Crop Cultivation

लहसुन की उत्पादन तकनीकी  लहसुन एक दक्षिण यूरोप में उगाई जाने वाली प्रसिद्ध फसल है। लहसुन एक कन्द वाली मसाला फसल है। इसमें एलसिन नामक तत्व पाया जाता है जिसके कारण इसकी एक खास गंध एवं तीखा स्वाद होता है। लहसुन की एक गांठ में कई कलियाँ पाई जाती है जिन्हे अलग करके एवं छीलकर कच्चा एवं पकाकर स्वाद एवं औषधीय तथा मसाला प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जाता है। इसका इस्तेमाल गले तथा पेट सम्बन्धी बीमारियों में होता है। इसमें पाये जाने वाले सल्फर के यौगिक ही इसके तीखेस्वाद और गंध के लिए उत्तरदायी होते हैं। जैसे ऐलसन ए ऐजोइन इत्यादि। इस कहावत के रूप में बहुत आम है "एक सेब...

हरे चारे के लिए मोरिंगा (ड्रमस्टिक) एक स्थायी विकल्प  मोरिंगा एक ऐसा पेड़ है जो हरे चारे की कमी को पूरा करने में अहम योगदान दे सकता है। मोरिंगा को लोकप्रिय रूप से ‘ड्रमस्टिक’ के नाम से जाना जाता है क्योंकि इसकी फलियां ड्रमर द्वारा उपयोग की जाती हैं। इसे हिन्दी में सेहजन/सहजना कहते हैं। इस तेजी से बढ़ने वाले वृक्ष को पूरे उष्णकटिबंधीय इलाके में आसानी से स्थापित होने एवं बहुउद्देश्यीय उपयोग जैसे सब्जी, पशुधन चारा, दवा मूल्य, डाई, जल शुद्धिकरण आदि के कारण उगाया जाता है। मोरिंगा की पत्तियों में बीटा केरोटीन, प्रोटीन, विटामिन सी, केल्शियम, मैग्नीशियम एवं लोहा प्रचूर मात्रा में उपस्थित होता है। चूंकि मोरिंगा प्रोटीन में समृद्ध...

नैपियर बाजरा एवं दलहनी चारा फसलों के अन्तः फसलीकरण से सालभर गुणात्मक हरे चारे का उत्पादन  प्राचीनकाल से ही भारत की ख्याति एक कृषि प्रधान देश के रूप में रही है तथा पशुपालन इसकी उन्नति एवं सफलता में एक अभिन्न घटक के रूप में उभर कर सामने आ रहा है। दुग्ध उत्पादन के स्तर में आज हम 180 मिलियन टन के आंकड़े को पार कर चुके है।  प्रति पशु दूध उत्पादकता के स्तर में आज भी हमारे देश की गणना बहुत निचे के स्तर पर दर्ज की जाती रही है जो हमारे लिए एक महत्वपूर्ण शोध का विषय है तथा हमें इसमें सुधार करने की आवश्यकता है। इस कम उत्पादकता के लिए...

बाकला की उन्नत खेती बाकला (विसिया फाबा, एल) एक अल्प उपयोगी रबी मौसम की दलहनी फसल है जो फेवेसी कुल के अन्तर्गत  आती है। बाकला की खेती मुख्यतः मिश्र, सीरिया, चीन और अमेरिका की जाती है। भारत में इसकी खेती हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखण्ड और छत्तीसगढ़ जाती है। भारतवर्ष में प्रतिदिन  दाल की आवश्यकता प्रति आदमी 200 ग्राम है जबकि दालों की उपलब्धता 42.9 ग्राम प्रति व्यक्ति है। इस प्रकार बहुत सारे भारतीय लोग संतुलित आहार से वंचित रह जाते हैं और प्रोटीन की कुपोषणता का शिकार हो जाते हैं। बाकला  के बीजों को दाल के रूप में प्रयोग किया जाता है इसमें प्रचुर मान्ना में कार्बोहाडड्रेट एवं प्रोटीन पाया...

वेजिटेबल माइक्रोग्रीन्स: भविष्य के लिए एक सुपरफूड The main lifestyle-related issues, such as diseases and nutritional deficiencies, have resulted from the increased quality of living in terms of social, economic, and cultural norms. In the future, a major issue will be the lack of fresh, pesticide-free vegetables. Long food chains that start in far-flung rural regions restrict the availability of products with a limited shelf life and inadequate transportation capacity for urban people. As a consequence, many urban residents live in so-called "food deserts," where they lack easy access to fresh agricultural goods such as fruits and vegetables, as well as a full package of necessary nutrients, and must rely on processed...

ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चारा भंडारण संरचनाऐं   साइलेज और 'हे' बनाने  के अलावा कृषि प्रणालियों में भूसा या पुआल और कड़वी शुष्क पदार्थ का एक प्रमुख स्रोत हैं। ऐसी सामग्री का उचित भंडारण आवश्यक है। इसके  भंडारण  हेतु स्थायी और अस्थायी प्रकारों सहित विभिन्न संरचनाओं का उपयोग किया जाता है। धान के भूसे, गेहूं के भूसा को स्टोर करने के लिए विभिन्न तरीके अपनाये जाते है। धान के भूसे का भंडारण आमतौर पर ढेर के रूप में ऊपरी भूमि पर किया जाता है। ढेर के ऊपरी हिस्से को शंक्वाकार आकार दिया जाता है जो पानी को ढेर में प्रवेश करने से रोकता है । गेहूँ का भूसा उत्तरी भारत में पशुओं...

फल फसलों में रंग विकास: कायिक एवं उद्यानिक परिप्रेक्ष्य Fruit colour is one of the most reliable quality indicators for both eating and marking parameters. Fruit colour pigments are necessary for fruit attractiveness, and they tend to accumulate in the skin during the ripening process. Fruit pericarp colour is a critical quality trait that influences market value and consumer acceptance. Fruit ripening is a complex, irreversible process that involves a succession of physiological, biochemical, and organoleptic changes that result in the production of a soft, edible ripe fruit with ideal quality characteristics. The shift in colour is caused by either the production of plant pigments or the unmasking of previously hidden colour. Chlorophyll,...

मक्का की अनाज तथा चारा फसल उत्पादन की तकनीक  मक्का की खेती भारत में एक व्यापक स्तर पर की जाती है जो विभिन्न कृषि जलवायु के लिये अनुकूलित होती है। इसलिए वैश्विक स्तर  पर इसे  अनाजों की रानी कहा जाता है क्योंकि आनुवंशिक रूप से इसकी अन्य अनाजों की तुलना में अधिक उत्पादन  क्षमता होती है।  मक्का का वानस्पतिक नाम जीया मेज है यह एक प्रमुख अनाज की फसल हैं, जो मोटे अनाजो की श्रेणी में आता है। भारत मे मक्का की खेती सभी राज्यो में की जाती है। जैसे आन्ध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, राजस्थान, उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश इत्यादि।  मक्का भारत में  गेहूं और धान के बाद तीसरी सबसे महत्पूर्ण...