Animal husbandry

पंगेसियस मछली को तालाबों और पिंजरों में पालने की सही विधि पंगेसियस एक अत्यधिक प्रवासी नदी की प्रजाति है, और यह समग्र रूप से कृषि क्षेत्र में सबसे तेजी से बढ़ने वाली मीठे पानी की मछली प्रजातियों में से एक है। यह मछली वियतनाम की मेकांग नदी की मूल निवासी है और पूरे महाद्वीप में एक जलीय कृषि प्रजाति के रूप में पेश की गई है। हाल ही में, कैटफ़िश ने विश्व जलीय कृषि में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभानी शुरू कर दी है। पंगेसियस की खेती दुनिया भर में तेजी से विकसित होने वाले जलीय कृषि प्रकारों में से एक माना जाता है। वैश्विक वार्षिक कैटफ़िश उत्पादन (FAO, 2014) में पंगेसियस का लगभग...

Ocean Farming: Smart and Sustainable agriculture on water bodies कृषि एवं संबंधित उद्योग वैश्विक स्तर पर मौलिक और वास्तविक परिवर्तन के दौर से गुजर रहे हैं। अब समय आ गया है कि हम इस अपरिहार्य परिवर्तन को समझें और कृषि में संरचनात्मक बदलाव की वैश्विक गति को बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। कृषि में इस तरह के परिवर्तन के कारणों पर तीन बिन्दुओं के तहत चर्चा की जा सकती है। सबसे पहले, विश्व में मानव आबादी की निरंतर वृद्धि वास्तव में हमें 2050 (संयुक्त राष्ट्र, 2019) तक 10 बिलियन जनसंख्या तक ले जायेगी और कोविड-19 जैसी महामारी ने पहले ही वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में बहोत बडा व्यवधान पैदा किया...

Nodular skin, Lumpy skin disease in cattle लम्पी स्किन डिजीज (LSD) या गांठदार त्वचा रोग राजस्थान के कई जिलों में फैला हुआ है। यह एक तेजी से फैलने वाली विषाणु जनित बीमारी है। यह बीमारी पशुपालको के आर्थिक नुकसान का प्रमुख कारण है। यह रोग  गाय और भैंसो में मुख्य रूप से देखा गया है। इस रोग में पशु के पूरे शरीर पर गांठे बन जाती है इस लिए इसको गांठदार त्वचा रोग भी कहते है | यह रोग भेड़ व बकरी माता जैसे विषाणु के कारण होता है। यह रोग परजीवी जैसे कीड़े ,मच्छर एवं मक्खियों के काटने से फैलता है। यह रोग संक्रमित पशु के चारे, दाने व घाव से भी...

पशुओं में खुरपका-मुँहपका ( एफ.एम.डी.) रोग  यह रोग एक विषाणु जनित रोग है। इस विषाणु के सात मुख्य प्रकार है। भारत में इस रोग के केवल तीन प्रकार ( ओ, ए, एशिया-1) पाये जाते है। इस रोग को खुरपका व मुंहपका ,मुहाल, एफ. एम .डी. के नाम से भी जाना जाता है। यह रोग गाय ,भैंस, बकरी ,भेड़ में तेजी से फैलने वाला रोग है। यह रोग रोगी पशु के सम्पर्क में आने से फैलता है। यह रोग एक साथ एक से अधिक पशुओं को ग्रसित कर सकता है। यह रोग सभी उम्र के पशुओं में तीव्र गति से फैलता है। पशुओं में इस रोग से मृत्यु दर तो बहुत कम है...

हरित जल जलीयकृषि प्रौद्योगिकी  हरित जल आमतौर पर जलीय कृषि में उपयोग की जाने वाली तकनीक है। मीठे पानी की मछली विश्व जलीय कृषि में अग्रणी क्षेत्र है, जो अन्य क्षेत्रों को बहुत पीछे छोड़ देती हैं। इन मछलियों का उत्पादन बहुत तैयार फीड का उपयोग करती है। दिलचस्प बात यह है कि, हालांकि, प्रमुख पालन मछली प्रजातियों में से कई लगभग प्लवक के लिए बाध्य है और यदि कोई जलीय चारा है तो बहुत कम खपत करते है। नील तिलापिया, रोहू कार्प, बिगहेड कार्प, कैटला और प्रमुख झींगा प्रजातियां जब जलीय चारा उनके लिए उपलब्ध है तो भी अक्सर प्राकृतिक भोजन, इसमें से आधिकांश शैवाल, उनके आहार के एक महत्त्वपूर्ण हिस्से के...

बेहतर उत्त्पादन हेतु बकरी-प्रजनन के तरीके Goat farming is one of the major occupations of rural people in India and plays an important role in the livelihood of small and marginal farmers and landless laborers. In Bihar, goat farming was a traditional occupation of only economically backward classes in the past, but nowadays educated and economically advanced people have come forward in the profession considering it a profitable one. Rearing one or two goats in the backyard generally fetch the farmers significant income more often than not. When rearing goats in few numbers, even the loss, if incurred, will not downsize the farmer’s economic status much. However, vast challenges have been accrued in...

Importance of livestock in the economic development of the country and livestock health challenges  वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रकों की ओर अग्रसरित है, इसके बावूजद पशुपालन, जो कि प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधि है, भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। पशुपालन राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में 5.2 फीसदी की भागीदारी रखता है और 8 करोड़ से अधिक किसानों की आजीविका का साधन है। यद्यपि पशुधन क्षेत्रक के विकास से दूध, अंडे और मांस की प्रति व्यक्ति उपलब्धता में सुधार हुआ है तथापि विकसित देशों की तुलना में प्रति पशु उत्पादकता बहुत कम है। भारत सरकार द्वारा जारी आर्थिक सर्वे (2021-2022) के अनुसार देश में दुग्ध उत्पादन 2014-15...

Destructive Bird Flu big challenge for Poultry बर्ड फ्लू का वायरस पूरी दुनिया में पोल्ट्री व्यवसाय के लिए गले की हड्डी बन गया है, क्योंकि यह ना दिखने वाली बीमारी से लेकर ऐसे घातक लक्षण दिखाने वाली बीमारी करता है जिसमें 100% मृत्यु निश्चित होती है| नुकसान न पहुंचाने वाले वायरस और घातक वायरस के प्रोटीन में सिर्फ एक अमीनो एसिड का ही फर्क होता है, इसीलिए हमें ना सिर्फ इस बात का पता लगाना चाहिए कि कोई भी बर्ड फ्लू का वायरस कितना खतरनाक बीमारी कर रहा है, बल्कि इस बात पर भी नजर करनी चाहिए कि कोई वारस कितना घातक बनने की क्षमता रखता है| यह इसलिए क्योंकि बर्ड फ्लू...