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Monthly agricultural  activities for vegetable availability throughout the year आधुनिक युग में बढ़ते हुए जनसंख्या के पोषण हेतु सब्जी की माँग दिन-प्रति बढ़ती जा रही है अत: किसान भाई प्रति माह में कि जाने वाली कृषि कार्य को अपनाकर अपनी आय कई गुना तक बढ़ा सकते हैं वैसे तो बहुत सी सब्जी फसलों की बुवाई के समय को किसान भाई बाजार की माँग एवं भूमि की उपलब्धता के अनुसार परिवर्तित कर लाभ कमाते है प्रस्तुत कार्यक्रम व्यवसायिक खेती के साथ-साथ गृह उद्यान के लिए भी काफी लाभप्रद है ! प्रति माह में किये जाने वाले कृषि कार्य:- माह सब्जियाँ कृषि कार्य फरवरी आलू खुदाई कद्दू वर्गीय सब्जियाँ बीज की बुवाई भिण्डी, लोबिया, ग्वार एवं अरवी बीज की बुवाई मटर तैयार फलियों की तुड़ाई टमाटर, बैंगन एवं मिर्च पौध रोपण एवं सिंचाई मूली, गाजर खुदाई गोभी वर्गीय सब्जियाँ सिंचाई, कटाई, कीट एवं रोग नियंत्रण प्याज एवं लहसुन सिंचाई, निराई-गुड़ाई, नत्रजन का छिटकाव, रोग एवं कीट नियंत्रण पालक कटाई एवं सिंचाई मार्च प्याज, लहसुन सिंचाई एवं निराई पत्ता गोभी फसल की कटाई मूली, गाजर, चुकन्दर बीज की बुवाई,फसल का रख-रखाव एवं खुदाई पालक हरी पत्तियों की कटाई टमाटर, बैंगन एवं मिर्च सिंचाई, निराई-गुड़ाई, नत्रजन का छिटकाव एवं पौधशाला में पौध तैयार करना भिण्डी, लोबिया, ग्वार, अरवी सिंचाई, निराई-गुड़ाई एवं नत्रजन का छिटकाव कद्दू वर्गीय सब्जियाँ सिंचाई, निराई-गुड़ाई, रोग एवं कीट नियंत्रण व बुवाई अप्रैल प्याज एवं लहसुन सिंचाई, रोग एवं कीट नियंत्रण हेतु रसायनों का प्रयोग एवं खुदाई मूली सिंचाई एवं नत्रजन की खड़ी फसल में छिटकाव टमाटर, बैंगन और मिर्च सिंचाई, निराई-गुड़ाई, कीट नियंत्रण तथा फलों की...

Essential elements of the vegetable production वर्तमान में हमारे देश में लगभग 92 लाख क्षेत्र में सब्जियों की खेती की जाती है, जिसका सफल उत्पादन 16.2 करोड़ टन है। इस प्रकार भारत, चीन के बाद विश्व का सर्वाधिक सब्जी उत्पादक देश हैं। सब्जी उत्पादन से अधिकाधिक लाभ प्राप्त करने हेतु कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं का ध्यान रखना अति आवश्यक है। जैसे कि‍– सब्जियों को उनके उपयोग तथा बाज़ार से दुरी के अनुसार कम पकी अवस्था या पूर्ण पकने पर तोडना चाहिए। सब्जी यदि जल्दी खराब होने वाली है तो उसको कुछ कम पकी अवस्था में ही तोडना चाहिए। नजदीक के बाज़ार में सब्जियों को बेचना हो तो उन्हें शाम के समय ही तोड़े। कददू जाति की सब्जियों को खेत के अन्दर नालियां बनाकर लगाना चाहियें। एसा करने से सिंचाई, निराई-गुड़ाई में आसानी होती है, खाद तथा पानी कम देना पड़ता है और फल सुखी भूमि पर रहने से कम सड़ता है। टमाटर की पौध को मेढ़ो पर लगाने से फल सड़ते है। फलों को फटने से रोकने के लिए जल्दी-जल्दी सिंचाई करनी चाहिए। फसल में नाइट्रोजन अधिक नही देना चाहिए। गाजर, मुली, शलजम व चुकंदर को चिकनी मिटटी में लगाने से जड़ें फटने लगती है। इन फसलों में दो-तीन बार मिट्टी चढ़ाना आवश्यक है। फूलगोभी और बंदगोभी की फसल में मिट्टी चढ़ाना आवश्यक होता है जिससे पौधे...