है। Rainfed farming में monsoon का समय और rainfall distribution crop establishment और growth के लिए बहुत important होता है। बहुत ज्यादा पानी भी Soybean crop के लिए अच्छा नहीं होता। अगर...
Management of Whitegrub in Kharif Crops सफ़ेद लट (whitegrub) खरीफ की फसलों जैसे मूंगफली, मूंग, मोठ, बाजरा, सब्जियों इत्यादि पौधों की जड़ो को काटकर हानि पहुँचती है। ये मूंगफली जैसी मुसला जड़ो वाली फसलों में, बाजरा जैसे झकड़ा जड़ वाली फसलों की अपेक्षा अधिक नुकसान करती है । राजस्थान के हल्के बालू मिटटी वाले क्षेत्रो में होलोट्राइकिया नामक भृंगो की सफ़ेद लटें अत्यधिक हानि करती है । सफ़ेद लट का जीवन चक्र : राजस्थान के हल्के बालू मिटटी वाले क्षेत्रो में होलोट्राइकिया नामक भृंगो की सफ़ेद लटें एक वर्ष में केवल एक ही पीढ़ी पूरी करती है । मानसून अथवा मानसून पूर्व की पहली अच्छी वर्षा के पश्चात इस किट के भृंग सांयकाल गोधूलि वेला के समय प्रतिदिन भूमि से बाहर निकलते है| सूर्य के तीव्र प्रकाश में यह भृंग भूमि से बाहर नहीं निकलते| मादा भृंग समागम के 3-4 दिन पश्चात गीली मिटटी में लगभग 10 सेमि गहराई पर अंडे देना शुरू कर देती है परन्तु यह सारे अंडे एक साथ न देकर थोड़े थोड़े अंडे 4-5 सप्ताह तक देती रहती है अंडो में से 7-13 दिन पश्चात छोटी लटें निकलनी प्रारम्भ हो जाती है जो निम्न प्रकार से है- प्रथम अवस्था की लट 15 मिलीमीटर लम्बी होती है । यह अवस्था 2 सप्ताह तक रहती है द्वितीय अवस्था की लट 35 मिलीमीटर लम्बी होती है । यह अवस्था...