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Top 15 Superfoods for a Healthy Diet: Nutritious Foods You Can Eat Every Day अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए हमेशा महंगे या विदेशी खाद्य पदार्थों की जरूरत नहीं होती। हमारे आसपास और भारतीय रसोई में मिलने वाले कई खाद्य पदार्थ पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। आंवला, सहजन, मोटे अनाज, दालें, मेवे, बीज, हरी सब्जियां और मौसमी फल इसका अच्छा उदाहरण हैं। You do not always need expensive or imported foods to maintain a healthy diet. Many foods that are easily available in Indian kitchens are naturally rich in nutrients. Amla, moringa, millets, pulses, nuts, seeds, green vegetables and seasonal fruits are some good examples. सुपरफूड (Superfood) शब्द आमतौर पर ऐसे खाद्य पदार्थों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिनमें एक या अधिक महत्वपूर्ण पोषक तत्व अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। हालांकि, किसी एक खाद्य पदार्थ को संपूर्ण आहार का विकल्प नहीं माना जा सकता। अलग-अलग प्रकार के पौष्टिक खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करना अधिक महत्वपूर्ण है। The term superfood is commonly used for foods that are particularly rich in one or more nutrients or naturally occurring plant compounds. However, no single food can provide everything the body needs. Eating a varied and balanced diet is more important. 15 प्रमुख सुपरफूड्स की सूची 15 Superfoods You Can Add to Your Diet आंवला...

Current status and list of some important medicinal plants in Himachal Pradesh The importance of medicinal plants in traditional health care practices as well as in providing clues to new areas of research and biodiversity conservation is now widely acknowledged. Himachal Pradesh has a rich variety of medicinal plants, which are widely used. However, information on medicinal applications of plants in many Himalayan interior locations is limited. Keeping this in mind, the present study has been undertaken to explore some important medicinal plants and their enlightening resources in different areas of Himachal Pradesh. पौधे और पौधों से प्राप्त उत्पाद दुनिया भर में औषधि का प्रमुख स्रोत और अत्यधिक मूल्यवान संसाधन हैं। पादप घटक औषधि का एक आवश्यक घटक हैं और औषधि अनुसंधान के क्षेत्र में इन्हें नवीन यौगिकों का स्रोत माना जाता है। दुनिया भर में लगभग 35,000 से 70,000 पौधों की प्रजातियाँ हैं जिनका उपयोग चिकित्सा प्रयोजनों के लिए किया गया है, जिनमें से 6,500 से अधिक प्रजातियाँ एशिया में पाई जाती हैं। हिमालय क्षेत्र बड़ी संख्या में औषधीय और सुगंधित पौधों (एमएपी) का भंडार है और इसे वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट के रूप में मान्यता दी गई है, जहां पारिस्थितिक, पादप-भौगोलिक और विकासवादी चर उच्च प्रजातियों की विविधता को प्रोत्साहित करते हैं। यह भारत के 18% से अधिक हिस्से को कवर...

सामान्य बीमारियों के लिए प्रमुख औषधीय पौधे प्राचीन काल से ही मनुष्य सामान्य रोगों के शमन के लिए अपने दैनिक जीवन में औषधीय पौधों का प्रयोग करते आ रहा है। इस आधार पर सामान्य रोगो के चिकित्सा को सर्वसुलभ तथा सस्ता बनाया जा सकता है। अपने पूरे जीवनकल में हम इन औषधीय पौधों का उपयोग किसी न किसी रूप में करते हैं। इनमें मारक गुण काम और शोधक अधिक होता है। ये औषधीय पौधे रोगों को दबाती नहीं, वरन उखाड़ती और भागती हैं।  जीवन-शक्ति संवर्धक औषधीय पौधे हमारे आस-पास ही खेतों, जंगलों में बहुताय उपलब्ध हैं। सही औषधीय पौधे उपुक्त क्षेत्र से, उपयुक्त मौसम में एकत्र की जाए, उन्हें सही ढंग से रखा और प्रयुक्त किया जाए तो आज भी इनका चमत्कारी प्रभाव देखा जा सकता है। आहार एवं औषधि प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त होने वाली औषधीय पौधे अपने आपमें पूर्ण हैं, इनमें प्रत्येक की संरचना अनेक यौगिकों, क्षारों, रसायनों एवं खनिजों के सम्मिश्रण से हुई हैं, इसलिए इनमें प्रत्येक औषधीय पौधे परिपूर्ण हैं। इनसे कठिन रोगों की सरल चिकित्सा संभव हैं। प्रत्येक औषधीय पौधे स्वयं में समग्र हैं। इनका प्रयोग वैधकीय सलाह से ही करें। कुछ औषधीय पौधों को अपने घर के आस-पास या गृहवाटिका में लगा कर उनका लाभ ले सकते हैं। 1. ब्राम्ही (बाकोपा मोनिएरी) - यह पौधा भारत के सभी प्रदेशों...

13 Major Anola Disease and their Management आँवला में लगने वाले प्रमुख रोग टहनी झुलसा, पत्ती धब्बा रोग, रतुआ, सूटी मोल्ड, लाइकेन, ब्लू मोल्ड, श्यामवर्ण, गीली सड़न, काली गीली सड़न, फोमा फल सड़न रोग, निग्रोस्पोरा फल सड़न रोग , पेस्टालोसिआ फल सड़न रोग व इंटरनल नेक्रोसिस हैं। जिसके रोकथाम क उपाय संक्षेप में इस लेख में उलेखित हैं। यह वृक्ष हिमालय में 1350 मीटर तक आरोही उष्णकटिबंधीय क्षेत्रो में पाया जाता हैं और पुरे भारत वर्ष में उगाया जाता हैं। यह वृक्ष यूफोर्बीआयसी कुल का सदस्य हैं जिसे इंडियन ग्रूज़ वेर्री नाम से भी जाना जाता हैं। संस्कृत में इसे अमृता, अमृतफल, आमलकी, पंचरसा इत्यादि, अंग्रेजी में इण्डियन गूजबेरी तथा लैटिन में 'फ़िलैंथस एँबेलिका' कहते हैं। फल और बीज विटामिन सी बीज की समृद्ध स्रोत हैं। पारंपरिक भारतीय चिकित्सा में, सूखे और वृक्ष के ताजा फलों और पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता हैं। वृक्ष के सभी भागों दीर्घायु को बढ़ावा देने के लिए, और पारंपरिक रूप से पाचन बढ़ाने के लिए, हृदय और जिगर एनीमिया, दस्त, पेचिश, नकसीर, आंखों में सूजन, पीलिया आदि में इस्तेमाल किया जा सकता हैं। इसमें विषाणूरोधी, जीवाणुरोधी और कवक विरोधी गुण होते  हैं। एंटीऑक्सीडेंट के रूप में आंवला का उपयोग अच्छी तरह से जाना जाता रहा हैं। इसके फल का उपयोग मुरब्बा, चटनी, आचार, रस तथा चूर्ण इतयादि बनाने...

 Post Harvest Management  Value Addition and Uses of Medicinal Plants 1. ऑंवला ऑंवला युफोरबिएसी परिवार का पौधा हैं । यह भारतीय मूल का एक महत्पूर्ण फल है । महर्षि चरक ने इस फल को जीवन दात्री अथवा अमृतफल के समान लाभकारी माना है।  प्रति इकाई उच्च उत्पादकता 15-20 टन/हे विभिन्न प्रकार की भूमि ऊसर, बीहड़, शुष्क, अर्धशुष्क हेतु उपयुक्ता, एवं पोषक तत्वों जैसे विटामिन, खनिज, फिनॉल, टेनिन गुणों से भरपूर तथा विभिन्न रूपों में उपयोग के कारण ऑंवलो 21 वी सदी का प्रमुख फल है।  बनारसी कम फलत देने वाली, फ्रांसिस एवं नरेन्द्र ऑंवलो-6 औसत फलत देने वाली, कंचन एवं नरेन्द्र ऑंवलो-7 अत्यधिक फलत देने वाली किस्में हैं। औषधीय उपयोग -   एक चम्मच ऑंवले के रस को यदि शहद के साथ मिला कर सेवन किया जाय तो इससे कई प्रकार के विकार जैसे क्षय रोग, दमा, खून का बहना, स्कर्वी, मधुमेह, खून की कमी, स्मरण शक्ति की दुर्बलता, कैंसर, मस्तिष्क विकार, एन्फ्जलुएन्जा, ठंडक, समय से पेहले बुढ़ापा, बालों का झड़ना एवं सफेद होने से बचा जा सकता है । एक चम्मच ताजे ऑंवले का रस, एक कप करेले के रस में मिश्रित करके दो महीने तक प्रात:काल सेवन किया जाय तो इन्सुलिन का श्राव बढ़ जाता है। इस प्रकार यह मधुमेह रोग को नियंत्रित करके शरीर को स्वस्थ्य करता है। साथ ही रक्त की कमी, सामान्य दुर्बलता...

स्टार करौदा परिरक्षण (मुरब्‍बा): बेरी का एक पोषक मूल्य संंर्वधक उत्पाद  Star gooseberry, an underutilized fruit crop of Indian origin, has not yet been exploited properly in spite of its nutritional and medicinal values. In comparison to aonla / amla, it has limited market potential. However, its potential may be realized by developing and promoting its value added products. Bearing plant of star gooseberry Preserve may be helpful in popularizing vitamin C rich star gooseberry among masses. Star gooseberry (Phyllanthus acidus Skeels), a close relative of aonla (Emblica officinalis Geartn) is an underutilized fruit crop of India. It is a component of homestead gardens of tropical/ subtropical humid regions of the country. In Odisha it is known as ‘Narkoli’ and cultivated primarily in backyard. Narkoli bears fruits thrice in a year i.e. during March-April, June-July and Oct-November. Fruits are pale yellow, waxy, crispy, ribbed and smaller than aonla. It is a rich source of vitamin C (85-95 mg/100g of edible portion) and minerals. Traditionally, fruits are used as blood purifier, appetite stimulant and as a remedy for bronchitis, biliousness and digestive disorders. However, it has limited market as fresh fruit due to high acidity and astringency. Fruits are highly perishable in nature and can hardly be stored for 2-3 days at room temperature. Hence, it is necessary to...

Disease control in valuable drug Basil (Tulsi) तुलसी (Basil) एक द्विबीजपत्री तथा शाकीय, औषधीय पौधा हैं। यह झाड़ी के रूप में उगताहैं  और १ से ३ फुट ऊँचा होता हैं। इसकी पत्तियाँ बैंगनी आभा वाली हल्के रोएँ से ढकी होती हैं। पत्तियाँ १ से २ इंच लम्बी सुगंधित और अंडाकार या आयताकार होती हैं।  पुष्प मंजरी अति कोमल एवं ८ इंच लम्बी और बहुरंगी छटाओं वाली होती हैं, जिस पर बैंगनी और गुलाबी आभा वाले बहुत छोटे हृदयाकार पुष्प चक्रों में लगते हैं। तुलसी के बीज चपटे पीतवर्ण के छोटे काले चिह्नों से युक्त अंडाकार होते हैं। नए पौधे मुख्य रूप से वर्षा ऋतु में उगते हैं और शीतकाल में फूलते हैं। पौधा सामान्य रूप से दो-तीन वर्षों तक हरा बना रहता हैं। इसके बाद इसकी वृद्धावस्था आ जाती हैं। पत्ते कम और छोटे हो जाते हैं और शाखाएँ सूखी दिखाई देती हैं। इस समय उसे हटाकर नया पौधा लगाने की आवश्यकता प्रतीत होती हैं। यह लमियेसी परिवार से सम्बन्ध रखता हैं। तुलसी के अनेक ग़ुनो के कारण इसकी खेती भारत में सदियों से चली आ रही हैं। तुलसी के पौधे के तेल में 72 % युगेनॉल की मात्रा होती हैं जो की लॉन्ग के तेल की मात्रा के बराबर होती हैं। युगेनॉल मुख्य रूप से सौंदर्य प्रसाधन, इत्र, दवाइयों में प्रयोग किया जाता...

13 Major diseases of Amla tree and their control आँवला  में लगने वाले प्रमुख रोग टहनी झुलसा, पत्ती धब्बा रोग, रतुआ, सूटी मोल्ड, लाइकेन, ब्लू मोल्ड, श्यामवर्ण, गीली सड़न, काली गीली सड़न, फोमा फल सड़न रोग, निग्रोस्पोरा फल सड़न रोग , पेस्टालोसिआ फल सड़न रोग व इंटरनल नेक्रोसिस हैं। जिसके रोकथाम क उपाय संक्षेप में इस लेख में उलेखित हैं। यह वृक्ष हिमालय में 1350 मीटर तक आरोही उष्णकटिबंधीय क्षेत्रो में पाया जाता हैं और पुरे भारत वर्ष में उगाया जाता हैं। यह वृक्ष यूफोर्बीआयसी कुल का सदस्य हैं जिसे इंडियन ग्रूज़ वेर्री नाम से भी जाना जाता हैं। संस्कृत में इसे अमृता, अमृतफल, आमलकी, पंचरसा इत्यादि, अंग्रेजी में इण्डियन गूजबेरी तथा लैटिन में 'फ़िलैंथस एँबेलिका' कहते हैं। फल और बीज विटामिन सी बीज की समृद्ध स्रोत हैं। पारंपरिक भारतीय चिकित्सा में, सूखे और वृक्ष के ताजा फलों और पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता हैं। वृक्ष के सभी भागों दीर्घायु को बढ़ावा देने के लिए, और पारंपरिक रूप से पाचन बढ़ाने के लिए, हृदय और जिगर एनीमिया, दस्त, पेचिश, नकसीर, आंखों में सूजन, पीलिया आदि में इस्तेमाल किया जा सकता हैं। इसमें विषाणूरोधी, जीवाणुरोधी और कवक विरोधी गुण होते  हैं। एंटीऑक्सीडेंट के रूप में आंवला का उपयोग अच्छी तरह से जाना जाता रहा हैं। इसके फल का उपयोग मुरब्बा, चटनी, आचार, रस तथा चूर्ण इतयादि बनाने...