Agriculture Knowledge for Everyone

Miscellaneous

स्वास्थ्य और स्वाद से भरपूर मशरूम के मूल्य संवर्धित उत्पाद Mushrooms are an edible fungus typically grown above the soil. Mushrooms grow at temperatures ranging 15 - 23 0c. There are different types of mushrooms like milky mushrooms, White button mushroom, Crimino Mushroom, Portabello Mushroom, Shiitake Mushroom, Maitake Mushroom, Oyster Mushroom, Enoki Mushroom, Beech Mushroom, Black Trumpet Mushroom, King Trumpet Mushroom, Chanterelle Mushroom, Hedgehog Mushroom, Morel Mushroom, Porcino Mushroom. The three majorly grown mushrooms in India are button mushrooms, milky mushrooms, oyster mushrooms. Mushrooms are nutritious, medicinal and functional food. It is considered as a health food as it contains low calories, high protein, dietary fiber, vitamins, and minerals (Barros et al., 2008). Mushrooms are nutritionally desirable because of their low energy value, fiber content, and high antioxidant capacity (Kalac, 2013). According to reports of Cheung 2010 different species of mushroom contains different amount of carbohydrates which usually ranges between 35- 70%, including digestible and non-digestible carbohydrates. The protein content ranges from 1.6 -2.1 g/100g (Mattila et al., 2002). According to Sadler (2003), mushrooms are a good source of insoluble fiber in the form of chitin (polymer of N-acetyl-glucosamine) and non-starch polysaccharides like β-glucans. Mainly mushrooms are low in fat and a good source of unsaturated fatty acids, 75% (w/w) of the total fatty...

FPO A boon for farm women empowerment and livelihood security भारतीय कृषि में महिलाओं का योगदान सर्वविदित है | एक आंकलन के अनुसार आर्थिक रूप से सक्रिय महिलाओं में से  80 प्रतिशत महिलाओं की जीविका कृषि सम्बन्धी गतिविधि पर निर्भर करती है | हाल में ही, (मई, 2020) फिक्की लेडीज ऑर्गनाइज़ेशन ने देश में महिलाओं के कृषि में योगदान के समीक्षा कर उनके सशक्तिकरण के लिए महिलाओं आधारित कृषक उत्पादन संघ की वकालत की है | उनके अनुसार यह महिलाओं को  वाजिब हक तथा मान्यता प्रदान करने में मददगार होगी | देश के बहुसंख्यक कृषक (लगभग 86%) लघु एवं सीमांत श्रेणी के अंतर्गत आते हैं, जिनके पास औसतन 1.10 हैo से कम जोत है | आने वाले वर्षों में सामाजिक व्यवस्था के कारण इनके संख्या में वृद्धि होने के कारण तथा भूमि की जोत घटना अवश्यसंभावी है | इन श्रेणी के कृषक परिवारों  को खेती के समय होने वाले चुनौतियों जैसे तकनीक, उच्च गुणवत्ता के बीज, उर्वरक, रसायन, कीटनाशक और समुचित वित्त की समस्याओं के कारण जीवन निर्वाह और भी चुनौती पूर्ण होगा | इस का असर परिवार के पुरुष एवं महिला  सदस्य पर पड़ना लाजिमी है | वर्तमान सामाजिक परिवेश में महिला कृषकों  की आर्थिक स्वतन्त्रता लगभग न के बराबर है, तथा वे आर्थिक आवश्यकताओं के पूर्ति हेतु पूर्ण रूप से घर के...

Problems, Solutions and Prospects of Sugar Industry in Bihar State गन्ना बिहार की एक महत्वपूर्ण नगदी औद्योगिक फसल है  । राज्य में 28 चीनी मिलें हैं जिसमें 11 कार्यरत है और 17 (सतरह) बंद हो चुके है। चीनी मिल मुख्यतः उत्तरी बिहार के पश्चिमी एवं पूर्वी चम्पारण, गोपालगंज, सितामढ़ी तथा समस्तीपुर जिलों में स्थित है।  इनके अलावा बिहार के भागलपुर तथा साहेबगंज क्षेत्र में 11 गुड़ के मिलें है तथा विभिन्न भागों में खाँडसारी का भी उत्पादन होता है। राज्य बँटवारे के बाद गन्ना आधारित अद्योग ही सबसे बड़ा उद्योग बन गया है। गन्ना उत्पादन पर ही चीनी उद्योग के साथ-साथ गुड़, खंडसारी, कागज, इथेनॅाल, पशु आहार एवं विद्युत-ऊर्जा, कार्बनिक खाद जैसे कई अन्य उद्योग निर्भर करते है।  चीनी उद्योग एक सामयिक उद्योग है जिनमें साल में करीब 145 दिनों तक काम होता है एवं राज्य में ईख उत्पादकों की संख्या 5 लाख के करीब है। चीनी उद्योग प्रारम्भ में बिहार, उत्तर प्रदेश और अन्य उत्तरांचलों में केन्द्रित था। 1963-73 ई0 में 85 प्रतिशत चीनी का उत्पादन बिहार तथा उत्तर प्रदेश में होता था। उत्तरांचलों में ईख का पर्याप्त उत्पादन होने तथा पँूजी और उद्यम सुलभ रहने के कारण इन राज्यों में चीनी उद्योग का विकास हुआ। दक्षिण भारत के चीनी कारखानों, उत्तर भारत के कारखानों की अपेक्षा अधिक कार्यकुशल है जिनसे उनका...

सोमाक्लोनल वेरिएशन: फसल सुधार के लिए एक तकनीक Plant tissue culture procedures give a substitute strategy for vegetative propagation of horticultural crops. Clonal propagation through tissue culture (popularly known as micro propagation) can be acknowledged generally quickly inside a little space. The consistency of individual plants inside a clone population is a significant bit of choice of clonal cultivars in business creation. However, genetic variations do happen in undifferentiated cells, detached protoplasts, calli, tissues and morphological qualities of in vitro raised plants. In 1981, Larkin and Scowcroft begat an overall term ''somaclonal variation'' for plant variations got from any type of cell or tissue cultures. Somac1onal variation has been used in an enormous number of plant species such as potato, sugarcane, tobacco, tomato, wheat, rice, brassica and others for different agronomic qualities, for example, disease resistance, plant height, tiller number, maturity and for different physiological and biochemical characteristics. A few valuable somac1onal variations have been gotten and some of them have been released as cultivars (Hare et al. 2016). Somaclonal variation along these lines seems, by all accounts, to be a significant source of genetic fluctuation. Tissue culture-determined plants show variation which is similar to mutations in tissues and cultured cells. It has been discussed whether somaclonal variation is the consequence of previous genetic contrasts...

Miscellaneous uses of neem in farming भारत भूमि में पैदा होने वाले लोक मंगलकारी एवं सर्व व्याधि निवारक बहु-उपयोगी वृक्ष नीम भारत की ग्रामीण सभ्यता एवं संस्कृति की पहचान बन चुका है। नीम ग्रमीण समाज में इस कदर रच बस गया है कि इसके बगैर हमारे नित्य प्रतिदिन के कार्य करना भी कल्पना के बाहर हैं। नीम 40 से 50 फुट ऊँचा शीतल वृक्ष है। नीम की छाल स्थूल, खुरदरी तथा तिरछी लम्बी धारियों युक्त होती है। नीम की छाल बाहर से भूरी परंतु अंदर से लाल रंग की होतीहै। इसमें बसंत ऋतु में सफेद छोटे-छोटे फूल मंजरी गुच्छों के रूप में खिलते हैं। नीम के फल 1.5 से 1.7 सेमी लम्बे, गोल-अण्डाकार होते हैं। पतझड़ में पत्तियाँ गिर जाती हैं। बसंत में ताम्रलोहित पल्लव निकलते हैं। नीम के फल ग्रीष्म ऋतु के अंत में वर्षा ऋतु के प्रारम्भ में पकते हैं। नीम के घटक सामान्यतया एक पूर्ण विकसित नीम से 37 से 100 किग्रातक बीज प्राप्त हो जाता है। नीम के 100 किग्रा पके फल में त्वचा 23.8 प्रतिशत, गूदा 47.5 प्रतिशत होता है। तथा गिरी से 45 प्रतिशत तेल और 55 प्रतिशत खली प्राप्त होती है। नीम में एजाडिरैक्टीन नामक रसायन पाया जाता है। इस रसायन में कीटनाशक व कवकनाशक गुण होते हैं। इसी का प्रयोग करके बाज़ार में अनेक कीटनाशी दवाईयाँ उपलब्ध हैं।...

Motivating and Attracting Youth in Agriculture Entrepreneurship भारत मे 25 वर्ष से कम आयु के युवाओं की जनसंख्या लगभग पचास प्रतिशत है और 15 से 29 वर्ष के युवाओं का भारत के सकल राष्ट्रीय आय (GNI) में योगदान लगभग 34% है। कृषि गतिविधियों में उनकी भागीदारी और भी बढ़ाने और रचनात्मक रूप से उन्हें संलग्न करके इस समूह के योगदान को और अधिक बढ़ाने की एक बड़ी क्षमता मौजूद है । भारत सरकार ने इस महत्वपूर्ण समूह पर ध्यान दिया है, जिसे राष्ट्र निर्माण में लगाया जा सकता है, यदि वे कौशल प्रशिक्षण पाकर और कौशल उन्मुख नौकरियों में संलग्न हो सकें। ICAR ने 2015-16 में युवाओं को आकर्षित करने और कृषि में बने रहने के लिये ARYA कार्यक्रम शुरू किया है। इसके अलावा, हाल ही में एक कार्यक्रम, मोटिवेटिंग एंड अट्रैक्टिंग यूथ टू एग्रीकल्चर (MAYA) लॉन्च किया गया है। आईवीआरआई ने 2017-18 के दौरान ग्रामीण युवाओं के बीच कृषि व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए एक युवा सलाह कार्यक्रम भी डिजाइन और कार्यान्वयन किया । उद्यमशीलता से जुड़ाव के लिए युवाओं को प्रेरित करने के लिए इन पहलों को मजबूत करने की आवश्यकता है । यह नौकरियों के लिए भटकने के बजाय कृषि व्यवसाय चलाने में उनकी भागीदारी को बढ़ावा देगा जो देश में विशाल युवा आबादी को अवशोषित करने में मदद करेगा । उद्यमिता...

Prime Minister Crop Insurance Scheme - Brief Description प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना भारत सरकार ने किसानों की हो रही फसल की बर्बादी की पूर्ति के लिए और फसल बर्बादी की वजह से किसानों के द्वारा हो रही आत्महत्या को रोकने के लिए लागू किया गया। सन 1965 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने देश को ‘‘जय जवान जय किसान‘‘ नारा दिया था  परन्‍तू इतना समय बीत जाने के बावजूद आज भी कि‍सानो की हालत बहुत अच्‍छी नही है। इसका एक प्रमुख कारण खेती मे मौसम संबधि‍त जोखि‍म तथा खेती का अनिश्चितताओं से भरा होना है। कभी सूखा , कभी बाढ तो कभी बीमारी या टि‍ड्डी प्रकोप जैसी अनेक अनिश्चितताऐ कि‍सान की आय को लगातार प्रभावि‍त करती है ।  प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्या है ? प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना भारत सरकार द्वारा किसानों के फसलों की रक्षा के लिए चलाई जा रही है इस योजना के अंतर्गत कृषक समाज के लोग अपनी फसल का बीमा सस्ते दरों में करा सकते हैं। इस योजना को सफल बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों अपना योगदान देती है।अर्थात बजट का हिस्सा भारत सरकार और राज्य सरकार दोनों वहन करती है। किसानों द्वारा इस योजना के अंतर्गत फसल का बीमा कराने पर बीमा की भुगतान की जिम्मेदारी कृषि बीमा कंपनी के कंधों पर...

Lac production in India - brief introduction भारत में फसलों की खेती के साथ-साथ कीटों का पालन भी बडे पैमाने पर कि‍या जाता है। कीटों की खेती में मुख्यतः मधुमक्खी पालन, रेशम कीट पालन और लाख कीटों की खेती प्रमुख  है। लाख कीट का पालन थोड़ा तकनीकी ज्ञान के साथ सीमित समय में आसानी से कि‍या जा सकता है। लाख शब्द संस्कृत के शब्द ‘‘ लाक्षा ’से व्युतपन हुआ  है जिसका अर्थ है  सौ हज़ार और इसके उत्पादन में बड़ी संख्या में कीड़े शामिल होते हैं। वैदिक कल से लाख कीट और उसके मेजबान पौधे का वर्णन- बटिया मोनोस्पर्म (लाक्षारु) अथर्ववेद में दर्ज है। महाभारत में यह भी उल्लेख किया गया है कि कौरवों ने लाक्षागृह को आग लगाकर  पांडवों को शारीरिक रूप से खत्म करने के मकसद से अत्यधिक ज्वलनशील लाखगृह  (लाख  घर) का निर्माण किया था। कच्चे लाख उत्पादन की स्थिति : भारत 20,000 लाख टन  के वार्षिक उत्पादन के साथ, कच्चे लाख के उत्पादन के मामले में दुनिया भर में अग्रणी लाख उत्पादक है। दुनिया के कुल उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत भारत में है और इसका 75 प्रतिशत मुख्य रूप से संसाधित और अर्ध-संसाधित रूपों में सौ से अधिक देशों को निर्यात किया जाता है। भारत के बाद, थाईलैंड में लाख का उत्पादन अधिक होता है। इनके साथ-साथ इंडोनेशिया, चीन, म्यांमार, फिलीपींस, वियतनाम और कंबोडिया...