30 Sep बिहार में अनानास की विपणन व्यवस्था: चुनौतियाँ और संभावनाएँ
बिहार में अनानास की खेती एक महत्वपूर्ण नकदी फसल है, खासकर किशनगंज जिले में। बिहार में अनानास की खेती किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार जिलों में की जाती है। किशनगंज के पोठिया और ठाकुरगंज प्रखंडों में बड़े पैमाने पर अनानास की खेती की जाती है। यहां अनानास की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी है, यहाँ किसान ‘केव और क्वीन’ किस्म का अनानास उगाते हैं। केव डिब्बाबंदी और क्वीन जूस, जैम आदि के लिए पसंद की जाती है। हिमालय की तलहटी में स्थित किशनगंज जिला अपनी जूट और धान की खेती के लिए प्रसिद्ध है। हाल के वर्षों में, इस जिले के छोटे और सीमांत किसानों ने चाय और अनानास की खेती शुरू की है, जिनकी दिल्ली, लखनऊ, मेरठ, वाराणसी, पश्चिम बंगाल और अन्य बाजारों में काफी मांग है। किशनगंज, पहले जूट और धान के लिए जाना जाता था, लेकिन अब चाय, ड्रैगन फल और अनानास ने इसे नई पहचान दी है। किशनगंज में अनानास की खेती के लिए आदर्श कृषि-जलवायु परिस्थितियाँ (बहुत गहरी, महीन दोमट मिट्टी, गर्म ग्रीष्म, मानसून में भारी बारिश और ठंडी सर्दियाँ) मौजूद हैं। एक अनुमान के अनुसार केवल किशनगंज जिले में 5000 एकड़ से अधिक भूमि पर केव या जायंट केव और क्वीन किस्मों की खेती की जाती है। ड्रैगन फल, चाय और अनानास ने अब किशनगंज जिले को नई पहचान दी है।
बिहार में, अनानास की खेती को किसानों के लिए लाभदायक व्यवसाय बनाने के लिए सरकार द्वारा किसानों को अनुदान भी दिया जाता है। भागलपुर के बिहपुर में पहली बार एक किसान एक हेक्टेयर में अनानास की खेती करेगा। इस के लिए 26 हजार रुपये का अनुदान मिलेगा। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, देसरी वैशाली से 43-45 हजार पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। सुपौल जिले में भी अनानास की खेती शुरू होने की योजना है, जहाँ 27.5 एकड़ जमीन में इसकी खेती की जाएगी जो भविष्य में उत्पादन को बढ़ा सकती है अब तक किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार में अनानास की खेती होती रही है। उद्यान विभाग ने किसान के ऑनलाइन आवेदन के आधार पर यह सुविधा प्रदान की है। बिहार सरकार के अन्य प्रयास में टिशू कल्चर प्रयोगशालाएं (जैसे डॉ. कलाम कृषि कॉलेज में) है जो भविष्य में रोग-मुक्त पौधों से 12 महीने में फल देने की सुविधा देंगी।
खेती का क्षेत्रफल और वार्षिक उत्पादन
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट (2015) के अनुसार, किशनगंज के थाकुरगंज और पोठिया ब्लॉकों में लगभग 5,000 एकड़ भूमि पर अनानास की खेती की जा रही थी। जिला कृषि प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में किशनगंज में मुख्य रूप से ठाकुरगंज और पोठिया में 6000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में किसान अनानास की खेती कर रहे हैं। CEIC डेटा रिपोर्ट (2024) के अनुसार बिहार ने 2024 में कुल 114.176 हज़ार टन अनानास का उत्पादन किया। बताया जाता है कि बिहार के किशनगंज जिले के रायपुर पंचायत (पोठिया ब्लॉक) के पास किशोजरा गाँव में लगभग 65 एकड़ ‘ ’ में अनानास के एक्सपोर्ट गुणवत्ता वाले एमडी टू (MD-2) वैरायटी की खेती होती है। एक शोध पत्र में उल्लेख के अनुसार बिहार में पिछले दो दशकों में अनानास की उत्पादकता में 70.60% की वृद्धि दर्ज की गई है इसलिए बिहार की उत्पादकता (25-35 टन प्रति हेक्टेयर) को भारत के राष्ट्रीय औसत (17-20 टन प्रति हेक्टेयर) से उच्च माना जाता है। किशनगंज में अनानास की खेती करने वाले किसानों में छोटे और सीमांत किसान सक्रिय रूप से शामिल हैं। बिहार में अनानास की खेती की लागत प्रति एकड़ ₹1.30- 1.5 लाख है, प्रति एकड़ औसत उत्पादन: 20-25 टन, बाजार औसत कीमत: ₹25 प्रति किग्रा और शुद्ध आय ₹3-5 लाख तक हो सकती है।
बिहार में अनानास विपणन प्रक्रिया और विपणन चैनल
अनानास विपणन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें अनानास उत्पादक / किसान के खेत से उपभोक्ता की थाली तक पहुंचता है। यह प्रक्रिया न केवल अनानास के कच्चे फल के विपणन तक सीमित है, बल्कि इसमें खेत में उपयोग होने वाली सामग्रियों की आपूर्ति से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक उत्पाद पहुंचाने वाली सभी गतिविधियां और एजेंसियां शामिल हैं। इसमें विपणन चैनल, विज्ञापन, परिवहन, पैकेजिंग, और बिक्री के तरीके भी शामिल हैं। कच्चे अनानास का
विपणन वह प्रक्रिया है जिसमें ताजा अनानास को खेतों से बाजारों, खुदरा विक्रेताओं, या सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाता है। इसमें उत्पादन से बाजार तक आपूर्ति शामिल हैं अनानास को खेतों से स्थानीय बाजारों, सुपरमार्केट्स, या निर्यात के लिए भी एकत्रित किया जाता है।
बिहार में अनानास को खेत से उपभोक्ताओं तक फल पहुँचाने की प्रक्रिया में कई गतिविधियाँ जैसे कटाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, परिवहन और बिक्री शामिल हैं। किशनगंज में अधिकांश अनानास उत्पादक अपनी उपज को खेत पर (फार्मगेट बिक्री) ही बिचौलियों को बेचते हैं। यह प्रथा छोटे और सीमांत किसानों के बीच आम है, जो परिवहन और बाजार पहुंच की कमी के कारण ऐसा करते हैं। अधिकांश किसान अपनी फसल को गांव स्तर पर व्यापार एजेंटों या बाजार में कमीशन एजेंटों के माध्यम से बेचते हैं। यह प्रणाली तेजी से बिक्री तो सुनिश्चित करती है, लेकिन किसानों को कम लाभ मिलता है क्योंकि बिचौलियों का कमीशन और परिवहन लागत इसमें शामिल होती है। किशनगंज के अनानास की विभिन्न बाजारों में उच्च मांग हैं। बिधाननगर, पश्चिम बंगाल खरीदारों और विक्रेताओं के लिए एक प्रमुख केंद्र है। बिहार में अनानास के विपणन चैनल उत्पाद को उत्पादक से उपभोक्ता तक पहुँचाने के विभिन्न मार्ग हैं। ये चैनल लागत, पहुंच और दक्षता को प्रभावित करते हैं। निम्नलिखित प्रमुख विपणन चैनल बिहार में प्रचलित हैं
- उत्पादक → उपभोक्ता: किशनगंज और पूर्णिया के किसान स्थानीय बाजारों, या स्थानीय मेलों, में सीधे उपभोक्ताओं को अनानास बेचते हैं। यह चैनल छोटे किसानों के लिए लाभकारी है, क्योंकि इसमें बिचौलियों की लागत कम होती है। उदाहरण: किशनगंज के पोठिया में किसान स्थानीय हाट बाजारों में अनानास बेचते हैं।
- उत्पादक → थोक व्यापारी → खुदरा विक्रेता → उपभोक्ता: यह बिहार में सबसे आम चैनल है। किसान थोक व्यापारियों को अनानास बेचते हैं, जो इसे सिलीगुड़ी, पटना, दिल्ली, या वाराणसी जैसे बड़े बाजारों में वितरित करते हैं। थोक व्यापारी अनानास को फल दुकानों, सुपरमार्केट या सब्जी मंडियों तक पहुँचाते हैं। इस चैनल में बिचौलियों के कारण किसानों का लाभ मार्जिन कम हो सकता है, लेकिन यह बड़े बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित करता है।
- दोहरी वितरण चैनल (उत्पादक → एक से अधिक चैनल): किसान एक साथ स्थानीय बाजारों, थोक व्यापारियों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से बिक्री करते हैं। यह चैनल जोखिम को कम करता है और विभिन्न बाजार खंडों तक पहुँचने में मदद करता है। उदाहरण: किशनगंज के किसान स्थानीय हाट में बिक्री के साथ-साथ सिलीगुड़ी के थोक व्यापारियों को अनानास भेजते हैं।
प्रमुख विपणन समस्याएँ और चुनौतियाँ
बिहार में अनानास की खेती मुख्य रूप से किशनगंज, पूर्णिया और अररिया जिलों में केंद्रित है, जहाँ किशनगंज अकेले राज्य के कुल उत्पादन में सर्वाधिक योगदान देता है। उत्पादन की प्रचुरता के बावजूद, विपणन की अपर्याप्त व्यवस्था और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण किसानों को उनकी उपज का उचित लाभ नहीं मिल पाता है। प्रमुख चुनौतियाँ निम्नलिखित हैं:
- आधारभूत संरचना और कोल्ड स्टोरेज का अभाव:
अनानास एक नाशी प्रकृति का फल है, जिसे कटाई के 2-3 दिनों के भीतर उपयोग या प्रसंस्कृत करना आवश्यक होता है। किशनगंज (विशेषकर पोठिया और ठाकुरगंज प्रखंड) में उत्पादन अधिक होने के बावजूद, ‘कोल्ड चेन’ या स्थानीय स्तर पर कोल्ड स्टोरेज की भारी कमी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोल्ड स्टोरेज की अनुपलब्धता के कारण राज्य में लगभग 20-30% फल खेत से बाज़ार पहुँचने से पहले ही खराब हो जाते हैं (पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस)। इस के चलते किसान अपनी उपज को औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर होते हैं। उदाहरण: किशनगंज के पोठिया में उत्पादक अक्सर स्थानीय बाजारों में जल्दी बिक्री करने को मजबूर होते हैं, क्योंकि लंबी दूरी के परिवहन के लिए सुविधाएँ सीमित हैं और कोल्ड स्टोरेज की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। - प्रसंस्करण इकाइयों की अनुपस्थिति:
बिहार में अनानास के लिए समर्पित प्रसंस्करण इकाइयों का घोर अभाव है। जबकि अनानास से जूस, जैम, जेली और डिब्बाबंद स्लाइस बनाए जा सकते हैं, किशनगंज में ऐसी कोई बड़ी औद्योगिक इकाई सक्रिय नहीं है। मूल्य संवर्धन न होने के कारण, किसान केवल ताजे फल बेचने पर निर्भर हैं। ‘प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना’ (PMFME) के तहत ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) में अनानास को बढ़ावा देने के प्रयासों के बावजूद, ज़मीनी स्तर पर बड़ी प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना अब भी एक चुनौती बनी हुई है। उदाहरण: किशनगंज में प्रसंस्करण इकाइयों की कमी के कारण अनानास का निर्यात या मूल्यवर्धन सीमित है, जबकि पड़ोसी पश्चिम बंगाल में ऐसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। - बिचौलियों का वर्चस्व और मूल्य निर्धारण:
विपणन श्रृंखला में पारदर्शिता की कमी सबसे बड़ी बाधा है। किशनगंज का अनानास बाज़ार पूरी तरह से सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) के व्यापारियों और स्थानीय आढ़तियों (Commission Agents) द्वारा नियंत्रित होता है। समाचार रिपोर्ट के विश्लेषण के अनुसार, खेत पर किसान को जो कीमत मिलती है और जो कीमत उपभोक्ता दिल्ली या पटना में चुकाता है, उसमें भारी अंतर होता है। लाभ का बड़ा हिस्सा परिवहनकर्ता और बिचौलिए ले जाते हैं, क्योंकि किसानों के पास सीधे बाज़ार तक पहुँचने के लिए ‘कलेक्टिव मार्केटिंग’ या FPO (किसान उत्पादक संगठन) का ढांचा कमज़ोर है। उदाहरण: किशनगंज के अनानास सिलीगुड़ी के थोक व्यापारियों के माध्यम से बिकते हैं, जो किसानों को कम कीमत देते हैं। एक किसान को प्रति किलो 20-25 रुपये मिलते हैं, जबकि उपभोक्ता 50-60 रुपये प्रति किलो चुकाते हैं। - बाज़ार संपर्क और परिवहन समस्याएँ:
बिहार के अनानास उत्पादकों के पास दूरस्थ बाज़ारों (जैसे दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता) तक सीधी पहुँच नहीं है। ग्रामीण सड़कों की स्थिति में सुधार के बावजूद, ‘रेफ्रिजरेटेड वैन’ (Refrigerated Transport) की सुविधा नदारद है। सामान्य ट्रकों में लंबी दूरी के परिवहन के दौरान गर्मी और दबाव से फलों की गुणवत्ता गिर जाती है, जिससे दूसरे राज्यों की मंडियों में बिहार के अनानास को ‘प्रीमियम रेट’ नहीं मिल पाता। किशनगंज रेलवे स्टेशन से रैक लोडिंग की सुविधाओं में भी अनियमितता बनी रहती है। उदाहरण: किशनगंज से दिल्ली या कोलकाता तक परिवहन में 2-3 दिन लग सकते हैं, जिसके दौरान अनानास खराब हो सकता है। - मौसमी मांग और मूल्य में उतार-चढ़ाव:
अनानास की मांग गर्मियों (मार्च-अप्रैल) में जूस और ताजा खपत के लिए बढ़ती है, लेकिन अन्य मौसमों में कीमतें कम हो जाती हैं। किसानों को कम कीमतों पर बिक्री करनी पड़ती है, विशेष रूप से मानसून के बाद, जब आपूर्ति अधिक होती है। उदाहरण: किशनगंज में गर्मियों में अनानास 30-40 रुपये प्रति किलो बिकता है, लेकिन सर्दियों में कीमत 15-20 रुपये तक गिर सकती है। - ब्रांडिंग और विपणन ज्ञान का अभाव:
त्रिपुरा के ‘क्वीन अनानास’ या केरल के ‘वझाकुलम अनानास’ की तरह बिहार के अनानास की कोई विशिष्ट ब्रांडिंग या जीआई टैग (GI Tag) पहचान नहीं है। अधिकांश किसान पारंपरिक तरीकों से बिक्री करते हैं। डिजिटल मार्केटिंग या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म (जैसे e-NAM) से जुड़ाव नगण्य है। बाज़ार आसूचना की कमी के कारण किसान यह नहीं जान पाते कि किस शहर में मांग अधिक है, और वे स्थानीय हाटों में ही माल खपाने को विवश होते हैं। - ऑनलाइन विपणन में सीमित पहुँच:
बिहार के ग्रामीण किसानों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डिजिटल विपणन की जानकारी और संसाधनों की कमी है। शहरी उपभोक्ताओं और प्रीमियम बाजारों तक उनकी पहुँच सीमित रहती है, जो जैविक और उच्च गुणवत्ता वाले अनानास की मांग करते हैं। किशनगंज के किसान स्थानीय हाट बाजारों पर निर्भर रहते हैं, जबकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बेहतर कीमत दे सकते हैं।
बिहार में अनानास विपणन के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
बिहार, विशेष रूप से किशनगंज, में अनानास की खेती में अपार संभावनाएं हैं, लेकिन विपणन प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए बिहार सरकार को ‘क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण’ अपनाना होगा। किशनगंज में एक समर्पित ‘अनानास प्रसंस्करण पार्क’ की स्थापना और किसान उत्पादक संगठनों को सुदृढ़ करके बिचौलियों की भूमिका को कम करना समय की मांग है। बिचौलियों पर निर्भरता कम करना, प्रसंस्करण और परिवहन सुविधाओं में निवेश, जैविक ब्रांडिंग, और डिजिटल मार्केटिंग से किसानों की आय बढ़ सकती है। सरकार और सहकारी समितियों की सक्रिय भागीदारी से अनानास का विपणन अधिक लाभकारी और टिकाऊ बन सकता है। अनानास के विपणन के लिए महत्वपूर्ण बिंदु निम्नलिखित हैं
- बिहार के अनानास की मांग दिल्ली, लखनऊ, मेरठ, वाराणसी और पश्चिम बंगाल जैसे बाजारों में अधिक है।
- बिहार में अनानास की कीमतें मौसम और मांग पर निर्भर करती हैं। गर्मियों (मार्च-अप्रैल) में जूस की मांग बढ़ने से कीमतें अधिक होती हैं।
- किसानों को सीधे बाजारों या उपभोक्ताओं तक पहुंचने के लिए सहकारी समितियों या डिजिटल प्लेटफार्मों का उपयोग करना चाहिए। इससे बिचौलियों का कमीशन कम होगा और लाभ बढ़ेगा।
- किशनगंज में क्लस्टर-आधारित प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना से अनानास को रस, जैम, जेली, और अन्य उत्पादों में परिवर्तित किया जा सकता है और अनानास मूल्य में वृद्धि होगी।
- सोशल मीडिया, स्थानीय मेलों और कृषि प्रदर्शनियों के माध्यम से अनानास के पोषण गुणों (विटामिन C, A, और पोटैशियम) को हाइलाइट करें और उपभोक्ताओं को जानकारी दे।
- अनानास को 10-13°C और 80-90% आर्द्रता पर 15-20 दिन तक भंडारित किया जा सकता है। प्रशीतन सुविधाओं और कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स में निवेश से बाजार पहुंच बढ़ेगी।
- ऑनलाइन प्लेटफार्मों और सोशल मीडिया के माध्यम से अनानास की बिक्री से किसानों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचने में मदद मिलेगी। रेल और सड़क नेटवर्क को मजबूत करने से दिल्ली, लखनऊ और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच आसान होगी।
- यूएई, सऊदी अरब, और नेपाल जैसे देशों में निर्यात बढ़ाने के लिए गुणवत्ता मानकों (जैसे Brix स्तर 12-14) को बनाए रखना और निर्यात प्रक्रियाओं को सरल करना आवश्यक है।
- बिहार उद्यमी योजना के तहत डिजिटल विपणन और ई-कॉमर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करें ताकि किसान डिजिटल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपनी उपज बेच सकें।
- कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और ATMA के माध्यम से किसानों को बाजार की मांग, कीमतों, और निर्यात मानकों की जानकारी प्रदान करें।
निष्कर्ष और सुझाव
बिहार के सीमांचल क्षेत्र, विशेषकर किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार और अररिया में अनानास की खेती केवल एक कृषि गतिविधि नहीं, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ है। पोठिया और ठाकुरगंज के खेतों में उपजा अनानास अपनी विशिष्ट मिठास, सुगंध और जैविक गुणों के कारण ‘ब्रांड बिहार’ का एक सशक्त चेहरा बनने की क्षमता रखता है। हालांकि, अनानास की नाशपाती प्रकृति, बिचौलियों की अधिकता, प्रसंस्करण सुविधाओं की कमी, और स्थानीय बाजारों तक सीमित पहुँच जैसी चुनौतियाँ उत्पादकों की आय को प्रभावित करती हैं। वर्तमान में, उत्पादकों को बिचौलियों की लंबी श्रृंखला और कोल्ड चेन की अनुपस्थिति के कारण अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। किसानों की मांग है कि सरकार इस क्षेत्र में फूड प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने में मदद करे, ताकि वे अपने फलों को सही दाम पर बेच सकें और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके। सरकारी समर्थन, बुनियादी ढांचे का विकास, और आधुनिक विपणन रणनीतियों के माध्यम से उत्पादकों की चुनौतियों को दूर किया जा सकता है। कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण इकाइयों, और डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग से बिहार का अनानास उद्योग न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगा, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएगा। किसान उत्पादक संगठन (FPO) और उत्पादक सहकारी समितियों का गठन करें, जो किसानों को थोक व्यापारियों, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, निर्यातकों और उपभोक्ताओं से भी सीधे जोड़ सकें। PMKSY और BIADA योजनाओं के तहत, किशनगंज में अनानास के लिए समर्पित प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित करें, जो जूस, डिब्बाबंद फल, और जैम जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद बना सकें. जिससे किसान अन्य राज्यों पर निर्भर नहीं रहेंगे।
सहायक सन्दर्भ:
जैन, ए. (2022). किसानों के बीच बढ़ रहा है अनानास की खेती का चलन. कृषि जागरण, जुलाई 25, 2022.
https://hindi.krishijagran.com/farm-activities/pineapple-farming-will-bring-benefits-to-farmers/
हिन्दुस्तान ब्यूरो. (2020). अब किशनगंज में ही अनानास की होगी प्रोसेसिंग, बनेंगे उत्पाद. लाइव हिन्दुस्तान, 2020, अप्रैल 27.
https://www.livehindustan.com/bihar/kosi/story-now-processing-of-pineapple-will-be-done-in-kishanganj-itself-will-be-done-3177759.html
शिवम बाजपेयी, और बीरबल महतो, ठाकुरगंज, किशनगंज (2022) बिहार का अनानास: कहीं फीकी न पड़ जाए किशनगंज के अनानास की मिठास, कब खत्म होगी फूड प्रोसेसिंग प्लांट की तलाश, दैनिक जागरण, बुधवार, 06 जुलाई 2022,
https://www.jagran.com/bihar/bhagalpur-pineapple-of-bihar-the-sweetness-of-kishanganj-pineapple-should-not-fade-away-22867770.html
ईटीवी भारत (2020) किशनगंज: खरीदार के बिना खेतों में पककर खराब हो रहे हैं अनानास, सरकार से आर्थिक मदद की गुहार – farmer upset in Kishanganj, प्रकाशित: 21 मई, 2020,
https://www.etvbharat.com/hindi/bihar/state/kishanganj/pineapple-wasting-in-fields-of-kishanganj/bh20200521115036347
बी. ए. यू. (2017) बिहार में अनानास की खेती, यूट्यूब वीडियो 7 अगस्त 2017 को प्रकाशित और बिहार कृषि विश्वविद्यालय के यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध
https://www.youtube.com/watch?v=GOySiOdwea0&t=28s
ज़ी बिहार झारखंड (2021) अनानास उत्पादन: अनानास ने बढ़ा दी आमदनी | बिहार में अनानास की खेती, 30 अगस्त, 2021 को बिहार कृषि विश्वविद्यालय के यूट्यूब चैनल पर प्रकाशित
https://www.youtube.com/watch?v=vmYzJKL5V-s
नलिनी रंजन और रजत मौर्य (2025) किशनगंज के अनानास से मीठा होगा UAE, एक्सपोर्ट का रोडमैप तैयार; खरीदारों ने दिखाई दिलचस्पी, दैनिक जागरण गुरुवार, 22 मई 2025,
https://www.jagran.com/bihar/patna-city-bihar-pineapple-exports-uae-and-qatar-to-savour-sweetness-23943997.html
लक्ष्मी सुब्रमण्यन (2021) किशनगंज अनानास, सहसा 2021/11/15 को प्रकाशित
https://sahasa.in/2021/11/15/kishanganj-pineapple/
हिंदुस्तान (2020) अब किशनगंज में ही अनानास की होगी प्रोसेसिंग, 26 अप्रैल 2020 को प्रकाशित
https://www.livehindustan.com/bihar/kosi/story-now-processing-of-pineapple-will-be-done-in-kishanganj-itself-will-be-done-3177759.html
गौरव ललित (2024) बिहार के इस जिले में भी होगी अनानास की खेती, नकदी फसल से बढ़ेगी किसानों की आय, हिंदी.न्यूज18, 08 फ़रवरी, 2024 को प्रकाशित
https://hindi.news18.com/news/bihar/supaul-pineapple-cultivation-will-also-take-place-in-this-district-of-bihar-cash-crop-will-increase-the-income-of-farmers-8051846.html
Autor
शोजी लाल बैरवा1, मीरा कुमारी2 और नीतू कुमारी3
सहायक प्राध्यापक सह कनिष्ठ वैज्ञानिक (कृषि अर्थशास्त्र)
डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, अर्राबाड़ी, किशनजगंज, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर