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Effects of Parthenium weed on  crops and human life पारथेनियम (गाजर घास) पर लगातार किए जा रहे शोध कार्यो से हाल ही में एक नतीजा सामने आया कि पारथेनियम नामक खरपतवार केवल मानव अथवा पशुओं के स्वास्थ्य पर ही बुरा असर नहीं डाल रहा है बल्कि इसका सर्वाधिक प्रभाव दलहनी फसलों पर पड़ रहा है। हर मौसम और हर फसल के साथ उपजने में सक्षम गाजरघास ने दलहनी फसलों के उत्पादन की मात्रा पर असर डालना ही शुरु कर दिया है साथ ही खेतों में फसल चक्र के जरिए उर्वरता बढ़ाये जाने की प्रक्रिया भी लडख़ड़ाने लगी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह स्थिति बरकरार रही तो यह तय है कि फसल चक्र विधि तो बेअसर साबित होगी ही साथ ही दलहनी फसलों की दर भी घट जायेगी। कृषि वैज्ञानिक इसका मूल कारण गाजर घास का एलेलोपैथिक प्रभाव बता रहे हैं। जांच के दौरान पाया गया है कि जिस क्षेत्र में गाजरघास उगती है वहां एलेलोपैथिक प्रभाव के कारण दीगर पौधे उग ही नहीं पाते । लेकिन जब गाजरघास के पौधे दलहनी फसलों के बीच उग आते हैं तो दलहनी पौधों की जड़ों की गांठों में पाये जाने वाले बैक्टीरिया काम करना बंद कर देते हैं। नतीजन दलहनी पौधों की उत्पादन क्षमता स्वत: घट जाती है। इसके अलावा दलहनी पौधों की जड़ों में...

Effects and control of Parthenium grass  प्रकृति में अत्यंत महत्त्व पूर्ण वनस्पतियों के अलावा कुछ वनस्पतियाँ ऐसी भी हैं, जो कि धीरे-धीरे एक अभिशाप का रूप लेती जा रही हैं बरसात का मौसम शुरू होते ही गाजर के तरह की पत्तियों वाली एक वनस्पति काफी तेजी से बढ़ने और फैलने लगती है। जिसे पार्थेनियम हिस्टेरोफोरोस यानी कोंग्रस ग्रास या गाजर घास क नाम से जाना जाता है । यह  Asteraceae कुल का सदस्य है। यह वर्तमान में विश्व के सात सर्वाधिक हानिकारक पौधों में से एक है तथा इसे मानव एवं पालतू जानवरों के स्वास्थ्य के साथ-साथ सम्पूर्ण पर्यावरण के लिये अत्यधिक हानिकारक माना जा रहा है। गाजर घास अमेरिका, एशिया, अफ्रीका व ऑस्ट्रेलिया में पाई जाने वाली नॉक्सियस (NOXIOUS) खरपतवार है। भारत में गाजर घास यानी पार्थेनियम देश क विभिन्न भागों में अलग अलग नामों जैंसे सफ़ेद टोपी, चटक चांदनी, गंधी बूटी, कांग्रेस घास आदि नामों से जाना जाता है। हमारे देश में सबसे पहले १९५५ में देखी गई थी, अब ये लगभग ३.५ मिलियन हैक्टर क्षेत्रफल में फैल चुकी है। भारत में गाजर घास का आगमनः अर्जेन्टीना, ब्राजील, मैक्सिकों एवं अमरीका में बहुतायत से पाए जाने वाले इस पौधे का कृषि मंत्रालय और भारतीय वन संरक्षण संस्थान के सर्वेक्षण के अनुसार भारत में पहले कोई अस्तित्व नहीं था। ऐसा माना जाता है, कि इस...

Parthenium histrofors: A Destructive Weed अवांछित पौधे जो बिना बोये ही उग जाते हैं और लाभ की तुलना में ज्यादा हानिकारक होते हैं, खरपतवार कहलाते हैं | खरपतवार प्राचीन काल से ही मनुष्य के लिये समस्या बने हुये हैं, खेतों में उगने पर यह फसल की पैदावार व गुणवता पर विपरीत असर डालते हैं | मनुष्य के स्वास्थ्य पर भी यह बहुत बुरा असर डालते हैं और कई खरपतवारों की वजह से (जैसे गाजर घास) मनुष्य को कई घातक बिमारियों का सामना करना पड़ता हैं | गाजर घास बहुत ही खतरनाक खरपतवार हैं | इसका वैज्ञानिक नाम पारथेनियम हिस्ट्रोफोरस है, इसको कई अन्य नामों से भी जाना जाता हैं जैसे काग्रेंस घास, सफेद टोपी, छंतक चांदनी आदि | यह खरपतवार एस्टेरेसी (कम्पोजिटी) कुल का पौधा हैं | भारत में सर्वप्रथम यह घास 1955 में पूना (महाराष्ट्र) में देखी गई थी | माना जाता है कि हमारे देश में इसका प्रवेश 1955 में अमेरिका व कनाडा से आयातित गेहुँ के साथ हुआ | आज ये घातक खरपतवार पूरे भारत वर्ष में लाखों हैक्टेयर भूमि पर फैल चुका हैं | यह घास मुख्यत: खुले स्थानों, औध्योगिक क्षैत्रों, सड़कों के किनारे, नहरों के किनारे व जंगलों में बहुतायात में पाया जाता हैं | अब इसने अपने पाँव खेत खलियानों में भी पसारना शुरू कर दिया हैं | विश्व...

पार्थेिनि‍यम खरपतवार प्रबंधन के लिए एकीकृत दृष्टिकोण Parthenium became a menace due to wide ecological amplitude, profuse growth, fast multiplication, rapid spread, agricultural and health hazards. Several methods have been recommended to suppress its growth. But no method appears to have worked satisfactorily as each method suffers from one or more limitations such as inefficiency, prohibitive cost, impracticability, polluting the environment and only temporary relief etc. The integrated parthenium management approach recommended recently seems to be promising. To feed the ever-increasing population of our country, we are trying to enhance agricultural production. In this respect several promising technologies are coming in the way i.e. good quality seed , drip irrigation, SRI technique and others. In this background, parthenium infestation reduces yield 30 to 40 percent; means it is pulling back our efforts for agricultural acceleration. Already the weed has occupied over 5 million ha of land in the country. Therefore, the time has come to consider parthenium invasion as a forthcoming danger in agriculture, considering its negative impact on agriculture. Our unawareness about this weed for a long period has given it to its’ full potential spread. Parthenium is a genus of North American shrubs in the sunflower tribe within the daisy family.  It is a common invasive species in India, Australia and parts of Africa. Parthenium hysterophorus invades...