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The use of plant regulators in gardening   बागवानी में हार्मोन्स (पादप नियंत्रकों) का बहुत महत्व है ! फल वृक्षों में कई बार विकास की वृद्धि दर रुकने, फल एवं फूल झड़ने एवं वृद्धि कम होने की समस्या आ जाती है ! ऐसी स्थिति में कृत्रिम हार्मोन्स का उपयोग लाभकारी सिद्ध होता है ! पादप नियंत्रक पौषक तत्व न होकर कार्बनिक रसायन होते हैं जिनकी थोड़ी सी मात्रा ही पौधों की क्रियात्मक वृद्धि के लिए जिम्मेदार होती है ! हार्मोन्स का उपयोग जड़ों को विकसित करने, कलिकाओं की निष्क्रियता खत्म करने, वृद्धि जनकवृद्धि अवरोधक, पुष्पांकन का नियमितिकरण एवं नियंत्रण, बीजरहित फल प्राप्त करने, फूलों एवं फलों को झड़ने से रोकने, नर-मादा अनुपात नियंत्रण...

Transgenic Crops: Study in context of Pulses दलहनी फसलें अति विशिष्ट होती हैं क्योंकि इनकी जड़ों में पाए जाने वाली ग्रंथिकाओं में वायुमंडलीय नत्रजन के स्थिरीकरण द्वारा मृदा उर्वरता को अक्षुण रखने की विलक्षण क्षमता होती है। दालों का मानव पोषण में, विशेषतौर पर विकासशील देशों में एक महत्वपूर्ण स्थान है। भारत में शाकाहारी जनसंख्या के आहार में प्रोटीन का मुख्य स्त्रोत दालें हैं। प्रोटीन के अतिरिक्त इनमें खनिज लवण तथा विटामिन्स भी पाये जाते हैं।  भारत दालों का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता तथा आयाताक देश है। भारत में दलहनी फसलों के अन्तर्गत  वर्ष 2013-14 में कुल क्षेत्रफल 25.23 मिलियन हेक्टेयर तथा उत्पादकता 19.27 मिलियन टन थी। भारत कुल वैश्विक उत्पादन के 20...

पोर थ्रू निष्कर्षण विधि का उपयोग कर फूलों की फसलों की पीएच और ईसी की माप Providing a proper nutritional program is essential for growing top quality plants. Sampling the root substrate for pH and electrical conductivity (EC) with the PourThru extraction method is a quick and simple. The pour-through method has been shown to be as satisfactory as other more expensive and time consuming methods of measuring EC. Unlike sampling methods that require removal of medium from containers, the pour-through method does not disturb plant roots. The values provide clues about a crop’s performance before deficiency or toxicity symptoms appear. As nurseries implement more environmentally and economically sound growing regimes, the pour-through...

Modern agricultural techniques for higher production and income. भारत में खाद्य समृद्धि के बाबजूद, जनसंख्या वद्धि के कारण देश मे खाद्यान्‍न की कमी लगातार बनी हुई है इसलिए कृषि से जुड़े लोगो का अधिक उपज और समृद्ध खेती की तरफ रुझान आवश्‍सक है ।समृद्ध खेती भूमि की अवस्था, उपलब्ध उपकरण और खेत में पिछले वर्ष लगी फसल पर निर्भर करती है। खेती को लाभदायक बनाने के लिए दो ही उपाय हैं - पहला उत्पादन को बढ़ाएँ और दूसरा लागत को कम करें। कृषि की लागत नियत्रिंत करने के लिए कृषि के मुख्य आदान जैसे - बीज, उर्वरक, पोध संरक्षण रसायन और सिंचाई तंत्र का संतुलित एवं आधुनिक विधियो द्वारा प्रयोग करना चाहिए। कृषि की...

Use of plastic mulch in agriculture कई वर्षो से विभिन्न नई विकसित तकनीको, कृषि क्रियाओं, एवं संसाधनों का उपयोग कर रहा है। देश के कई क्षेत्रों में विषम जलवायु, जल स्त्रोतो की कमी तथा विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं जैसे- पाला, ओला आदि के बावजूद खेती का महत्व बढ़ रहा है। किसान पिछले कई सालो से मृदा में नमी संरक्षण के लिए विभिन्न उपाय जैसे- सुखी पत्ती, फसलों के अवशेष, सुखी राख आदि को प्रयोग में ला रहा है। खरपतवार की वृध्दि को रोकने एवं मृदा तापमान को संयम बनाये रखने में यह विभिन्न तरह के पलवार (मल्च) मृदा में सूक्ष्म जलवायु का निर्माण करते हैं। इस प्रकार पलवार (मल्चींग) संयुक्त रूप से पौधों...

Precautions in using agricultural chemicals आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती के युग में अधिक पैदावार लेने के लिए फसल सुरक्षा अति आवश्‍यक है। कीटनाशी (Insecticide), फफूंदनाशी (Fungicides) एवं अन्य कृषि रसायन जो फसल सुरक्षा में प्रयोग होते हैं, प्राय: बहुत जहरीले व हानिकारक होते हैं। इन रसायनों का प्रयोग करते समय सावधानी रखना भी उतना ही आवष्यक हैं, जितना कि इनसे फसल सुरक्षा व अधिक पैदावार एवं अच्छी गुणवत्ताा वाली फसल लेकर अधिक लाभ उठाना। फसलों की पैदावार में कमी होने के कई कारणो में से कीट व बिमारियाँ मुख्य भूमिका निभाते है। अधिक उत्पादन लेने हेतु बुआई से पूर्व बीजोपचार तथा बुवाई के उपरान्त कीट नियन्त्रण एवं समय-समय पर बीमारियों से बचाव हेतु विभिन्न...

Parthenium histrofors: A Destructive Weed अवांछित पौधे जो बिना बोये ही उग जाते हैं और लाभ की तुलना में ज्यादा हानिकारक होते हैं, खरपतवार कहलाते हैं | खरपतवार प्राचीन काल से ही मनुष्य के लिये समस्या बने हुये हैं, खेतों में उगने पर यह फसल की पैदावार व गुणवता पर विपरीत असर डालते हैं | मनुष्य के स्वास्थ्य पर भी यह बहुत बुरा असर डालते हैं और कई खरपतवारों की वजह से (जैसे गाजर घास) मनुष्य को कई घातक बिमारियों का सामना करना पड़ता हैं | गाजर घास बहुत ही खतरनाक खरपतवार हैं | इसका वैज्ञानिक नाम पारथेनियम हिस्ट्रोफोरस है, इसको कई अन्य नामों से भी जाना जाता हैं जैसे काग्रेंस घास,...

Azolla: An awesome and amazing Plant अजोला  तेजी से बढ़ने वाली एक प्रकार की जलीय फर्न है, जो  पानी की सतह पर तैरती रहती है। धान की फसल में नील हरित काई की तरह अजोला को भी हरी खाद के रूप में उगाया जाता है और कई बार यह खेत में प्राकर्तिक रूप से भी उग जाता है। इस हरी खाद से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और उत्पादन में भी आशातीत बढ़ोत्तरी होती है।   एजोला की सतह पर नील हरित शैवाल सहजैविक के  रूप में विध्यमान होता है। इस नील हरित शैवाल को  एनाबिना एजोली के  नाम से जाना जाता है जो  कि वातावरण से नत्रजन के  स्थायीकरण के  लिए...