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Importance of seed priming in farming  बीजोंपचार प्रक्रियाओं के कारण, बीज का अंकुरण स्वस्थ, प्रचुर और समान होता है। इन बीज प्रक्रियाओं में विभिन्न कारकों का उपयोग किया जाता है, जैसे कि जैविक या रासायनिक कवकनाशी, जीवाणु उर्वरक और कुछ उर्वरक जैसे गिबरेलिन एसिड, मालिब्लेडियम, आदि। सीड प्राइमिंग के कारण अंकुरण कम और अच्छी तरह से होता है। बीज प्राइमिंग क्या है? बीज प्राइमिंग, बीजोपचार की एक सस्ती और बहुत आसान प्रक्रिया है। प्राइमिंग बीजों का पूर्व उपचार है जिसमे बीज को एक निश्चित समय के लिए पानी में भिगोया जाता है, छाया में सुखाया जाता है और फिर बोया जाता है। बीज प्राइमिंग बीजों के नियंत्रित जलयोजन की एक स्तर की प्रक्रिया है...

Crop diversification: a new dimension to increase farmers' income पिछले पांच दशकों में कृषि उत्पादन में वृद्धि और खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना कृषि विकास के लिए मुख्य विषय था। भारत की अधिकतर आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है जहाँ कृषि मुख्य व्यवसाय है। भारत में लगभग 93 प्रतिशत किसानों की जोत का आकर 4 हेक्टर से भी कम है एवं इसकी 55  प्रतिशत भूमि ही कृषि योग्य है। भारत सरकार द्वारा 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का निर्धारित लक्ष्य किसान कल्याण को बढ़ावा देने, कृषि संकट को कम करने और किसानों की आय और गैर-कृषि व्यवसाय के श्रमिको के बीच समानता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कृषि विकास...

राजस्थान मे सतत आय व रोजगार के लिये एकिक्रत कृषि प्रणाली Present context of changing climate, crop production is the most vulnerable enterprise in agriculture to natural disasters. Integration of various agricultural enterprises viz.. crop production, animal husbandry Fishery, forestry etc. have great potentials in the agricultural economy. These enterprises not only supplement the income of the farmers but also help in increasing the family labor employment. A major section of farming community in the country is in the category of small and marginal farmers with limited resources. These resource poor farmers are most affected by the changing climatic conditions like delayed, low and erratic rainfall. India is a hot spot of variability in...

औषधि के रूप में प्याज का प्राकृतिक और अद्भुत उपयोग प्याज एक महत्वपूर्ण फसल है जिसका उपयोग मसालों और सब्जियों के रूप में दुनिया भर में लगभग हर रसोई में किया जाता है। प्राचीन काल से ही मानव जाति में प्याज को प्राकृतिक खाद्य पदार्थों के उच्च श्रेणी में वर्णित किया गया है। प्याज की उत्कृष्ट विशेषता इसका  तीखापन है, जो कि एक वाष्पशील तेल के कारण है, जिसे एलिल-प्रोपाइल  डायसल्फ़ाइड के रूप में जाना जाता है। प्याज विभिन्न ऑर्गन-सल्फर यौगिकों में समृद्ध हैं, जैसे एस-मिथाइल सिस्टीन सल्फ़ोक्साइड, ट्रांस-एस- (1-प्रोपेनिल) सिस्टीन सल्फ़ोक्साइड, एस-प्रोपाइल सिस्टीन सल्फ़ोक्साइड और डीप्रोपाइल डिसल्फ़ाइड, जो इसके विशिष्ट स्वाद, गंध, तीखेपन और औषधीय गुणों के लिए जिम्मेदार हैं। कार्बनिक सल्फर...

पुराने अप्रयुक्‍त कीटनाशकों का प्रबंधन Pesticides are developed to control pests including weeds and are being extensively used in India. Pesticide includes any substance, or mixture of substances of chemical or biological ingredients intended for repelling, destroying or controlling any pest, or regulating plant growth. According to statistical database of Directorate of Plant Protection, Quarantine & Storage, India, in 2017-18, 62247 “000’ hectare area under cultivation is under pesticide usage. It indicated that 71.54 % of area under cultivation in India is under pesticide usage.   Environment protection act 1986 and Hazardous wastes Management rules, 2016 recognizes date expired and off specification pesticides as hazardous wastes under schedule 1. At various stages from...

Contribution of information technology in increasing agricultural income हमारे देश में कृषि का अर्थव्यवस्था में बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। आज भी गाँवों की खुशहाली कृषि पर निर्भर करती है। इसी वजह से सरकार भी कृषि में सुधार के लिए नई-नई तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा दे रही है जिससे कृषि उत्पादन बढ़ाकर किसानों को और अधि‍क खुशहाल बनाया जा सके। इस दिशा में सरकार किसानों को उन्नत खेती की जानकारी देने , उपकरण व सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। टेलीफोन, कम्प्यूटर रेडियो, दूरदर्शन तथा इंटर्नेट आदि की मदद से किसानों तक आवश्यक जानकारी जल्दी पहुँचाने का प्रयत्न कर रही है। गाँवों को विकसित करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी के...

Use of plastic culture in agriculture जीवन के हर क्षेत्र में प्लास्टिक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। हमारी कृषि भी प्लास्टिक से अछूती नहीं रह पाई है। वर्तमान मे कृषि मे अच्छी पैदावार लेने के लिए प्लास्टिक सामग्रियो का उपयोग तेजी से बड रहा है और दुनिया भर में खाद्य उत्पादन के लिए उपयोग किया जा रहा है। कृषि मे प्लास्टिक सामग्रियों का परिचय 1940 के दशक में प्रशिक्षक ई.एम.एम. एम्र्ट द्वारा विकसित किया गया था जो एक बागवानी के वैज्ञानिक है जिनको प्लास्टिक ग्रीनहाउस के पिता माना जाता है। एम्र्ट ने कृषि मे प्लास्टिक कल्चर द्वारा होने वाले लाभ के बारे में बताया। कृषि मे पहली बार प्लास्टिक का...

Maintenance of Potted Plants for Interiorscaping शहरों मे रहने वाले लोग 60 प्रतिशत समय भवनों के अंदर बिताते  हैं, जिसके फलस्वरूप आंतरिक वायु व ध्वनि प्रदूषण को बढ़ावा मिल रहा है। रोज़मर्रा मे उपयोग होने वाली गृह उपयोगी वस्तुए जैसे फर्नीचर, मोबाइल, टेलीविज़न, कंप्यूटर,  सौन्दर्य प्रसाधन इत्यादि वातावरण मे अत्यंत वाष्पशील पदार्थ छोड़ते रहते है जो कि वायु प्रदूषण को बढ़ावा देते हैं । इस प्रदूषण के कारण बहुत से रोग जैसे, दमा, हृदय रोग, रक्तचाप, मानसिक रोग एवं कैंसर जैसे भयानक रोगों को बढ़ावा मिलता है। अत: आंतरिक वायु प्रदूषण एक चुनौती तथा पर्यावरण सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। शहरों में वानस्पतिक आवरण कि कमी होती जा रही है इसलिए...