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Crop Cultivation

Dragon Fruit Cultivation in Rajasthan: A New Possibility शोजी लाल बैरवा ड्रैगन फल की खेती एक उभरता हुआ और लाभदायक कृषि व्यवसाय है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पानी की कमी एक बड़ी चुनौती है। यह फल (पिटाया या कमलम) कैक्टस परिवार से संबंधित है और कम पानी की आवश्यकता के कारण शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु में अच्छी तरह से उग सकता है। राजस्थान में सरकार के समर्थन और सफल किसान उदाहरणों के कारण ड्रैगन फल की खेती की संभावनाएं बढ़ रही हैं, उदयपुर, धौलपुर, सीकर, भीलवाड़ा और जयपुर जैसे क्षेत्रों में किसान इसे उगा रहे हैं, और यह अर्ध-शुष्क जलवायु में अच्छी तरह से फल दे रहा है। यह फल पोषक तत्वों से भरपूर है और उच्च बाजार मूल्य (लगभग ₹300 प्रति किलो) के कारण किसानों के लिए आकर्षक है। ड्रैगन फल मूल रूप से मैक्सिको का है, लेकिन अब वियतनाम, थाईलैंड, और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में व्यापक रूप से उगाया जाता है। भारत में इसकी खेती पिछले 4-5 वर्षों में तेजी से बढ़ी है, और राजस्थान जैसे राज्यों में भी इसका प्रसार हो रहा है। इसकी मांग घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ रही है। वर्तमान में, इसका औसत बाजार मूल्य लगभग ₹300 प्रति किलो है, जो इसे आर्थिक रूप से आकर्षक बनाता है। ड्रैगन फल की मांग घरेलू और अंतरराष्ट्रीय...

भाकृअनुप-भारतीय गेहूँ एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल की महत्वाकांक्षी परियोजना अखिल भारतीय समन्वित गेहूँ एवं जौ सुधार कार्यक्रम के तहत गेहूँ की 55 जैव-संवर्धित किस्में विकसित की गई हैं। इन किस्मों के अंगीकरण से देश की पोषण एवं खाद्य सुरक्षा को और सुदृढ़ किया जा सकता है।...

Maize cultivation: how to मक्का खरीफ ऋतु की फसल है, परन्तु जहां सिचाई के साधन हैं वहां रबी और खरीफ की अगेती फसल के रूप मे मक्‍का की खेती की जा सकती है। मक्का कार्बोहाइड्रेट का बहुत अच्छा स्रोत है। यह एक बहपयोगी फसल है व मनुष्य के साथ- साथ पशुओं के आहार का प्रमुख अवयव भी है तथा औद्योगिक दृष्टिकोण से भी मक्‍का की खेती का महत्वपूर्ण स्थान भी है। चपाती के रूप मे, भुट्टे सेंककर, मधु मक्का को उबालकर, कॉर्नफलेक्स ,पॉपकार्न, लइया के रूप मे आदि के साथ-साथ अब मक्का का उपयोग कार्ड आइल, बायोफयूल के लिए भी होने लगा है। लगभग 65 प्रतिशत मक्का का उपयोग मुर्गी एवं पशु आहार के रूप मे किया जाता है। साथ ही साथ इससे पौष्टिक रूचिकर चारा प्राप्त होता है। भुट्टे काटने के बाद बची हुई कडवी पशुओं को चारे के रूप मे खिलाते हैं। औद्योगिक दृष्टि से मक्का मे प्रोटिनेक्स, चॉक्लेट पेन्ट्स स्याही लोशन स्टार्च कोका-कोला के लिए  कॉर्न सिरप आदि बनने लगा है। बेबीकार्न मक्का से प्राप्त होने वाले बिना परागित भुट्टों को ही कहा जाता है। बेबीकार्न का पौष्टिक मूल्य अन्य सब्जियों से अधिक है। जलवायु एवं भूमि:- मक्का उष्ण एवं आर्द जलवायु की फसल है। इसके लिए ऐसी भूमि जहां पानी का निकास अच्छा हो उपयुक्त होती है।     खेत की तैयारी :- खेत की तैयारी के लिए पहला पानी...

How can farmers cultivate green leafy vegetables in cold weather? भारतवर्ष में उगाई जाने वाली हरी पत्तेदार सब्जियों में पालक, मैथी, सरसों एवं बथुआ प्रमुख है जोकि हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। हरी सब्जियों के अंदर प्रचुर मात्रा में रेसा, प्रोटीन, वसा, विटामिन्स (विटामिन बी-2 विटामिन सी एवं विटामिन के) और खनिज पदार्थ (लोहा, कैल्शियम एवं फास्फोरस) मौजूद होते है। रेशेयुक्त सब्जियां सस्ती व आसानी से उपलब्ध होने के साथ-साथ भोजन को पाचनशील, स्वादिष्ट, संतुलित व पौष्टिक बनाने में सहायता करती है। संतुलित आहार के अनुसार हमें प्रतिदिन दैनिक आहार में 100 ग्राम हरी पत्तेदार सब्जियां लेनी चाहिए। अन्य सब्जियों की तुलना में हरी सब्जियों के सेवन से एनीमिया, कैंसर और हृदय से संबंधित बीमारियों से बचा जा सकता है। सर्दी को मौसम में हरी पत्तेदार सब्जियों की खेती किसानों के लिए मुनाफे का सौदा है क्योंकि अन्य सब्जियों की तुलना में पत्तेदार सब्जियों की खेती में कम लागत आती है। ये सब्जियाँ दो भागों में बांटी गयी है: 1.        शीतकालीन: पालक, मेथी, विलायती पालक, सरसों व बधुआ आदि । 2.        ग्रीष्मकालीन: चौलाई, छोटी चौलाई, कुल्फा व पोई आदि। शीतकालीन मुख्य फसलों की उन्नत किस्में पालक– आलग्रीन, पूसा ज्योति, पूसा हरित, पूसा भारती, जोबनेरग्रीन, एच. एस. 23, वर्जिनिया स्वॉय व अर्ली स्मूथलीफ आदि।मैथी- पूसा अर्ली बंचिग, राजेन्द्र क्रांति, हिसार सोनाली,...

An overview of Mushroom Cultivation मशरूम की खेती का अवलोकन When envisioning a crop that does not require sunlight, soil, or open fields, mushrooms stand out as the perfect example. Mushroom cultivation is a prime model of the “Zero Emission” concept of total recycling, as it utilizes agricultural waste from other crops and, in return, provides a highly nutritious food source. Mushroom farming is a profitable and sustainable enterprise with immense potential. Unlike traditional farming, it is an eco-friendly practice that requires minimal land and water and can be conducted indoors. With the rising demand for organic and health-conscious foods, mushrooms have gained popularity due to their rich nutritional profile and medicinal properties. One of the key advantages of mushroom cultivation is that it is a soilless farming system. Instead of soil, agricultural byproducts such as wheat straw and paddy straw serve as the growth medium. Cultivation takes place in controlled environments such as rooms, huts, or tin sheds that shield the mushrooms from direct sunlight. Being fungi, mushrooms derive their energy from the substrate through biochemical decomposition, making them well-suited for indoor farming. Mushrooms are a nutritional powerhouse and an excellent supplement to staple foods, often referred to as the “meat of the vegetable world”. They are low in calories, rich in dietary...

Chrysanthemum Cultivation Practices गुलदाउदी, जिसे अंग्रेजी में Chrysanthemum कहा जाता है, एक आकर्षक और विविध रंगों वाले फूलों की प्रजाति है। यह विशेष रूप से बगीचों में सजावट के लिए पसंद किया जाता है। गुलदाउदी विभिन्न रंगों और रूपों में पाया जा सकता है, जैसे कि सफेद, पीला, लाल, बैंगनी, गुलाबी, और अन्य रंगों में। गुलदाउदी का मूल स्थान मुख्य रूप से चीन, जापान और कोरिया है। जापान में इसे विशेष महत्व दिया जाता है, जहां इसे राजशाही का प्रतीक माना जाता है और राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में इसका प्रयोग होता है। भारत में गुलदाउदी का व्यावसायिक उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसका उपयोग खासतौर पर माला बनाने, बगीचों की सजावट, गुलदस्तों में और प्रदर्शनी में किया जाता है। यह भारतीय त्योहारों में भी आमतौर पर इस्तेमाल होता है। गुलदाउदी का वैज्ञानिक नाम Dendranthema grandiflorum है और यह Asteraceae परिवार से संबंधित है। यह ठंडे मौसम में अच्छे से उगता है और इसकी देखभाल भी आसान है, जिससे यह बगीचों और फूलों की खेती के लिए एक आदर्श विकल्प बनता है।गुलदाउदी को "सर्दी की रानी" भी कहा जाता है। अमेरिका में इसे आमतौर पर ‘ग्लोरी ऑफ ईस्ट’ या संक्षेप में ‘मम’ के नाम से जाना जाता है। यह फूल बगीचों में व्यापक रूप से उगाया जाता है और भारत में खेती...

weed control in sugarcane crop The sugarcane crop grows for 12 to 18 months. It requires a lot of fertilizer and water for its growth and high yield. Due to which the weeds also grow and develop very fast. In the sugarcane crop, weeds absorb 6-8 times nitrogen, 7-8 times phosphorus and 3-5 times potash as compared to the crop. खरपतवारों से फसल क्षति गन्ने की फसल 12 से 18 महीने तक होती है। इसकी बढ़वार एवं अधिक उपज के लिए अत्यधिक खाद एवं पानी की आवश्यकता होती है। जिसके कारण खरपतवारों की भी वृद्धि एवं विकास बहुत तेजी से होती हैं। गन्ने की फसल में खरपतवार फसल की तुलना में 6-8 गुना नाइट्रोजन, 7-8 गुना फास्फोरस एवं 3-5 गुना पोटाश अवषोषित करते हैं, साथ ही खरपतवार, नमी का एक बड़ा हिस्सा शोषित कर लेते हैं तथा फसल के साथ आवश्यक प्रकाश एवं स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा रखते हैं। इसके अतिरिक्त खरपतवार फसलों में लगने वाले कीटों एवं रोगों के जीवाणुओं को भी आश्रय देते हैं। खरपतवारों की संख्या एवं प्रजाति के अनुसार गन्ने की पैदावार में 20 से 65 प्रतिशत तक की कमी आंकी गयी है तथा साथ ही साथ चीनी की परता एवं गुणवत्ता में भी कमी आती है।  खरपतवारों की रोकथाम का समय  गन्ने में खरपतवार बुवाई से लेकर मानसून शुरू होने तक...

चावल में फाइलोक्रोन गतिशीलता (ओरिज़ा सातिवा एल.) Phyllochron, defined as the interval time between appearances of successive leaves on a shoot, is an important measurement to know the developmental state of a shoot apex in rice. Shoot development of rice was divided into three stages, regardless of environment and genotype: Maintenance of short phyllochron in the early developmental stage Drastic increase of phyllochron depending on leaf number from the base in the late stage and Decrease of phyllochron before final leaf stage. Origin The modeling of the phyllochron was first published in 1951 when Katayama presented the growth rules, he had worked out for leaf emergence on the main stem and tillers of rice, wheat and barley. The numbers of tillers that emerged from the main tiller and subsequent tillers according to respective tiller orders (main, primary, secondary and tertiary) reflecting their sequence of emergences. The number of total tillers and tertiary tillers increased ex-potentially as the number of phyllochrons (often referred to as leaf number) advanced. It was the growth in number of tertiary tillers that drove the total number up so sharply.   Production of tillers in rice The number of primary and secondary tillers increased more linearly with the advance of phyllochrons (the number of periods of tiller emergence). The first primary tiller emerges from the main...