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खेत में fertilizer का सही और संतुलित उपयोग crop growth के लिए महत्वपूर्ण है। खेती में अच्छी फसल के लिए केवल अच्छी quality का seed ही पर्याप्त नहीं होता। पौधों को सही मात्रा में nutrients मिलना भी उतना ही जरूरी है। इसी कारण किसानों के बीच Urea, DAP और NPK fertilizer का इस्तेमाल काफी common है। लेकिन अक्सर किसानों के मन में यह सवाल रहता है कि Urea, DAP और NPK में क्या अंतर है? कौन-सी खाद में कौन-सा nutrient होता है और किस परिस्थिति में कौन-सा fertilizer उपयोगी हो सकता है? इस article में हम आसान भाषा में समझेंगे कि Urea, DAP और NPK fertilizer क्या हैं, इनमें कौन-कौन से nutrients होते हैं, इनके बीच क्या difference है और fertilizer का इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। Quick Answer: Urea मुख्य रूप से Nitrogen देता है, DAP में Nitrogen और Phosphorus होता है, जबकि NPK fertilizers में Nitrogen, Phosphorus और Potassium अलग-अलग ratios में उपलब्ध होते हैं। सही fertilizer का चुनाव crop और soil requirement के आधार पर करना चाहिए। Urea, DAP और NPK क्या हैं? पौधों को अच्छी growth के लिए कई essential nutrients की जरूरत होती है। इनमें तीन major nutrients हैं: Nitrogen (N) Phosphorus (P) Potassium (K) इन तीन nutrients को commonly NPK nutrients कहा जाता है। इनके अलावा plants को Sulphur, Zinc, Iron, Boron, Magnesium और अन्य micronutrients की...

Role of agricultural research and development in Indian economy भारत प्राचीनकाल से ही एक कृषि -प्रधान देश रहा है। वर्तमान में भी भारतीय अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा कृषि से प्राप्त होता है। देश के कुल जीडीपी का लगभग १४ % भाग कृषि से मिलता है जबकि भारत की कुल जनसँख्या का लगभग ५८% कृषि कार्यों में संलग्न है। अर्थात यहाँ पर यह कहना अनुचित नहीं होगा की संभवतया भारतीय अर्थव्यवस्था की मंद गति का एक बड़ा कारण कृषि क्षेत्र में व्याप्त यह असंतुलन भी है। जनसँख्या में हो रही निरंतर वृद्धि और साथ ही कृषि योग्य भूमि के क्षेत्रफल में लगातार कमी की स्थिति चिंता का विषय है। ऐसे में प्रति व्यक्ति खाद्य आपूर्ति के लिए कृषि विकास एवं उत्पादन की और ध्यान देना अत्यन्त आवश्यक है। भारतीय कृषि के आधुनिकीकरण के शुरुआती इतिहास में मांटेग्यू- चेम्सफोर्ड सुधार (१९१९) का विशेष महत्त्व है जिसने भारतीय कृषि प्रणाली में अनुसन्धान एवं शिक्षा की नींव राखी। आज़ादी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए कृषि को केंद्र बिंदु मन गया और कृषि क्षेत्र में अनुसन्धान एवं विकास के महत्त्व को अनुभव किया गया। भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् के अन्तर्गत संपूर्ण देश में अनेकों अनुसन्धान केन्द्रों की स्थापना की गयी एवं उच्च शिक्षा के अन्तर्गत विभिन्न पाठ्यक्रमों में अनुसन्धान को भी सम्मिलित किया गया। १९६६-६७...