Agriculture Knowledge for Everyone

Urea Tag

खेत में fertilizer का सही और संतुलित उपयोग crop growth के लिए महत्वपूर्ण है। खेती में अच्छी फसल के लिए केवल अच्छी quality का seed ही पर्याप्त नहीं होता। पौधों को सही मात्रा में nutrients मिलना भी उतना ही जरूरी है। इसी कारण किसानों के बीच Urea, DAP और NPK fertilizer का इस्तेमाल काफी common है। लेकिन अक्सर किसानों के मन में यह सवाल रहता है कि Urea, DAP और NPK में क्या अंतर है? कौन-सी खाद में कौन-सा nutrient होता है और किस परिस्थिति में कौन-सा fertilizer उपयोगी हो सकता है? इस article में हम आसान भाषा में समझेंगे कि Urea, DAP और NPK fertilizer क्या हैं, इनमें कौन-कौन से nutrients होते हैं, इनके बीच क्या difference है और fertilizer का इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। Quick Answer: Urea मुख्य रूप से Nitrogen देता है, DAP में Nitrogen और Phosphorus होता है, जबकि NPK fertilizers में Nitrogen, Phosphorus और Potassium अलग-अलग ratios में उपलब्ध होते हैं। सही fertilizer का चुनाव crop और soil requirement के आधार पर करना चाहिए। Urea, DAP और NPK क्या हैं? पौधों को अच्छी growth के लिए कई essential nutrients की जरूरत होती है। इनमें तीन major nutrients हैं: Nitrogen (N) Phosphorus (P) Potassium (K) इन तीन nutrients को commonly NPK nutrients कहा जाता है। इनके अलावा plants को Sulphur, Zinc, Iron, Boron, Magnesium और अन्य micronutrients की...

पशुओं के लिए यूरिया, शीरा युक्‍त खनिज पोष्टिक आहार । यूरिया, शीरा युक्त पशु आहार पशुओं के लिए पूरक पोषण का महत्त्वपूर्ण स्रोत है जिसके फलस्वरूप पशुओं की उत्पादन क्षमता में सुधार होता है।  यह स्थानीय सामग्री जैसे गुड, यूरिया, केल्साइट और गेहूँ के भूसे के साथ मिलाकर बनाया जा सकता हैं। यह पशुओं के लिए एक सस्ता व सम्पूर्ण पोषण का आहार है। इससे पशुओं की गुणवत्ता में वृद्धि होती है। भारत में पशुओं की संख्या बहुत अधिक है। परन्तु प्रति पशु दुग्ध उत्पादन बहुत कम है। इसका मुख्य कारण आनुवंशिकता क्षमता की कमी तथा पोष्टिक व संतुलित आहार की उचित आपूर्ति न होना है। फसल अवशेष ही हमारे पशुओं में मुख्य आहार हैं। फसल अवशेषों में नाइट्रोजन तथा खनिज की मात्रा बहुत ही कम होती है। जबकि इनमें कार्बोहाईड्रेटस ही पर्याप्त मात्रा में होते है परन्तु लिग्लिन अधिक होने के कारण पशु इनका पूरी तरह उपयोग नहीं कर पाता है इसलिए फसल अवशेष में अल्प मात्रा में पाये जाने वाले तत्वों की पूर्ति आवश्यक है। जुगाली करने वाले पशुओं की प्रमुख विशेषता है कि वे अपनी प्रोटीन तथा उर्जा की आवश्यकता केवल नाइट्रोजन तथा रेशेदार आहार से पूरा कर लेते है। इसके लिए प्रथम अमाशय में असंख्य जीवाणु (बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ, फफूंद आदि) होते है जो कि नाइट्रोजन को प्रोटीन नाइट्रोजन तथा रेशेदार कार्बोहाइड्रेट...