01 Oct सुपरफूड सहजन: प्रकृति का अनोखा वरदान और इसके आयुर्वेदिक महत्व
सहजन यानी Moringa के पत्ते, फली और अन्य हिस्सों के पोषण, औषधीय गुण और आयुर्वेदिक महत्व के बारे में जानें। सहजन के उपयोग और फायदे की पूरी जानकारी।...
सहजन यानी Moringa के पत्ते, फली और अन्य हिस्सों के पोषण, औषधीय गुण और आयुर्वेदिक महत्व के बारे में जानें। सहजन के उपयोग और फायदे की पूरी जानकारी।...
Top 15 Superfoods for a Healthy Diet: Nutritious Foods You Can Eat Every Day अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए हमेशा महंगे या विदेशी खाद्य पदार्थों की जरूरत नहीं होती। हमारे आसपास और भारतीय रसोई में मिलने वाले कई खाद्य पदार्थ पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। आंवला, सहजन, मोटे अनाज, दालें, मेवे, बीज, हरी सब्जियां और मौसमी फल इसका अच्छा उदाहरण हैं। You do not always need expensive or imported foods to maintain a healthy diet. Many foods that are easily available in Indian kitchens are naturally rich in nutrients. Amla, moringa, millets, pulses, nuts, seeds, green vegetables and seasonal fruits are some good examples. सुपरफूड (Superfood) शब्द आमतौर पर ऐसे खाद्य पदार्थों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिनमें एक या अधिक महत्वपूर्ण पोषक तत्व अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। हालांकि, किसी एक खाद्य पदार्थ को संपूर्ण आहार का विकल्प नहीं माना जा सकता। अलग-अलग प्रकार के पौष्टिक खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करना अधिक महत्वपूर्ण है। The term superfood is commonly used for foods that are particularly rich in one or more nutrients or naturally occurring plant compounds. However, no single food can provide everything the body needs. Eating a varied and balanced diet is more important. 15 प्रमुख सुपरफूड्स की सूची 15 Superfoods You Can Add to Your Diet आंवला...
मोरिंगा: पशुओं में गर्मी के तनाव की स्थिति को रोकने के लिए पूरक आहार The average air temperatures of the Earth’s surface increased over some previous centuries which is designated as Global warming. According to the IPCC (2013), the increment in average global surface temperature of about 0.9 °C/1.5 °F from 1880 to 2012. Some studies also suggested that temperature is expected to enhance 2.3°C to 4.8°C in India by the completion of the 21st centenary which is a big threat to the sustainability of animal production. Due to this climate change, there is a huge loss of lives and the economy of various countries. Accumulation of greenhouse gases in the atmosphere leads to the warming of the earth. There is a prediction that there will be an increase in temperature by 1.5°C to 2°C in the future may cause a loss of 20 to 30% of the plant and animal population. So that to grow in future challenging climates, plant, and animal species require altering their behavior and distribution patterns and getting acclimatized to that challenging climate. Feed availability during scarcity period Currently agricultural land is facing the problem of degradation and, therefore, decreased yields. Current land-use data shows that 75.5% of the world’s available land area is already being used for agricultural production. The...
हरे चारे के लिए मोरिंगा (ड्रमस्टिक) एक स्थायी विकल्प मोरिंगा एक ऐसा पेड़ है जो हरे चारे की कमी को पूरा करने में अहम योगदान दे सकता है। मोरिंगा को लोकप्रिय रूप से ‘ड्रमस्टिक’ के नाम से जाना जाता है क्योंकि इसकी फलियां ड्रमर द्वारा उपयोग की जाती हैं। इसे हिन्दी में सेहजन/सहजना कहते हैं। इस तेजी से बढ़ने वाले वृक्ष को पूरे उष्णकटिबंधीय इलाके में आसानी से स्थापित होने एवं बहुउद्देश्यीय उपयोग जैसे सब्जी, पशुधन चारा, दवा मूल्य, डाई, जल शुद्धिकरण आदि के कारण उगाया जाता है। मोरिंगा की पत्तियों में बीटा केरोटीन, प्रोटीन, विटामिन सी, केल्शियम, मैग्नीशियम एवं लोहा प्रचूर मात्रा में उपस्थित होता है। चूंकि मोरिंगा प्रोटीन में समृद्ध है इसलिए इसे दुधारू जानवरों के पूरक चारे के रूप् में उपयोग में लाया जा सकता है। पारंपरिक प्रोटीन पूरकों जैसे कि नारीयल खल, कपास खल, मूंगफली खल, तिल खल, सूरजमुखी की खल आदि की तुलना में इसकी पत्तियों में प्रोटीन अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा इसकी पत्तियों में अनेक फफूंदी प्रजातियों के खिलाफ एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाईक्रावियल गुण होते हैं। मोरिंगा को बाड़, घेरे एवं बहुकट चारे के रूप में उगाया जा सकता है। पोष्टिक महत्त्व- पोषक तत्त्व जैसे p+, M, ca और Mg पशुधन की शारीरिक, चपाचय और जैव रासायनिक, संतुलन प्रक्रियाओं में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पशु...
सहजन एक जादुई पौधा सहजन या ड्रम्स्टिक ( moringa olieifera ) maringacea कुल के पौधे के बारे हम सभी जानते हैं की इसे सीजना,सुरजना, शोभाजन, इंडियन हार्सरैडिश आदि नामों से जानते हैं लेकिन इनके औषधीय गुणों के बारे मे बहुत कम ही लोग जानते हैं इसके जड़, पते, छाल और फलियों आदि भाग किसी न किसी रूप मे उपयोग लेते हैं इनके सभी भागों मे औषधीय गुण बहुत अधिक मात्रा मे होते हैं इसके पते एवं फलिया शरीर को ऊर्जा देने के साथ साथ शरीर मे विटामिन,खनिज एवं पोषक तत्व प्रदान करते हैं और शरीर मे उपस्थित हानिकारक या विषैले तत्वों को निकालने का काम करते हैं सहजन भारत,पाकिस्तान,बांग्लादेश और अफगानिस्तान की मूल वानस्पतिक पौधा हैं ! सहजन हमे संतरा से 7 गुना विटामिन सी ओर गाजर से 10 गुना विटामिन ए और दुध से 17 गुना कैल्सीयम तथा योगर्ट से 9 गुना अधिक प्रोटीन और केला से 15 गुना अधिक पोटेशियम तथा पालक से 25 गुना अधिक लौह तत्व की पूर्ति करते हैं ! सहजन के औषधीय महत्व सहजन के पौधे के सभी भागों से आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं सहजन का पौधा आवश्यक पोषक तत्वों का खजाना हैं सहजन की पत्तियों से आयरन, कैल्सीयम, पोटेशियम, जिंक, कॉपर तथा विटामिन जैसे विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन सी और विटामिन डी उपस्थित होते हैं ! सहजन की फलियों मे...
सहजन पेड़ की अविश्सनीय पोषण एंव औषधीय क्षमता Moringa (Moringaoliefera L. ) commonly known as the drumstick, horseradish tree and ben oil tree in English,SohjnainAssamese,Sajinain Bengali, Mungna, Sehjanin Hindi, Nuggein Kannada, and Shevagain Marathi. The genus name ‘Moringa’ is derived from the vernacular Tamil ‘Murungai’ meaning twisted pods. It comprises about 13 deciduous tree species belongs to single genus Moringa in Moringaceae family, including M. concanensis, M. drouhardii, M. longituba, M. ovalifolia, M. peregrina, and M. stenopetala. Most of these species are multi-purpose tree with food, fiber, and medicinal value. Moringa is an indigenous plant to the Sub-Himalayan tracts of South Asia, extending from the northeastern Pakistan to northern West Bengal State in India. It is commonly found at elevations from sea level to 1400 m. It is naturalized and being cultivated beyond its native range, in different parts of the world, including India, Pakistan, Nepal, Afghanistan, Bangladesh, Sri Lanka, Southeast Asia, Arabian Peninsula as well as in East and West Africa. In South Indian states,moringa pods are an essential part of diet and assumes special significance in day-to-day life. Moringa is considered as “Miracle Tree” or “Wonder Crop”, power-packed with nutrients. Different plant parts of moringa are consumed for nutraceutical value. Apart from pods for vegetable purpose, roots, bark, leaf, flowers are also...
Moringa's Value Added Products to Increase Agricultural Income वर्तमान फसल पद्धतियों एवं जलवायु की दशाओं को ध्यान में रखते हुए किसानों की आय मे वृद्धि कृषि वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी समस्या है। इसके लिए परंपरागत फसलों एवं बहुमूल्य औषधीय पौधों की खेती की ओर काफी ध्यान दिया जा रहा है। इस प्रकार की फसलें अल्प लागत में अधिक लाभ देकर स्थायी विकास को प्रोत्साहित करती हैं तथा अन्य सह फसलों के उत्पादन में होने वाले जोखिम को भी कम करती हैं। मोरिंगा यानि सहजन (मोरिंगा ओलीफेरा) एकवंशीय, मोरिंगेसी कुल का पौधा है जिसके सभी भागों को पोषण सम्पन्न माना जाता है। इसकी पत्तियों एवं फलियों में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, विटामिन, खनिज व अनेक पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाये जाते हैं। हमारे देश में सहजन की एक बड़े भाग पर व्यावसायिक खेती होती है। पोषक गुणो से भरपूर सहजन के व्यावसायिक उत्पादों को विश्व भर में स्वास्थ्य वर्धक पोषक तत्वों की प्रतिपूर्ति हेतु सेवन किया जा रहा है। मोरिंगा लगभग 300 रोगों के लिए संजीवनी का कार्य करता है। अतः इसके विभिन्न भागों का प्रयोग करके व्यावसायिक रूप से निर्मित उत्पादों से न केवल पोषण प्रतिपूर्ति संभव हो सकती है बल्कि इसके मूल्य संवर्धित उत्पादों के विपणन से किसानों को अच्छी आय भी मिलती है। इसलिए इसके उत्पादों की बाजार में अच्छी ख़ासी...
सहजन: पौष्टिकता से भरपूर बहुउद्देशीय वृक्ष सहजन का वैज्ञानिक नाम मोरिंगा ओलीफेरा है. इसे अंग्र्रेजी में ड्रमस्टिक, मराठी में शेवगा, तमिल में मुरूंगई, मलयालम में मुरिन्गन्गा और तेलगु में मुनगावया इत्यादि नामो से जानते हैं. सहजन एक बहु उपयोगी पेड़ है, यह मोरिंगासी परिवार का सदस्य है. यह परंपारागत रूप से घरो के पिछवाड़े या बगीचों में लगाया जाता है. इसका पेड़ सामान्यत १० से १२ मीटर ऊँचा होता है. यह तेजी से बढ़ने वाला, गहरी जड़ो वाला सूखा सहनशील पौधा है. यह सदाबहार, माध्यम आकर का पर्णपाती वृक्ष्य है. इसका तना सफ़ेद भूरे रंग का होता है और मोटी छाल से ढाका रहता है. इसकी उत्पत्ति भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के उपहिमालियन क्षेत्र है. भारत में गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में इसकी खेती बड़े पैमाने पर होती है. सहजन पूरे भारतवर्ष में सुगमता से पाया जाने वाला पौष्टिकता से भरपूर बहुउद्देशीय वृक्ष है. यह आसानी से लग जाता है और इसके पत्ते, फूल, फलियां, बीज और जड़ें सभी पोषक तत्वों से भरपूर है, जो मनुष्य और जानवर दोनों के लिए काम आते हैं. दक्षिणी और पूर्व भारत में यह एक लोकप्रिय सब्जी है. सहजन की भारत में वर्तमान उत्पादन स्थिति भारत सहजन का सबसे बड़ा उत्पादक देश है, भारत में लगभग १.२ से २ मिलियन टन फलियों का उत्पादन हर...