Agriculture Knowledge for Everyone

Miscellaneous

Opuntia an alternate green fodder for arid and semiarid areas पशुपालन व्यवसाय में पशुओं के श्रण पोषण में हरे चारे का महत्वपूर्ण स्थान है। परन्तु घटते जोत आकार के कारण पशु पालकों को अपने पशुओं को वर्ष पर्यन्त हरा चारा उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है।  ऐसी परीस्थिति में कांटा रहित नागफनी ‘अपुन्सिया’ (Opuntia) का उपयोंग पशुओं केे खाने में हरे चारे के रूप मेंं कि‍या  जा सकता है। खासकर देश के शुष्क व अर्धशुष्क क्षेत्रों में, नागफनी का उत्पादन एवं पशु चारे उपयोग करके, हरे चारे की कमी एवं अभाव के दिनों में, पशुओं को समुचित पौष्टिक हरा चारा उपलब्ध कराया जा सकता है। नागफनी के लिऐ खेत का चयन नागफनी को उस स्थान, प्रक्षेत्र या खेत में उगाना चाहिऐ जहाँ आमतौर से अनाज या चारा फसलों को उगाना सम्भव न हो। इसे या तो मेड़ों के किनारे बाड़ के रूप में उगाना चाहिए या कंकडीली पथरीली जगहों पर उगाना चाहिऐ। उपरोक्त क्षेत्रों के चयन से जहाँ एक ओर बाड़ से खेत को छुट्टा पशुओं से सुरक्षा मिलेगी वहीं दूसरी ओर नागफनी उगाने के लिऐ अतिरिक्त भूमी की आवश्यकता नहीं होगी। नागफनी का खेत मेड़ों के किनारे बाड़ के रूप में नागफनी नागफनी की बुवाई का समय व विधि आमतौर से नागफनी की बुवाई वर्षा ऋतु के प्रारम्भ में की जाती है। इस मौसम में जड़ों का विकास जल्दी...

Improve environment with the help of micro-organisms. पर्यावरण शब्द संस्कृत भाषा के “परि” उपसर्ग (चारो ओर) और “आवरण” से मिलकर बना है जिसका अर्थ है ऐसी चीजो का समुच्चय जो किसी वयक्ति या जीव धारी को चारो ओर से आव्रत किये हुए है । पर्यावरण का सीधा सम्बन्ध प्रक्रति से है । अपने परिवेश में हम तरह तरह के जीव जंतु, पेड़- पौधे तथा अन्ये सजीव- निर्जीव वस्तुएँ पाते है । ये सुब मिलकर पर्यावरण की रचना करते है । मानव हस्तक्षेप के आधार पर पर्यावरण को दो भागो में विभाजित किया जाता है ,  प्राक्रतिक पर्यावरण और मानव निर्मित पर्यावरण । हालांकि पूर्ण रूप से प्राक्रतिक पर्यावरण (जिसमे मानव है हस्तक्षेप बिलकुल न हो ) या पूर्ण निर्मित पर्यावरण (जिसमे सब कुछ मानव निर्मित हो ) कही नही पाए जाते है। यह विभाजन प्राक्रतिक परिक्रियाओ और दशाओ में मानव हस्तक्षेप की मात्रा कि अधिकता और न्यूनता का द्योतक मात्र है। तकनीक, यानि‍ मानव द्वारा आर्थिक उद्देशय और जीवन में विलासिता के लक्ष्यों के प्राप्ति हेतु प्रक्रति के साथ छेड़ छाड़ के क्रियाकल्प, ने प्राक्रतिक पर्यावरण का संतुलन नष्ट किया है ,जिससे प्राक्रतिक व्यवस्था खराब हो गई है । इस तरह कि समस्या परयवर्णीय अवनदन कहलाती है । पर्यावरण प्रदूषण प्रदूषण का अर्थ है वातावरण में दूशकों का घुलना, चाहे उनका जो भी पूर्व-निर्धारित या परस्पर सहमत...

Gum karaya, a non timber forest produce भारतीय उपमहाद्वीप जैविक विविधता और वनस्पतियों का प्रमुख केंद्र है। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक जीवन में कई वन उत्पादों का महत्वपूर्ण स्‍थान है। ये वन उत्पाद काष्ठ और अकाष्ठ वन उत्पादन में वर्गीकृत है। अकाष्‍ठ उत्‍पादों में विभिन्न पेड़ाेें की जड़, तने और फल से प्राप्‍त प्राकृतिक रेजिन, गोंद, रिसाव, पत्तिया (तेंदू),  गंध-द्रव्य, तेल शामिल हैं । अकाष्‍ठ उत्‍पाद मसाले, दवाइयों, रंजक और टैनिन की प्राकृतिक स्रोत हैं। ज्यादातर अकाष्ठ वन उत्पादन निर्यात मुद्रा अर्जक हैं और कई स्थानीय लघु उद्योगों के लिए अच्छी तरह से अनुकूल हैं भारत में लाख और गम के उत्पादन वाले पेड़ों की संख्या अधिकता में हैं जिससे रेजिन और गम का रिसाव होता हैं। कराया गम एक गैर-लकड़ी के वन उत्पाद है। कराया गम की स्टेरिकुलिया प्रजातियों के पेड़ों से प्राप्त सूखे पीब है। कराया गोंद और कराया वृक्ष कराया गोंद का स्थानीय नामः - कुल्लू, कडाया, कडु, गलगला, गेंदूली, तापसी, पानरख, कंडोल के सलाद, गम कराया, एस यूरें और एस विलोसा का सूखा पीब है। यह इंडोनेशिया में एस यूरसीलाटा और एस फॉइडाडा , अफ्रीका में एसटीगेरा और ऑस्ट्रेलिया में एस कौदाटा से भी एकत्र किया गया है। यहांं भी इसे भारतीय ट्रेगैंटल नाम से जाना जाता है।              विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग काराया गम के...

Trimble Agriculture’s GreenSeeker® handheld crop sensor, available across India, is an easy-to-use handheld measurement device designed to assess the health of a crop. Readings taken with the device can be used to make objective decisions regarding the amount of fertilizer to be applied to a crop, resulting in a more efficient use of inputs. Farmers or any other operator just need to position the handheld sensor over a plant, pull the trigger, and the GreenSeeker handheld instantly calculates the Normalized Difference Vegetation Index (NDVI), which represents the health of the plant. By gathering several readings from plants throughout a field, farmers can better determine the overall health and needs of a crop. This can result in a more efficient use of fertilizer, which benefits both the farmer's bottom line and the environment. Rajan Aiyer, MD, India and SAARC region for Trimble said, “GreenSeeker Handheld is a powerful yet affordable device that can help boost crop yields for Indian farmers while still reducing their overall fertilizer usage. As the global leader in Precision Agriculture technologies; we are thrilled to bring GreenSeeker to India; for we believe technology can play a key role in boosting India’s agriculture productivity and farmers’ incomes.” The GreenSeeker handheld provides farmers, agriculture researchers and scientists with an affordable way to...

Major agricultural activities in fruit crops in July जुलाई का महीना फल वाली फसलों व अन्य फसलों के लिए महत्वपूर्ण महीनों में से एक है क्योकि, जुलाई का महीना जिसे आषाढ़-श्रावण भी कहते है। एक लम्बी गर्मी या सूखे मौसम के पश्चात तपती हुई धरती को ठंडा करने के लिए मानसून लेकर आता है व पेड़-पौधों को प्रकृति के आशीर्वाद स्वरुप वर्षा जल की प्राप्ति होती है। वर्षा के पश्चात सारा खेत-खलिहान हरियाली से भर उठता है। फल वाली फसलों में अनेक कृषि कार्य जुलाई के महीने में किये जाते है, जैसे- अनेक फल पौधों की रोपाई, बीजू पौधों के बीज की बुवाई, जल निकास की व्यवस्था, उर्वरक प्रबंध, खरपतवार नियंत्रण, अंतर्वर्ती फसलों की बुवाई, फल पौधों में कटिंग, बडिंग, कलम बांधने का काम, बरसात के मौसम में लगने वाले कीट व रोगो का नियंत्रण आदि कार्य किये जाते है, जिनका विवरण इस प्रकार से है- फल पौधों की रोपाई फल पौधों के नये बाग़ लगाने के लिए उचित दूरी पर उचित आकर के गड्ढे मई-जून के महीने में खोद लिए जाते हैं। इनमें बरसात के ठीक पहले दीमक के प्रकोप से बचने हेतु प्रत्येक गड्ढे में 200 ग्राम क्लोरवीर की धुल डालें। जो फल पौधे कलिकायन द्वारा तैयार किये जाते हैं वे लगभग एक साल में रोपाई योग्य हो जाते हैं। पौधे लगाने के...

Livestock insurance scheme पशुधन बीमा योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना है जो 10वीं पंचवर्षीय योजना के वर्ष 2005-06 तथा 2006-07 और 11वीं पंचवर्षीय योजना के वर्ष 2007-08 में प्रयोग के तौर पर, देश के 100 चयनित जिलों में क्रियान्वित की गई थी। यह योजना देश के 300 चयनित जिलों में नियमित रूप से चलाया जा रहा है। पशुधन बीमा योजना की शुरुआत दो उद्देश्यों के लि‍ए कि‍या गया है। 1. किसानों तथा पशुपालकों को, पशुओं की मृत्यु के कारण हुए नुकसान से, सुरक्षा मुहैया करवाने हेतु तथा 2. पशुधन तथा उनके उत्पादों के गुणवत्तापूर्ण विकास के चरम लक्ष्य के साथ लोकप्रिय बनाना । योजना के अंतर्गत देशी व संकर दुधारू मवेशियों और भैंसों का बीमा उनके अधिकतम वर्तमान बाजार मूल्य पर किया जाता है। बीमा का प्रीमियम 50 प्रतिशत तक अनुदानित होता है। अनुदान की पूरी लागत केंद्र सरकार द्वारा वहन की जाती है। अनुदान का लाभ अधिकतम दो पशु प्रति लाभार्थी को अधिकतम तीन साल की एक पॉलिसी के लिए मिलता है। यह योजना गोवा को छोड़कर सभी राज्यों में संबंधित राज्य पशुधन विकास बोर्ड द्वारा क्रियान्वित की जा रही है। योजना में शामिल पशु तथा लाभार्थियों का चयन देशी संकर दुधारू मवेशी और भैंस योजना की परिधि के अंतर्गत आएंगे। दुधारू पशु भैंस में दूध देनेवाले और नहीं देनेवाले के अलावा वैसे गर्भवती मवेशी, जिन्होंने कम...

Pesticides and Insecticides scenario in India भारत में सत्तर के दशक में हरित क्रांती के पश्चात सघन खेती का दौर शुरू हुआ जिसने फसलो की संकर किस्मो की बुआई की जाने लगी। इन संकर किस्मो मेंं कीट तथा रोगो के प्रति सहिष्णुता कम होने से इन पर कीट तथा रोगो का असर ज्यादा होता है अतः इन पर कीटनाशी तथा रोगनाशी दवाओ का ज्यादा बार छिडकाव करना पडता है तथा ज्यादा बार इस्तेमाल करना पडता है । इसके अलावा कीटो  में कीट नाशियो  के प्रति प्रतिबंधक शक्ती निर्माण होती है। इसलि‍ए फसलो पर हर बार नयी कीटनाशी तथा रोगनाशी दवाओ का ज्यादा बार छिडकाव करना पडता है तथा ज्यादा बार इस्तेमाल करना पडता है।   भारत में कीटनाशी दवाओ का उत्पादन १३९ ०००  मेट्रिक टन प्रति वर्ष है जिसने से २१९ मेट्रिक टन  कीटनाशी दवाये तकनिकी ग्रेड कि है ,जब कि आज बाजार में ४००० दवाये उपलब्ध है। भारत में कीटनाशी दवाओ का इस्तेमाल ४१.८३३ मेट्रिक टन है ।  भारत में निर्मित कुल कीटनाशी तथा रोगनाशी दवाओ का ५० प्रतिशत हिस्सा देश में ही इस्तेमाल होता है तथा बाकी निर्यात होता है। टाटा स्ट्रॅटेजी नामक संस्था द्वारा किये गये एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत मे निर्मित कुल दवाओ मे से ६० प्रतिशत  कीटनाशी दवाये है , फफूंदनाशी दवाये १८ प्रतिशत , खरपतवार दवाये १६ प्रतिशत...

स्वास्थ्य वर्धक, पोषण से भरपूर सब्‍जी - ब्रोकली Brassica vegetables (Broccoli, Brussels sprouts, cabbage, cauliflower, collards, kale, mustard, rape, etc.)  have received a great deal of attention in the past 5–10 years as consumers have developed an increases awareness of the nutritional content of foodstuffs in their diet.  Brassicaceae family (Cruciferae) includes vegetables that are commonly grown and include broccoli, Brussels sprouts, cabbage, collards, kale, mustard, rape, etc. Broccoli (Brassica oleracea var. italica) is an important cole crop. The majority of Brassica vegetables are purchased and consumed as fresh vegetables, mostly following cooking. The time and methods of cooking have a considerable influence on nutrient availability and content. Since ancient period the mankind made medicines from the extracts of natural materials and has been used for various purposes. Nutritional value of Broccoli is given in Table1. Table 1:  Nutritional value of Broccoli (Brassica oleracea var. italica), fresh, raw, Nutrition value per 100 g.  Principle Nutrient Value Percentage of RDA Energy 34 Kcal 1.5% Carbohydrates 6.64 g 5% Protein 2.82 g 5% Total Fat 0.37 g 1% Cholesterol 0    mg 0% Dietary Fiber 2.60 g 7% Vitamins     Folates 63 µg 16% Niacin 0.639 mg 4% Pantothenic acid 0.573 mg 12% Pyridoxine 0.175 mg 13% Riboflavin 0.117 mg 9% Thiamin 0.071 mg 6% Vitamin A 623 IU 21% Vitamin C 89.2 mg 149% Vitamin E 0.17 mg 1.5% Vitamin K 101.6 µg 85% Electrolytes     Sodium 33 mg 2% Potassium 316 mg 7% Minerals     Calcium 47 mg 5% Copper 0.049 mg 5.5% Iron 0.73 mg 9% Magnesium 21 mg 5% Manganese 0.210 mg 9% Selenium 2.5 µg 5% Zinc 0.41 mg 4% Phyto-nutrients     Carotene-ß 361 µg -- Crypto-xanthin-ß 1 µg -- Lutein-zeaxanthin 1403 µg -- (Source: USDA National Nutrient data base) Health-promoting compounds of Brassica vegetables Epidemiological studies have shown that increased consumption of vegetables and fruits is associated with a lower risk...