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Spirulina cultivation  for More income in low investment यह वास्तव में एक जलीय सूक्ष्म जीव है जिसे अक्सर कवक परिवार के रूप में जाना जाता है, लेकिन तथ्य की भाति जीवाणु परिवार से संबंधित है।भारत में स्पिरुलिना की खेती विशेष रूप से तमिलनाडु राज्य में सुनिश्चित बाजार और नियमित आय के कारण बहुत तेज गति से बढ़ रही है। स्पिरुलिना एक ऐसा पदार्थ है जिससे दुनिया काफी अनजान है, लेकिन पोषक तत्वों और दवाओं में उपयोग के कारण इसकी खेती में वृद्धि हुई है। स्पिरुलिना अपने बेहतरीन औषधीय गुणों के कारण सुपरफूड और भविष्य के भोजन में से एक के रूप में जाना जाता है। यह प्रोटीन, एंटीऑक्सिडेंट और स्वस्थ जीवन शैली...

फलों की फसल के सुधार में पादप विकास नियामकों की भूमिका Plant growth regulators refer to an organic compound other than nutrients and vitamins which are active at low concentrations in promoting, inhibiting or modifying growth and development. The naturally occurring (endogenous) growth substances are commonly known as plant hormones, while the synthetic ones are called growth regulator. Plant hormone is synthesised in one part of the plant and translocated to another part, where in very low concentrations it causes a physiological response. The plant hormones are identified as promoters (auxins, gibberellin and cytokinin), inhibitors (abscissic acid and ethylene) and other hypothetical growth substance (florigen, flowering hormone, etc). Application of plant growth regulators results...

Monthly agricultural  activities for vegetable availability throughout the year आधुनिक युग में बढ़ते हुए जनसंख्या के पोषण हेतु सब्जी की माँग दिन-प्रति बढ़ती जा रही है अत: किसान भाई प्रति माह में कि जाने वाली कृषि कार्य को अपनाकर अपनी आय कई गुना तक बढ़ा सकते हैं वैसे तो बहुत सी सब्जी फसलों की बुवाई के समय को किसान भाई बाजार की माँग एवं भूमि की उपलब्धता के अनुसार परिवर्तित कर लाभ कमाते है प्रस्तुत कार्यक्रम व्यवसायिक खेती के साथ-साथ गृह उद्यान के लिए भी काफी लाभप्रद है ! प्रति माह में किये जाने वाले कृषि कार्य:- माह सब्जियाँ कृषि कार्य फरवरी आलू खुदाई कद्दू वर्गीय सब्जियाँ बीज की बुवाई भिण्डी, लोबिया, ग्वार एवं अरवी बीज की बुवाई मटर तैयार फलियों की तुड़ाई टमाटर, बैंगन...

Biofortification technology to improve food security and fight malnutrition सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी शरीर को विभिन्न तरीकों से प्रभावित करती है जिसे दूसरे शब्दों में कुपोषण भी कहते हैं।  कुपोषण हमारे दैनिक आहार में पोषक तत्वों की कमी के कारण होता है। दुनिया की लगभग आधी आबादी को अपने आहार में सूक्ष्म पोषक तत्वों, प्रोटीन, विटामिन और अन्य आवश्यक तत्वों की कमी का सामना करना पड़ता है। कुपोषण मानव की क्षमता के विकास में बाधक तो है ही उसके साथ-साथ ये देश में खासकर औरतों एवं बच्चों के आर्थिक एवं सामाजिक विकास को भी रोकता है। मनुष्यों को उनकी सेहत के लिए कम से कम 22 खनिज तत्वों की आवश्यकता होती...

फसल सुधार में पादप आनुवंशिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए पूर्व प्रजनन Plant breeding is an art, science and technology of improving genetic makeup of plants for the benefit of humankind. The genetic diversity of crop plants is the foundation for the sustainable development of new varieties for present and future challenges which arises due to the various biotic and abiotic stresses. Genetic diversity provides an option to farmers and plant breeders to develop new and more productive crops / varieties through selection, hybridization and breeding, that are resistant to virulent pests and diseases and adapted to changing environmental conditions. Pre-breeding is necessary for making the germplasm usable in traditional breeding. It...

Digital technology is the best platform to double farmers' income डिजिटल एग्रीकल्चर यानि फसलों की पैदावार बढ़ाने और खेती को सक्षम व लाभदायक बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों और सेवाओं का इस्तेमाल करना। किसान अब खेती से जुड़ी अपनी समस्याओं से निपटने, नई कृषि विधियां सीखने और दुनिया भर में हो रहे कृषि प्रयोगों के बारे में जानने के लिए फेसबुक, व्हॉट्सऐप, यूट्यूब, सीडी जैसे साधनों से जुड़ रहे हैं। खेती को बेहतर बनाने में सूचना प्रोद्योगिकी से जुड़े ये प्लेटफॉर्म काफी काम आ रहे हैं। कृषि संबंधी पोर्टल या वेबसाइट, स्मार्टफोन एप्लिकेशन, डिजिटल उपकरण, टेलीविज़न आदि सभी डिजिटल प्रौद्योगिकी का कृषि में अनुप्रयोग बढ़ता जा रहा है। विभिन्न सूचना प्रणाालियों का...

रासायनिक उत्परिवर्तन द्वारा प्लांट ब्रीडिंग में टीलिंग और इको- टिलिंग की भूमिका TILLING (Targeting Induced Local Lesions in Genomes) is a method in molecular biology that allows directed identification of mutations in a specific gene or allele. TILLING was introduced in (McCallum et al. 2000) by using the model plant Arabidopsis thaliana. TILLING has since been used as a reverse genetics method in other organisms such as zebrafish, corn, wheat, rice, soybean, tomato and lettuce. TILLING is a general reverse genetic technique that combines chemical mutagenesis with PCR based screening to identify point mutations in regions of interest. TILLING is a powerful technology that employed heteroduplex analysis to detect which organism in a population carry single nucleotide mutation in specific genes. McCallum utilized reverse genetic approaches such as  T-DNA lines...

ड्रिप सिंचाई प्रणाली के लिए एसिड ट्रीटमेंट Drip irrigation systems are prone to clogging or blockagedue to improper maintenance, There are Several factors that are responsible for the clogging of drip irrigation system, They include Presence of Microorganisms in the system(Bacterial slime, Algal growth). Presence of Large Particles and the suspended particles (Clay and silt) in the water source, which enter and Block the Drip system. Presence of Certain dissolved salts (Carbonates and Bicarbonates, Calcium and Magnesium, iron) where they precipitate and form deposits within the lateral pipes but some times they also lead to the blockage of the emitters. Filtration of the water through the Primary (Sand Filter (open water source) and Screen Filter...