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Prime Minister Crop Insurance Scheme - Brief Description प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना भारत सरकार ने किसानों की हो रही फसल की बर्बादी की पूर्ति के लिए और फसल बर्बादी की वजह से किसानों के द्वारा हो रही आत्महत्या को रोकने के लिए लागू किया गया। सन 1965 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने देश को ‘‘जय जवान जय किसान‘‘ नारा दिया था  परन्‍तू इतना समय बीत जाने के बावजूद आज भी कि‍सानो की हालत बहुत अच्‍छी नही है। इसका एक प्रमुख कारण खेती मे मौसम संबधि‍त जोखि‍म तथा खेती का अनिश्चितताओं से भरा होना है। कभी सूखा , कभी बाढ तो कभी बीमारी या टि‍ड्डी प्रकोप जैसी...

Lac production in India - brief introduction भारत में फसलों की खेती के साथ-साथ कीटों का पालन भी बडे पैमाने पर कि‍या जाता है। कीटों की खेती में मुख्यतः मधुमक्खी पालन, रेशम कीट पालन और लाख कीटों की खेती प्रमुख  है। लाख कीट का पालन थोड़ा तकनीकी ज्ञान के साथ सीमित समय में आसानी से कि‍या जा सकता है। लाख शब्द संस्कृत के शब्द ‘‘ लाक्षा ’से व्युतपन हुआ  है जिसका अर्थ है  सौ हज़ार और इसके उत्पादन में बड़ी संख्या में कीड़े शामिल होते हैं। वैदिक कल से लाख कीट और उसके मेजबान पौधे का वर्णन- बटिया मोनोस्पर्म (लाक्षारु) अथर्ववेद में दर्ज है। महाभारत में यह भी उल्लेख किया गया है कि कौरवों ने लाक्षागृह...

Precision Agriculture, Present Status & Scope: A Review भारत में 328.7 मिलियन हेक्टेयर भौगोलिक क्षेत्र है, जिसमें से 182 मिलियन हेक्टेयर भूमि, भूमि क्षरण से प्रभावित होती है, 141.33 मिलियन हेक्टेयर भूमि जल के क्षरण के साथ-साथ हवा के कटाव, जल-जमाव और रासायनिक क्षरण अर्थात लवण और क्षरण के कारण प्रभावित होती है। प्रौद्योगिकी में क्रांति ने भारतीय परिवेश को बदल दिया है और साथ ही साथ खेती के लिए नई उम्मीदें पैदा की हैं। इसलिए, स्थिरता और आर्थिक दृष्टिकोण से, इन विकासशील नई तकनीकों पर काबू पाने और कृषि क्षेत्र में संसाधनों के समुचित उपयोग के साथ कुशलतापूर्वक लागू किया जाना आवश्यक है। सटीक कृषि एक ऐसी नई और अत्यधिक आशाजनक तकनीक...

Zero Budget Natural Farming जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग मूल रूप से महाराष्ट्र के एक किसान सुभाष पालेकर द्वारा विकसित रसायन मुक्त कृषि का एक रूप है।सुभाष पालेकर के नाम पर इसे सुभाष पालेकर नेचुरल फार्मिंग यानी जीरो बजट प्राकृतिक खेती कहा जाता है. यह विधि कृषि की पारंपरिक भारतीय प्रथाओं पर आधारित है। इस खेती के पैरोकारों का कहना है कि यह खेती देसी गाय के गोबर और मूत्र पर आधारित है. इस विधि में कृषि लागत जैसे कि उर्वरक, कीटनाशक और गहन सिंचाई की कोई आवश्यकता नहीं होती है। जिससे कृषि लागत में आश्चर्यजनक रूप से गिरावट आती है, इसलिये इसे ज़ीरो बजट नेचुरल फार्मिंग का नाम दिया गया है।इस विधि...

Wheat's contribution in prevention of malnutrition विश्व में गेहूँ सबसे व्यापक रूप से खेती की जाने वाली खाद्यान्न फसल है। यह दुनिया की 40 प्रतिशत आबादी के लिए कुल आहार कैलोरी एवं प्रोटीन का 20 प्रतिशत योगदान देने वाला एक मुख्य भोजन है। भारत में उत्पादित कुल खाद्यान्न में 36.7 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ खाद्य टोकरी की खपत में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा गेहूँ को बड़े पैमाने पर खरीदा जाता है, जिसे खाने के लिए अधिकांश आबादी को वितरित किया जाता है। अनाजों से मिलने वाली ऊर्जा में गेहूँ सबसे सस्ते स्रोतों में से एक है, इसकी खपत से प्रोटीन (20...

रासायनिक उर्वरको के उपयोग से उत्पन्न ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन का अल्पीकरण भारत में बढ़ती आबादी के लिए उर्वरक का बढ़ता उपयोग दोगुना कृषि उत्पादन के लिए अपरिहार्य हो गया है। हालांकिए कृषि में उर्वरक की बढ़ती खपत भी पर्यावरण प्रदूषण के लिए चिंता का कारण है। पर्यावरण पर उर्वरक उपयोग के विभिन्न प्रभाव ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन, भूजल में नाइट्रेट प्रदूषणए कृषि भूमि में भारी धातु का निर्माण और यूट्रोफिकेशन हैं। विभिन्न पर्यावरणीय प्रभावों के बीच, उर्वरक उपयोग से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन वैश्विक और भारतीय जलवायु परिवर्तन को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण ड्राइवरों में से एक है। वायुमण्डलीय ग्रीनहाउस गैसों की बढ़ती हुई सघनता के कारण जलवायु परिवर्तन होना निष्चित है।...

Increase dietary quality with nutritious Samai or barnyard millet वर्तमान समय में जहाँ एक तरफ कोविड-19 महामारी अपने पैर पसारती जा रही है वहीं दूसरी तरफ लोग जीवन शैली संबंधी बीमारीयों जैसे - मधुमेह, मोटापा, हृद्यघात, ब्लडप्रेशर आदि से जूझ रहे हैं. अत: इनसे बचने हेतु उत्तम गुणवत्ता युक्त आहार का सेवन बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है. आहार की गुणवत्ता विभिन्न प्रकार के पोष्टिक खाद्य पदार्थो का समावेश द्वारा बढ़ाई जा सकती है. सांवा या सामा या सांवक के चावल (sanwa rice) जिसे अंग्रेजी में बार्नयार्ड मिलेट (barnyard millet) नाम से जाना जाता है, पोष्टिकता से भरपूर एक छोटा मिलेट (उपेक्षित अनाज) है. इसमें पर्याप्त प्रोटीन, उच्च फाइबर, बी-विटामिन एवं उपयोगी मिनरल्स पाए है....

कृषि में इलेक्ट्रोसपिनिंग नैनोफिब्रिज के अनुप्रयोग  Nanofibres are able to form a highly porous mesh and their large surface-to-volume ratio improves performance for many applications. Electrospinning has the unique ability to produce nanofibres of different materials in various fibrous assemblies. Electrospinning was first patented in the US in 1902. However, the process was largely forgotten until the 1990s. With interest in the field of nanoscience and nanotechnology, researchers began new investigations of nanofiber production using electrospinning (Seeram et al. 2006). The number of patents and applications for processes and applications based on electrospinning has also grown in recent years. Types of Electrospinning Although fibers produced by different electrospinning methods have attracted increasing attention in...