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मूंगफली की खेती Tag

परिचयः- मूंगफली तिलहनी फसलों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। मूंगफली का उपयोग कई प्रकार से किया जाता है जैसे तेल, बीज, घरेलू उपयोग एवं निर्यात। यह खाद्य तेल का बहुत ही अच्छा स्रोत हैं। दानों में 48-55 प्रतिशत तेल, 27 प्रतिशत प्रोटीन व 10-21 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट पायी जाती है। इसके तेल का उपयोग सौन्दर्य प्रसाधनों, साबुन क्रीम आदि में किया जाता है। राजस्थान में मूंगफली की खेती मुख्यतः बीकानेर, जोधपुर, नागौर, जयुपर, सीकर, दौसा, चित्तौड़गढ़, सवाई माधोपुर, टोंक, झुंझुनू आदि जिलों में की जाती हैं। जलवायुः- मूंगफली उष्णकटिबंधीय जलवायु का पौधा होने के कारण इसे लम्बे एवं गर्म मौसम की आवश्यकता होती है। उत्तरी भारत व राजस्थान में मूंगफली की खेती खरीफ ऋतु में की जाती है। मूंगफली को 50-100 सेमी. वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में उगाया जा सकता है। इसकी वृद्धि के समय 27-30° सेल्सियस तथा प्रजनन के लिए 24-27° सेल्सियस तापमान उपयुक्त होता है। राजस्थान में कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचित फसल के रूप उगाई जाती है। फूल आने के बाद पौधों को पर्याप्त नमी व प्रकाश मिलते रहना चाहिए। मृदाः- मूंगफली फसल के लिए अच्छे जल निकास युक्त बलुई, बलुई दोमट मृदा सर्वोत्तम मानी जाती है। मृदा का पी.एच. मान 6 से 8.5 के बीच होना चाहिए। खेत की तैयारीः- मूंगफली जमीन के अन्दर लगती है। इसलिए बोने से पहले 2-3 बार...

Modern farming of Groundnut भारत में दलहन, तिलहन, खाध्य व नकदी सभी प्रकार की फसलें उगायी जाती हैं | तिलहनी फसलों की खेती में सरसों, तिल, सोयाबीन व मूँगफली आदि प्रमुख हैं | मूँगफली गुजरात के साथ साथ राजस्थान की भी प्रमुख तिलहनी फसल हैं | राजस्थान में बीकानेर जिले के लूणकरनसर में अच्छी किस्म की मूँगफली का अच्छा उत्पादन होने के कारण इसे राजस्थान का राजकोट कहा जाता हैं।  मूंगफली एक ऐसी फसल है जिसका कुल लेग्युमिनेसी होते हुये भी यह तिलहनी के रूप मे अपनी विशेष पहचान रखती है। मूँगफली के दाने मे 48-50 % वसा और 22-28 % प्रोटीन तथा 26% तेल पाया जाता हैं | मूँगफली की खेती 100 सेमी वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में आसानी से की जा सकती है।  मूंगफली की खेती करने से भूमि की उर्वरता भी बढ़ती है। यदि किसान भाई मूंगफली की आधुनिक खेती करता है तो उससे किसान की भूमि सुधार के साथ किसान कि आर्थिक स्थिति भी सुधर जाती है। मूंगफली का प्रयोग  तेल के रूप मे, कापडा उधोग एवम बटर बनाने मे किया जाता है जिससे किसान भाई अपनी आर्थिक स्थिति मे भी सुधार कर सकते है।  मूंगफली की आधुनिक खेती के लिए निम्न बातें ध्यान में रखना बहुत ही जरूरी हैं |   मूंगफली की बीज दर, बुवाई का समय, एवम बुवाई हेतू दूरियां:- किसान भाई को...

Modern techniques of Groundnut cultivation मूँगफली (peanut) एक ऐसी फसल (crop) है जिसका कुल लेग्युमिनेसी होते हुये भी यह तिलहनी के रूप मे अपनी विशेष पहचान बनाये हुये है। इसमे गुणशुत्रो की संख्या 2n=4x=40 होती  है। मूँग फली के दाने मे 48-50 % वसा और 22-28 % प्रोटीन पायी जाती है मूँगफली की खेती 100 सेमी वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में आसानी से की जा सकती है। उत्तर प्रदेश मे मूंग्फली की खेती मुख्य रूप से झांसि, हरदोई, सीतापुर, उन्नव आदि जिलो मे होती है। मूंगफली की खेती (cultivation) करने से भूमि की उर्वरता  भी बढ़ती है। यदि किसान भाई मूंगफली की आधुनिक खेती करता है तो उस से किसान की भूमि सुधार के साथ किसान कि आर्थिक स्थिति भी सुधार जाती है। मूंगफली का प्रयोग  तेल के रूप मे कापडा उधोग एवम बटर बनाने मे किया जाता है जिससे किसान भाई अपनी आर्थिक स्थिति मे भी सुधार कर सकते है।   मूंगफली की आधुनिक खेती के बारे मे अधिक जानकारी इस प्रकार है- मूँगफली के लि‍ए बीज दर, बुवाई क समय, एवम बुवाई हेतू दूरियां किसान भाई को मूंगफली की बुवाई हेतू बीज की मात्रा 70-80 किग्रा.।हेo रखते है। यदि किसान भाई मूंगफली की बुवाई कुछ देरी से करना चाहाता है तो बीज की मात्रा को आवश्यकता अनुसार बढ़ा लेना चाहिये मूंगफली की बुवाई का समय जून...