Agriculture Knowledge for Everyone

गन्ने की व्यावसायिक खेती कैसे करें

गन्ने की व्यावसायिक खेती कैसे करें

Commercial cultivation of Sugarcane

व्यावसायिक फसलों में गन्ने का महत्त्वपूर्ण स्थान है । गन्ने की खेती के लिए गर्म जलवायु अच्छी मानी जाती है । अच्छे विकास के लिए तापमान 26-32 डिग्री से.ग्रे. उत्तम होता है । खेती के लिए मध्यम से काली कछारी एवं चिकनी दोमट मिटटी डोरसा कन्हार सर्वोत्तम रहती है।

गन्‍ना उत्‍पादन के लि‍ए खेत की तैयारी:

खरीफ फसल काटने के बाद खेत की गहरी जुताई मिटटी पलटने वाले हल से करें । इसके बाद देषी हल या कल्टीवेटर से जुताई करके पाटा चलाकर खेत समतल करें ।

गन्‍ना बोने का समय:

गन्ने को अक्टूबर-नवम्बर षरद ऋतु व फरवरी मार्च बसंत ऋतु में बोया जाता है । बसंत की अपेक्षा षरदकालीन बुवाई से 20-25 उपज अधिक मिलती है ।

उन्नत किस्में एवं स्वस्थ बीज का चयन :

गन्ना बीज के लिए स्वस्थ एवं निरोगी 8-10 माह की फसल उपयुक्त रहती है । प्रदेष के लिए को. 86032, को. 419, को.1305, को. जे. 86-141, को. 6304, को. 8338, को.6217, को. 775, को. जे. 2087 आदि उन्नत किस्में है ।

गन्‍ने की बुवाई :

गन्ने की बुवाई मुख्यत: समतल व नाली विधि से की जाती है । समतल विधि में देषी हल से 90 से.मी. की दूरी पर कॅूड बनाए और कूॅडों में गन्ने के छोटे-छोटे टुकडे में जिसमें 2 ऑखें होना जरुरी है। की बुवाई सिरे से सिरा मिलाकर की जाती है।

नाली विधि में 90 सें.मी. की दूरी पर 45 सें.मी. चौडी नाली बना ली जाती है। तथा नाली में बीज को सिरे से सिरा मिलाकर बुवाई की जाती है और बीज को मिटटी से दबा देते है।

गन्‍ने के बीज की मात्रा व उपचार :

षीघ्र पकने वाली किस्मों के लिए 70-75 क्विंटल तथा देर से पकने वाली किस्मों के लिए 60-65 क्विंटल बीज प्रति हेक्टेयर की आवष्कता होती है। जिससे 35-40 हजार तक गन्ने के टुकडे बीज बनाए जा सके । गन्ने के टुकडों को 10 मिनट तक बाविस्टन 100 ग्राम एवं मेलाथियान 300 मि.ली. को 100 लीटर पानी में घोल बनाकर उपचारित करें।

खाद एवं उर्वरक की मात्रा :

सामान्य तौर पर बुवाई से पूर्व खेत में 25-30 गाडी गोबर की खाद मिला देना चाहिए। इसके अलावा 250-300 कि.ग्रा. नत्रजन 80-90 कि.ग्रा. फास्फोरस व 50-60कि.ग्रा. पोटाष/हे. की सिफारिष की जाती है। नत्रजन की तीन बराबर भागों बोनी के 30 दिन, 90 दिन और 120 दिन बाद खेत में डाले और फसल पर मिटटी चढाए। जस्ते की कमी होने पर बुवाई के साथ 25 कि.ग्रा. जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर अवष्य डाले।

गन्‍ने में सिंचाई :

गन्ने फसल को अधिक पानी की आवष्यकता होती है। फसल जमाव, कल्ले निकलने और बढवार के समय भूमि में पर्याप्त नमी होना आवष्यक है। खेत को छोटी-छोटी क्यारियों में बॉटकर सिचाई करें।

खरपतवार नियंत्रण व निंदाई गुडाई :

नींदा नियंत्रण के लिए 2, 4 डी 2 कि.ग्रा. सोडियम साल्ट या 2, 4 डी इथाइल इस्टर 38 प्रतिषत 1.2-1.4 कि.ग्रा. सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर की दर से बोनी के 30 40 दिन बाद प्रयोग करने पर सभी चौडी पत्तियों वाले नींदा नियंत्रित रहते है।

एट्राजीन 2 कि.ग्रा. सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर की दर से 500-600 ली. पानी में मिलाकर गन्ने के जमाव से पहले, छिडकने से भी खरपतवार नियंत्रित रहते है। गन्ने की फसल में वर्शा से पहले जून-जुलाई में कूडों पर मिटटी चढाए व गन्ने की पत्तियोंको आपस में बॉधना चाहिए।

गन्‍ने की कटाई:

गन्ने की कटाई नवंबर अंत से लेकर मार्च अप्रैल तक जाती है। जब गन्ने के रस मेंचीनी की मात्रा सर्वाधिक हो तब कटाई करें। कटाई जमीन की सतह से करें। जिससे फुटाव अच्छा होता है। कटाई के बाद सिंचाई अवष्य करें।

गन्‍ने की उपज :

उन्नत सस्य क्रियाए अपनाई जाए, तो गन्ने से 80-100 टन प्रति‍ हेक्टेयर तक पैदावार ली जा सकती है। जिन गन्नों में 17-20 प््रातिषत सुक्रोज होता है। उन्हें आदर्ष माना जाता है। 


Authors:

तुलेष कुमार गेंदले

ग्रा.कृ.वि.अ., लोरमी, जिला-मुंगेली, छत्‍ति‍सगढ 

Email: kumar.tulesh2@gmail.com

Keshav Kshirsagar
keshavkshirsagar@gmail.com