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फसल विविधीकरण कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने की महत्वपूर्ण रणनीति है। जानिए इसके लाभ, उपाय, रणनीतियाँ और विभिन्न फसल प्रणालियों की भूमिका।...

भारत में क्विनोआ की खेती: जलवायु, मिट्टी, बुवाई, सिंचाई और उत्पादन की पूरी जानकारी क्विनोआ एक पौष्टिक अनाज जैसा खाद्य बीज है, जिसकी मांग पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों के कारण बढ़ी है। भारत में भी किसान इसे पारंपरिक फसलों के विकल्प और फसल विविधीकरण के रूप में देख रहे हैं। क्विनोआ की खास बात यह है कि यह अलग-अलग परिस्थितियों में उग सकता है और कुछ किस्में कम पानी तथा लवणीय मिट्टी जैसी परिस्थितियों को भी अपेक्षाकृत अच्छी तरह सहन कर सकती हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर क्षेत्र में क्विनोआ की खेती समान रूप से सफल होगी। स्थानीय जलवायु, मिट्टी, किस्म, बुवाई का समय और बाजार की उपलब्धता को ध्यान में रखना जरूरी है। जो किसान पहली बार क्विनोआ की खेती शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए छोटे क्षेत्र से शुरुआत करना बेहतर हो सकता है। इससे स्थानीय परिस्थितियों में फसल के प्रदर्शन और बाजार की मांग को समझने में मदद मिलती है। क्विनोआ क्या है? क्विनोआ का वैज्ञानिक नाम Chenopodium quinoa है। यह एक बीज वाली फसल है, लेकिन इसके बीजों को चावल और अन्य अनाजों की तरह पकाकर खाया जाता है। वनस्पति विज्ञान की दृष्टि से यह गेहूं या चावल जैसे पारंपरिक अनाजों से अलग है। क्विनोआ के पौधे की ऊपरी शाखाओं पर फूल और बीजों के...

Climate Change and its impact on Groundwater Dependent Farming in India To secure India's agricultural future, it is necessary to adopt a multi-pronged approach. This should include promotion of water-efficient technologies, crop diversification, rainwater harvesting and strong groundwater management policies. Climate Change and its impact on Groundwater Dependent Farming in India भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य उत्पादकों में से एक है, जो इसकी कृषि प्रणाली की स्थिरता को वैश्विक महत्व देता है। इसका कृषि परिदृश्य विविध है और यह चावल, गेहूं, गन्ना, कपास, फल और सब्जियों सहित विभिन्न प्रकार की फसलों का उत्पादन करता है। देश का कृषि क्षेत्र इसकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और लाखों लोगों को आजीविका प्रदान करता है। भूजल सिंचाई भारत की कृषि का आधार है, जो वर्तमान में 170 मिलियन लोगों को खिलाने के लिए फसल उत्पादन को बढ़ा रहा है। भूजल खेती, जिसे भूजल-निर्भर कृषि के रूप में भी जाना जाता है, दुनिया भर में खाद्य उत्पादन की एक महत्वपूर्ण आधारशिला का प्रतिनिधित्व करती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां लगातार सतही जल स्रोत दुर्लभ हैं। यह प्रथा फसलों की सिंचाई, पशुधन को बनाए रखने और कृषि पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन करने के लिए भूजल के निष्कर्षण पर निर्भर करती है। भूजल, पृथ्वी की सतह के नीचे जलभृतों में संग्रहीत होता है, जो जीवन-निर्वाह नमी...

Crop diversification: a new dimension to increase farmers' income पिछले पांच दशकों में कृषि उत्पादन में वृद्धि और खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना कृषि विकास के लिए मुख्य विषय था। भारत की अधिकतर आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है जहाँ कृषि मुख्य व्यवसाय है। भारत में लगभग 93 प्रतिशत किसानों की जोत का आकर 4 हेक्टर से भी कम है एवं इसकी 55  प्रतिशत भूमि ही कृषि योग्य है। भारत सरकार द्वारा 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का निर्धारित लक्ष्य किसान कल्याण को बढ़ावा देने, कृषि संकट को कम करने और किसानों की आय और गैर-कृषि व्यवसाय के श्रमिको के बीच समानता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कृषि विकास के लिए कृषि उत्पादकता, उत्पादन लागत, फसल विविधीकरण, उत्पाद मूल्य आदि में सुधार आवश्यक है। इसके लिए नियत समय पर कई उपयोगी योजनाए प्रस्तावित की गईं है जैसे प्रति बूंद अधिक फसल, गुणवत्ता वाले बीज, मृदा-स्वास्थ्य कार्ड, भण्डारण और कोल्ड चेन, मूल्य संवर्धन, ई-प्लेटफार्म, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, सहायक गतिविधिया (पोल्ट्री, सेरीकल्चर, मधुमक्खी पालन और मत्स्य पालन) आदि। गैर-कृषि क्षेत्रों के लिए भूमि की उच्च मांग के कारण खेती करने के लिए भूमि की उपलब्धता कम हो रही है। विकसित प्रौद्योगिकियों को नहीं अपनाने एवं  खेतों के आधुनिकीकरण के अभाव के कारण देश में खाद्यान उत्पादकता और किसानों की आय स्तर...